Vasanta Purnima 2026: हिंदू कैलेंडर के अंतिम महीने फाल्गुन के आखिरी दिन वसंत पूर्णिमा का व्रत किया जाता है। ये तिथि वसंत ऋतु के आने और सर्दियों के जाने का प्रतीक मानी जाती है। वसंत पूर्णिमा को फाल्गुन पूर्णिमा भी कहते हैं। इसी तिथि पर छोटी होली का पर्व और होलिका दहन भी किया जाता है। ये हिंदू वर्ष की आखिरी पूर्णिमा तिथि मानी जाती है। होली पूर्णिमा और फाल्गुन पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान कृष्ण और राधा रानी की पूजा की जाती है। आइए जानें इस साल वसंत पूर्णिमा किस दिन होगी और पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्व क्या है ?
वसंत पूर्णिमा 2026 की तिथि और समय
वसंत पूर्णिमा 2026 शुभ मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त- दोपहर 12:10 बजे से दोपहर 12:56 बजे
गोधूलि मुहूर्त- शाम 06:20 बजे से शाम 06:44 बजे
प्रातः सन्ध्या- प्रात: 05:30 बजे से प्रात: 06:44 बजे
विजय मुहूर्त- दोपहर 02:29 बजे से दोपहर 03:16 बजे
सायाह्न सन्ध्या- शाम 06:22 बजे से शाम 07:36 बजे
निशिता मुहूर्त- मध्यरात्रि 12:08 बजे, मार्च 04 से मध्यरात्रि 12:57 बजे, मार्च 04
अमृत काल- मध्यरात्रि 01:13 बजे, मार्च 04 से मध्यरात्रि 02:49 बजे, मार्च 04
वसंत पूर्णिमा क्यों कहते हैं?
भारत में वसंत ऋतु के बीच में पड़ने वाली पूर्णिमा को वसंत पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। वसंत ऋतु आमतौर पर 19 फरवरी के आसपास शुरू होकर 19 अप्रैल तक चलती है। इस दौरान, प्रकृति चटख रंगों से सराबोर दिखाई देती है। फाल्गुन पूर्णिमा इसी मौसम में आती है, इसलिए इसे वसंत पूर्णिमा कहा जाता है। इस समय होली का जश्न वसंत के रंगों और ताजगी को दिखाता है।
वसंत पूर्णिमा और होली के बीच कनेक्शन
होली फाल्गुन पूर्णिमा को मनाई जाती है और इसे रंगों के त्योहार के रूप में जाना जाता है। रंग खेलने की परंपरा भगवान कृष्ण से जुड़ी है, माना जाता है कि उन्होंने राधा और गोपियों के साथ होली मनाई थी। चूंकि, होली वसंत ऋतु के बीच में आती है, इसलिए इसे वसंत का त्योहार बताया जाता है। होली पूर्णिमा, फाल्गुन पूर्णिमा और वसंत पूर्णिमा, ये सभी हिंदू कैलेंडर में एक ही पवित्र पूर्णिमा के दिन को कहते हैं।
वसंत पूर्णिमा का आध्यात्मिक महत्व
होली मनाने के अलावा, वसंत पूर्णिमा को देवी लक्ष्मी और संत श्री चैतन्य महाप्रभु की जयंती के तौर पर भी मनाया जाता है। इसलिए यह दिन अलग-अलग परंपराओं के भक्तों के लिए आध्यात्मिक रूप से बहुत मायने रखता है।