Tulsi Vivah 2025: भद्रा के साये में न करें तुलसी विवाह, जानें तुलसी विवाह कब करना होगा शुभ और कब से कब तक है भद्रा?

Tulsi Vivah 2025: हिंदू धर्म में तुलसी विवाह को बहुत पवित्र और महत्वपूर्ण आयोजन माना जाता है। यह हर साल कार्तिक मार्स के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि के दिन किया जाता है। लेकिन इस बार तुलसी विवाह के दिन भद्रा का साया रहेगा। ऐसे में तुलसी विवाह किस समय करना शुभ रहेगा? आइए जानें

अपडेटेड Oct 30, 2025 पर 6:11 PM
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इस साल देवउठनी एकादशी 01 नवंबर को होगी, जबकि तुलसी विवाह इसके अगले दिन होता है।

Tulsi Vivah 2025: हिंदू धर्म में तुलसी विवाह का बहुत महत्व है। इस दिन तुलसी जी की शालिग्राम भगवान के साथ विवाह होता और चार माह से स्थगित चल रहे मांगलिक कार्य फिर से शुरू हो जाते हैं। भगवान विष्णु अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी पर हर साल योग निद्रा में चले जाते हैं। इस दौरान धरतीवासियों के लिए मांगलिक कार्य प्रतिबंधित रहते हैं। भगवान विष्णु कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को योग निद्रा से जागते हैं संसार के संचालन का कार्यभार फिर से संभालते हैं। इसके अगले दिन कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को भगवान विष्णु और माता तुलसी का विवाह कराया जाता है। इसे सनातन परंपरा में कन्यादान के बराबर पुण्यकारी माना गया है। तुलसी को माता लक्ष्मी का रूप माना जाता है। इस दिन श्रद्धापूर्वक इनका विवाह कराने से वैवाहिक जीवन में सौहार्द्र, प्रेम और स्थिरता प्राप्त होती है। यह अनुष्ठान घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा के संचार को भी बढ़ाता है।

इस साल देवउठनी एकादशी 01 नवंबर को होगी, जबकि तुलसी विवाह इसके अगले दिन होता है। लेकिन इस साल इन दोनों आयेजनों के दौरान भद्रा काल लग रहा है, जिससे लोगों में दुविधा है कि ये पर्व किस दिन मनाया जाएगा। असल में बहुत से लोग देवउठनी एकादशी तिथि के दिन भी तुलसी विवाह करते हैं, इसलिए भद्रा का विचार करना बहुत जरूरी है। भद्रा को सबसे अशुभ समय माना जाता है, जिसमें काई भी शुभ काम नहीं करना चाहिए। आइए जानें भद्रा काल का समय क्या है और तुलसी विवाह का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा?

तुलसी विवाह कब है?

इस बार तुलसी विवाह को लेकर लोगों में भ्रम बना हुआ है। पंचांग के अनुसार, द्वादशी तिथि का आरंभ 2 नवंबर को सुबह 07:31 बजे से होगा। इस तिथि का समापन 3 नवंबर को सुबह 05:07 बजे होगा। ऐसे में तुलसी विवाह 2 नवंबर को ही कराना उचित होगा।

तुलसी विवाह शुभ मुहूर्त

एक नवंबर को भद्रा दोपहर 3:30 से रात 2:56 बजे तक रहेगी। भद्रा काल में मांगलिक कार्य नहीं किया जाता है, इसलिए तुलसी विवाह अगले दिन 2 नवंबर को होगा।


2 नवंबर के शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04:50 बजे से सुबह 05:42 बजे तक।

अभिजित मुहूर्त- सुबह 11:42 बजे से दोपहर 12:26 बजे तक।

विजय मुहूर्त- दोपहर 01:55 बजे से दोपहर 02:39 बजे तक।

गोधूलि मुहूर्त- शाम 05:35 बजे से शाम 06:01 बजे तक।

अमृत काल- सुबह 09:29 बजे से सुबह 11:00 बजे तक।

त्रिपुष्कर योग- सुबह 07:31 बजे से शाम 05:03 बजे तक।

तुलसी विवाह का महत्व : धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तुलसी विवाह करने से वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि, सौभाग्य और शांति प्राप्त होती है। तुलसी विवाह कराने से कन्यादान के समान फल मिलता है और संतान सुख की प्राप्ति होती है। इसके अलावा यह जीवन से दरिद्रता दूर करता हैऔर धन-धान्य मेंवृद्धि होती है।

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