Shukra Pradosh Vrat 2026 Date: हिंदू कैलेंडर के प्रत्येक माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित मानी जाती है। इस दिन प्रदोष व्रत किया जाता है और प्रदोष काल में पूजा की जाती है। यूं तो पूरे साल में आने वाले सभी प्रदोष व्रत का अपना अहम स्थान है, लेकिन अधिक मास के प्रदोष व्रत को और भी महत्वपूर्ण माना जाता है। अधिक मास हिंदू कैलेंडर का अतिरिक्त महीना होता है, जो हर तीन साल में जुड़ता है।
इस साल ज्येष्ठ माह में अधिक मास लगा है। इस वजह से ज्येष्ठ माह में आने वाले व्रतों की संख्या बढ़ गई है। ज्येष्ठ माह में इस बार 4 एकादशी, 4 प्रदोष, 2 पूर्णिमा और 2 अमावस्या तिथियों का संयोग बना है। आज ज्येष्ठ अधिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि है, इसलिए आज इस माह का अंतिम प्रदोष व्रत किया जा रहा है। हालांकि जून माह का ये पहला प्रदोष व्रत है। अधिक मास होने के कारण और सर्वार्थ सिद्धि योग बनने के कारण आज का व्रत बहुत खास हो गया है।
जून का पहला प्रदोष व्रत 2026 तारीख
पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ अधिकमास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 12 जून को शाम 7 बजकर 36 मिनट पर शुरू होगी। यह तिथि 13 जून को शाम 4 बजकर 7 मिनट तक मान्य है। ऐसे में प्रदोष पूजा मुहूर्त के आधार पर जून का पहला प्रदोष व्रत 12 जून को रखा जाएगा। इस दिन शुक्रवार होने की वजह से यह शुक्र प्रदोष व्रत होगा।
शुक्र प्रदोष व्रत 2026 मुहूर्त
शुक्र प्रदोष के दिन ब्रह्म मुहूर्त 04:02 ए एम से लेकर 04:42 ए एम तक है, वहीं दिन का शुभ समय यानि अभिजीत मुहूर्त 11:53 ए एम से लेकर दोपहर 12:49 पी एम तक है। निशिता मुहूर्त देर रात 12:01 ए एम से लेकर 13 जून को 12:41 ए एम तक है।
शुक्र प्रदोष व्रत पर सर्वार्थ सिद्धि योग
इस बार के शुक्र प्रदोष व्रत पर सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। यह शुभ फलदायी योग सुबह में 05 बजकर 23 मिनट से बनेगा और सुबह 06 बजकर 28 मिनट पर खत्म हो जाएगा। इस दिन अतिगण्ड योग प्रात:काल से लेकर रात 09:26 पी एम तक है, उसके बाद से सुकर्मा योग प्रारंभ होगा। व्रत के दिन अश्विनी नक्षत्र प्रात:काल से लेकर 06:28 ए एम तक है, उसके बाद से भरणी नक्षत्र है, जो 13 जून को 04:05 तक है।