Sita Navami 2025: सीता नवमी और दुर्गाष्टमी पर बन रहे हैं शुभ योग, जानिए पूजन का सही समय

Sita Navami 2025: सीता नवमी को सीता जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। यह दिन खासकर विवाहित महिलाओं के लिए बहुत पवित्र माना जाता है। इस अवसर पर महिलाएं व्रत रखती हैं और मां सीता की पूजा कर अपने पति की लंबी उम्र, सुख-शांति और दांपत्य जीवन की मंगलकामना करती हैं

अपडेटेड May 05, 2025 पर 10:18 AM
Sita Navami 2025: सीता नवमी को सीता जयंती भी कहा जाता है।

आज का दिन हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है, क्योंकि आज वैशाख शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि है। ये तिथि दो पावन पर्वों का संगम लेकर आई है—सीता नवमी और मासिक दुर्गाष्टमी। एक ओर ये दिन माता सीता के प्राकट्य की स्मृति में मनाया जाता है, जिन्हें राजा जनक को खेत जोतते समय धरती से प्राप्त हुई थीं, वहीं दूसरी ओर ये दिन मां दुर्गा की उपासना के लिए भी खास माना जाता है। दोनों पर्व नारी शक्ति, त्याग और मर्यादा के प्रतीक हैं। आज श्रद्धालु व्रत रखते हैं, कथा-पाठ करते हैं और विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।

अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। ऐसे शुभ संयोग के दिन मंदिरों और घरों में पूजा-पाठ का विशेष महत्व है, जिससे वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर जाता है।

सीता नवमी


सीता नवमी को सीता जयंती भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन मिथिला नरेश राजा जनक को हल चलाते समय मां सीता धरती से प्राप्त हुई थीं। इसलिए उन्हें भूमिपुत्री और धरती की बेटी माना जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं व्रत रखती हैं और अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं।

मासिक दुर्गाष्टमी

आज मासिक दुर्गाष्टमी भी है, जो हर माह की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। इस दिन मां दुर्गा की विशेष पूजा और उपासना की जाती है। ये दिन स्त्रियों और साधकों के लिए आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।

पंचांग के अनुसार तिथि और शुभ योग

  • अष्टमी तिथि समाप्त – सुबह 07:35 बजे
  • नवमी तिथि प्रारंभ – सुबह 07:35 बजे से
  • नवमी तिथि समाप्त – 6 मई, सुबह 08:38 बजे
  • वृद्धि योग – रात 12:20 बजे तक
  • रवि योग – दोपहर 2:01 बजे से 6 मई की सुबह 5:36 बजे तक

पूजन का सही समय

  • मध्याह्न पूजन मुहूर्त – सुबह 10:58 से दोपहर 1:38 तक
  • अभिजीत मुहूर्त – 11:51 से 12:45 तक
  • विजय मुहूर्त – 14:32 से 15:25 तक
  • गोधूलि मुहूर्त – 18:58 से 19:19 तक
  • अमृत काल – 12:20 से 14:01 तक

पूजन विधि

सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लें। मां सीता, भगवान राम और मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाएं। फूल, फल, धूप और नैवेद्य अर्पित करें। रामायण पाठ और माता सीता की कथा का श्रवण करें। भोग लगाकर आरती करें और अंत में कन्याओं को भोजन और उपहार देकर पूजन को पूर्ण करें।

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