Shukra Pradosh Vrat Katha Hindi: शुक्र प्रदोष व्रत आज, इस व्रत कथा के बिना अधूरा है आज का उपवास

Shukra Pradosh Vrat Katha Hindi: आज माघ शुक्ल पक्ष का प्रदोष व्रत किया जा रहा है। इस व्रत में प्रदोष काल में पूजा का विधान है। आज के व्रत में प्रदोष व्रत कथा सुनने से भगवान शिव और मां पार्वती प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामना पूरी होने का आशीर्वाद देते हैं

अपडेटेड Jan 30, 2026 पर 6:51 PM
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यह दिन शिव भक्तों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।

Shukra Pradosh Vrat Katha Hindi: आज माघ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि है और आज माघ मास का अंतिम प्रदोष व्रत किया जा रहा है। आज के दिन पूरे दिन उपवास कर प्रदोष काल में मां पार्वती और भगवान शिव की पूजा करने से कई जन्मों का पुण्य फल प्राप्त होता है। यह दिन शिव भक्तों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष व्रत देवाधिदेव महादेव तक पहुंचने का सबसे सरल उपाय है। इस दिन प्रदोष व्रत की कथा कहने और सुनने से भगवान शिव और माता पार्वती प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों की मनोकामना पूरी होने का आशीर्वाद देते हैं। इस व्रत कथा के बिना प्रदोष व्रत का अनुष्ठान अधूरा माना जाता है।

प्रदोष व्रत कथा

पौराणिक मान्यता के अनुसार एक नगर में एक ब्राह्मण महिला रहती थी। पति के देहांत के बाद इस दुनिया में उसका कोई नहीं था। अपने बेटे के साथ वह भिक्षा मांगकर किसी तरह जिंदगी जी रही थी। एक बार वह ऐसे ही भिक्षा लेकर वापस घर आ रही थी तो रास्ते में एक घायल लड़के को देखा। उसे देखकर वो ब्राह्मणी उसे अपने घर ले आती है और उसकी सेवा-सत्कार करती है। वो लड़का कोई और नहीं बल्कि विदर्भ राज्य का राजकुमार था। दुश्मनों ने उसके राज्य पर आक्रमण कर उसके पिता को बंदी बना लिया था और राज्य पर अपना अधिकार जमा लिया था।

इसी वजह से वो भटक रहा था। स्वस्थ होने के बाद राजकुमार ब्राह्मणी और उसके बेटे के साथ ही रहने लगा। एक दिन अंशुमति नाम की एक गंधर्वकन्या की दृष्टि राजकुमार पर पड़ती है और वह आकर्षित हो जाती है। वह अपने माता-पिता को राजकुमार से मिलाती है। उसके माता-पिता राजकुमार से बेटी की शादी के लिए राजी होते हैं। कुछ समय बाद भगवान शिव कन्या के माता-पिता के सपने में आकर उन्हें बेटी और राजकुमार की शादी करवाने का आदेश देते हैं। भगवान की आज्ञा पर वो लोग अपनी बेटी की शादी राजकुमार से जल्द ही करवा देते हैं।

इधर, ब्राह्मणी नियमित रूप से प्रदोष व्रत रखती थी और सच्चे मन से भगवान शिव की पूजा किया करती थी। उसके पुण्य प्रताप से राजकुमार अंशुमति अपने पिता की सेना की मदद से शत्रुओं को पराजित कर विदर्भ राज्य को फिर से प्राप्त करने में सफल होते हैं और अपने पिता के साथ रहने लगता है। बाद में उसने ब्राह्मणी के पुत्र को अपने राज्य का प्रधानमंत्री बना दिया था। इसी वजह से माना जाता है कि प्रदोष व्रत की मदद से जिस तरह से ब्राह्मणी की जिंदगी की परिस्थिति बदली, उसी तरह भगवान शिव अपने हर सच्चे भक्त के कष्ट दूर करते हैं।

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