Vijaya Ekadashi 2026: आज विजया एकादशी और कुंभ संक्रांति का दुर्लभ संयोग, जानें विजया एकादशी की ये व्रत कथा

Vijaya Ekadashi 2026: आज फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है और आज ही भगवान सूर्य कुंभ राशि में प्रवेश कर रहे हैं। इस तरह आज विजया एकादशी पर कुंभ संक्रांति का दुर्लभ संयोग बन रहा है। आइए जानें विजया एकादशी की व्रत कथा और कुंभ संक्रांति के नियम

अपडेटेड Feb 13, 2026 पर 1:41 PM
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आज कुंभ संक्रांति और विजया एकादशी का दुर्लभ संयोग बन रहा है।

Vijaya Ekadashi 2026: आज फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है और सूर्य भगवान भी आज मकर राशि से निकल कर कुंभ राशि में प्रवेश कर रहे हैं। इस तरह आज कुंभ संक्रांति और विजया एकादशी का दुर्लभ संयोग बन रहा है। एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समपिर्त होता है, जबकि संक्रांति में सूर्य भगवान की पूजा का विधान है। सूर्य के राशि परिवर्तन को संक्रांति कहा जाता है। इसलिए आज भगवान विष्णु की पूजा के साथ-साथ सूर्य देव की भी पूजा का दुर्लभ अवसर भक्तों को मिल रहा है। सूर्य को ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों का राजा माना जाता है। आज का दिन कुंडली के इस सबसे प्रभावशाली ग्रह को मजबूत करने के लिए बहुत शुभ है। आइए जानें विजया एकादशी के व्रत में कौन सी कथा सुनने से ही शत्रु कमजोर होते हैं और कुंभ संक्रांति के किन नियमों का पालन करना जरूरी है?

विजया एकादशी व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से इस एकादशी का महत्व पूछा था। तब श्रीकृष्ण ने बताया कि इस व्रत की महिमा स्वयं ब्रह्माजी ने देवर्षि नारद को सुनाई थी।

त्रेतायुग में जब रावण माता सीता का हरण कर उन्हें लंका ले गया था, तब भगवान श्रीराम अपनी वानर सेना के साथ समुद्र तट पर पहुंचे। विशाल समुद्र को पार करना असंभव लग रहा था। तब लक्ष्मण जी ने पास ही एक महान ऋषि के आश्रम में जाकर मार्गदर्शन लेने का सुझाव दिया।

ऋषि ने भगवान श्रीराम को फाल्गुन कृष्ण पक्ष की विजया एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। तब श्रीराम ने अपनी सेना के साथ पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से यह व्रत किया। व्रत के पुण्य प्रभाव से समुद्र पार करने का मार्ग प्रशस्त हुआ और अंत में उन्होंने रावण पर विजय प्राप्त कर माता सीता को मुक्त कराया।

कुंभ संक्रांति के ये नियम ध्यान रखें


कुंभ संक्रांति पर क्या करें?

  • इस दिन किसी भी पवित्र नदी में स्नान करना मोक्ष दायक माना जाता है। अगर बाहर जाना मुश्किल है, तो घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
  • संक्रांति के दिन सुबह जल्दी उठकर तांबे के लोटे में जल, लाल फूल और अक्षत डालकर भगवान सूर्य को अर्घ्य दें। इससे करियर में उन्नति मिलती है।
  • कुंभ संक्रांति पर दान का विशेष महत्व है। ऐसे में इस दिन जरूरतमंदों को अनाज, गर्म कपड़े, तिल और गुड़ का दान करें।
  • इस दिन पितरों के निमित्त दान करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है।
  • आज आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करने आत्मविश्वास बढ़ता है और कार्यक्षेत्र की परीशानियां भी दूर होती हैं।

क्या न करें?

  • सात्विक भोजन करें। मांस, मदिरा, लहसुन, प्याज का सेवन बिल्कुल न करें।
  • किसी को बुरा-भला कहना या झगड़ा न करें। वाणी में मधुरता बनाए रखें।
  • इस दिन सूर्योदय के बाद तक सोना शुभ नहीं माना जाता। कोशिश करें कि जल्दी उठें।
  • आज हर तरह के नशे से दूर रहें, वरना कुंडली में सूर्य की स्थिति कमजोर हो सकती है।

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