Somvati Amavasya 2026: ज्‍येष्‍ठ अधिक मास में आएगी सोमवती अमावस्‍या, जानें इस दुर्लभ अमावस्‍या की तारीख, पूजा का मुहूर्त और महत्‍व

Somvati Amavasya 2026: हिंदू धर्म में सोमवार को पड़ने वाली अमावस्‍या को सोमवती अमावस्‍या के नाम से जाना जाता है। इस साल ज्‍येष्‍ठ अधिक मास में सोमवती अमावस्‍या का दुर्लभ संयोग बन रहा है। आइए जानें इसकी सही तारीख, पूजा का मुहूर्त और महत्‍व

अपडेटेड Jun 02, 2026 पर 7:10 PM
साल 2026 में सोमवती अमावस्‍या ज्येष्‍ठ अधिक मास में पड़ने से इसका महत्‍व और भी बढ़ गया है।

Somvati Amavasya 2026: हिंदू धर्म में अमावस्‍या तिथि‍ पितरों को समर्पित मानी जाती है। इस दिन पितृ शांति के लिए श्राद्ध और तर्पण करना बहुत शुभ माना जाता है। हिंदू कैलेंडर के हर माह में एक अमावस्‍या तिथ‍ि होती है, जिस द‍िन बहुत से लोग पवित्र नदियों में स्‍नान करते हैं और पूजा के साथ पितृ तर्पण आदि कर्म करते हैं। यह तिथ‍ि जब सोमवार के दिन पड़ती है, तो इसका महत्‍व बढ़ जाता है और इसे सोमवती अमावस्‍या के नाम से भी जाना जाता है।

इस साल सोमवती अमावस्‍या पर दुर्लभ संयोग बन रहा है। दरअसल, इस साल ज्‍येष्‍ठ माह में अधिक मास लगा है। साल 2026 में सोमवती अमावस्‍या ज्येष्‍ठ अधिक मास में पड़ने से इसका महत्‍व और भी बढ़ गया है। अधिक मास तीन साल बाद आता है। ऐसे में अधिक मास की अमावस्‍या अपने आप में दुर्लभ होती है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अधिक मास की अमावस्‍या तिथि‍ में पितरों के लिए की जाने वाली पूजा का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। मान्यता है कि इस दिन पितरों के लिए पूजा करने पर जहां उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है, वहीं कुंडली में स्थित पितृदोष दूर होत है। ऐसे में ज्येष्ठ अधिक मास की अमावस्या पर पितरों का आशीर्वाद पाने के लिए नीचे बताए गये पूजा के उपाय अवश्य करें।

सोमवती अमावस्या 2026 कब है?

पंचांग के अनुसार, इस बार सोमवती अमावस्या तिथि 14 जून, रविवार को दिन में 12 बजकर 20 मिनट पर शुरू होगी और अगले दिन 15 जून, सोमवार को सुबह 8 बजकर 24 मिनट तक व्याप्त रहेगी। ऐसे में उदया तिथि के आधार पर 15 जून 2026 को सोमवती अमावस्या का व्रत रखा जाएगा और स्नान-दान किया जाएगा। वहीं, पितृ कार्य के लिए 14 जून का दिन उत्तम रहेगा।

सोमवती अमावस्या 2026 शुभ मुहूर्त


अमावस्या तिथि प्रारंभ : 14 जुलाई 2026 को दोपहर 12 बजकर 20 मिनट

अमावस्या तिथि समाप्त : 15 जुलाई 2026 सुबह 8 बजकर 24 मिनट

स्नान-दान का शुभ समय : ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 04 मिनट से सुबह 4 बजकर 44 मिनट तक

सोमवती अमावस्या का महत्व

सोमवती अमावस्या के दिन सुहागिन महिलाएं व्रत रखती है और पति की लंबी उम्र के लिए भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती है। इस दिन पीपल के पेड़ की भी पूजा और परिक्रमा भी की जाती है। अमावस्या के दिन पवित्र नदी में स्नान करने और दान करने से कई जन्‍म के पापों का नाश होता है। इसके अलावा, अमावस्या के दिन पितरों का तर्पण और श्राद्ध करने से पितृ दोष में शांत होता है और पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है।

सोमवती अमावस्या के ये नियम जरूर जानें

  • सोमवती अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।
  • भगवान शिव का अभिषेक करें और माता पार्वती की पूजा करें।
  • इस दिन तर्पण और श्राद्ध करने से पितर प्रसन्न होते हैं।
  • अमावस्या के दिन दान-पुण्य का कार्य अवश्य करें।
  • तामसिक भोजन न करें और किसी का अपमान करने से बचे।

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