Somvati Amavasya 2026: अधिक मास के समापन पर सोमवती अमावस्या का दुर्लभ संयोग 30 साल बाद, आज पीपल के नीचे जरूर करें ये उपाय

Somvati Amavasya 2026: अमावस्या तिथि को हिंदू धर्म में सबसे पवित्र और प्रभावशाली माना जाता है। आज सोमवार के दिन ज्येष्ठ अधिक मास की अमावस्या तिथि है। यह दुर्लभ संयोग 30 साल बाद बना है। आज के दिन पीपल के पेड़ के नीचे कुछ उपाय करने से भाग्य बदल सकता है

अपडेटेड Jun 15, 2026 पर 11:57 AM
ज्येष्ठ अधिक मास में सोमवती अमावस्या का दुर्लभ संयोग 30 साल के बाद बना है।

Somvati Amavasya 2026: हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का अहम स्थान है। पितरों को समर्पित यह तिथि, जब किसी खास दिन पड़ती है, तो इसका महत्व बढ़ जाता है। सोमवार की अमावस्या को सोमवती अमावस्या और शनिवा को पड़ने वाले अमावस्या को शनिश्चरी अमावस्या कहते हैं। आज ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि है और आज सोमवार भी है। इस तरह आज ज्येष्ठ अधिक मास की सोमवती अमावस्या है। ज्येष्ठ अधिक मास में सोमवती अमावस्या का दुर्लभ संयोग 30 साल के बाद बना है। इससे आज का यह दिन और भी महत्वपूर्ण हो गया है।

आज जरूर करें पीपल की विशेष पूजा

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह दिन पितृ शांति, विष्णु और शिव पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। आज के दिन अगर आप गंगा आदि पवित्र नदी में स्नान नहीं कर पा रहे हैं, तो घर पर गंगाजल युक्त जल से स्नान करें। पीपल के वृक्ष के नीचे कच्चे दूध और काले तिल अर्पित करें तथा शाम को दीपदान करें।

सोमवती अमावस्या पर करें ये उपाय

ज्योतिष शास्त्र में अमावस्या के दिन पीपल के वृक्ष की पूजा बहुत फलदायी मानी जाती है। आज दोपहर के समय पीपल के पेड़ की जड़ में कच्चे दूध में काले तिल मिलाकर अर्पित करना चाहिए। मान्यता है कि पीपल के वृक्ष में त्रिदेवों का वास होता है, इसलिए यहां दूध और तिल अर्पित करने से पितृ दोष का शमन होता है और घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो जाती है। इसके अलावा, शाम के समय पीपल के वृक्ष के नीचे घी का दीपक जलाना यानी दीपदान करना सुख-समृद्धि के द्वार खोलता है।

मिथुन संक्रांति के साथ सोमवती अमावस्या


इस साल ज्येष्ठ माह में अधिक मास लगा था और आज ज्येष्ठ अधिक मास की अवास्या है, यानी आज अधिक मास का आखिरी दिन है। साथ ही, आज सूर्य देव का राशि परिवर्तन का भी संयोग बन रहा है। सूर्य भगवान आज मिथुन राशि में गोचर करेंगे, जिससे सोमवती अमावस्या और मिथुन संक्रांति का भी संयोग बन रहा है। जानकारों का कहना है कि ऐसा अवसर 396 साल के बाद आया है। इससे पहले जून 1630 को ऐसा संयोग बना था।

भगवान शिव की आराधना और अन्य उपाय

सोमवती अमावस्या पर भगवान शिव की पूजा करना बहुत लाभकारी माना जाता है। आज शिवलिंग पर जल और कच्चा दूध अर्पित करें। पूरे दिन “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और भाग्य का उदय होता है। साथ ही आज के दिन जरूरतमंदों को भोजन कराना, पक्षियों को दाना देना और गौ माता को ग्रास खिलाना पुण्यदायी होता है।

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