Shattila Ekadashi 2026 Upay: माघ महीने की षटतिला एकादशी पर कष्टों को दूर करने के लिए करें ये उपाय, जानें कब किया जाएगा षटतिला एकादशी व्रत?

Shattila Ekadashi 2026 Upay: षटतिला एकादशी का व्रत माघ महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। भगवान विष्णु को समर्पित इस व्रत में कुछ उपाय करने से सभी कष्ट दूर होते हैं। आइए जानें किस दिन किया जाएगा षटतिला एकादशी का व्रत

अपडेटेड Jan 05, 2026 पर 8:03 PM
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ये व्रत हर साल माघ महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाएगा।

Shattila Ekadashi 2026 Upay: षटतिला एकादशी तिथि को हिंदू धर्म में महत्वपूर्ण तिथियों में से एक माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। ये व्रत हर साल माघ महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाएगा। माना जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ-साथ छह तरीके से तिल का उपयोग करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है और बैकुंठ की प्राप्ति होती है। शास्त्रों में इस व्रत को बेहद फलदायी बताया गया है। हिंदू कैलेंडर के प्रत्येक माह में दो बार कृष्ण और शुक्ल पक्ष में एकादशी तिथि आती है। इस तरह साल में 24 एकादशी तिथियां आती हैं। हर एकादशी का अलग नाम और अलग महत्व होता है। इनमें षटतिला एकादशी का भी अलग महत्व है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ तिल के उपयोग का विधान शास्त्रों में बताया गया है। आइए जानते हैं इस दिन किए जाने वाले जरूरी काम और उनका धार्मिक महत्व।

कब होगा षटतिला एकादशी का व्रत

षटतिला एकादशी 14 जनवरी 2026, बुधवार को रखा जाएगा। पंचांग के अनुसार माघ मास के कृष्णपक्ष में पड़ने वाली एकादशी तिथि 13 जनवरी 2026 को दोपहर 03:17 बजे प्रारंभ होकर अगले दिन 14 जनवरी 2026 को सायंकाल 05:52 बजे तक रहेगी। वहीं इस व्रत का पारण 15 जनवरी 2026 को प्रात:काल 7:15 से 09:21 बजे तक रहेगी।

षटतिला एकादशी पर ये उपाय दिलाता है बैकुंड में स्थान

तिल का उबटन - स्नान से पहले तिल का उबटन लगाएं। इससे अच्छे स्वास्थ्य और सौंदर्य के साथ-साथ अशुभ ग्रह शांत होते हैं।

तिल स्नान - पानी में थोड़े से काले तिल डालकर स्नान करें। माना जाता है कि इससे शरीर की शुद्धि के साथ-साथ नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है।


तिल का हवन - भगवान विष्णु की पूजा के दौरान हवन कुंड में काले तिल की आहुति दें। इससे घर में सुख-शांति आती है।

तिल का तर्पण - पितरों की शांति के लिए तिल मिले हुए जल से तर्पण करें। इससे पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।

तिल का दान - इस दिन तिल और तिल से बनी मिठाइयों का दान करना महादान माना जाता है। मान्यता है कि जितने तिलों का दान किया जाता है, उतने शुभ फलों की प्राप्ति होती है।

तिल से पारण - व्रत के पारण में फलाहार के रूप में तिल का सेवन जरूर करें।

षटतिला एकादशी पूजन विधि

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।
  • इसके बाद भगवान विष्णु के सामने हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें।
  • भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी दल और धूप-दीप अर्पित करें।
  • भगवान को तिल से बनी मिठाई का भोग जरूर लगाएं।
  • 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जप करें।
  • एकादशी की रात को सोना नहीं चाहिए।
  • ऐसे में रात भर श्री हरि के नामों का भजन-कीर्तन करें।

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