Vat Savitri Vrat 2025: पूजा में इन 21 चीजों का होना है जरूरी, एक भी छूटी तो अधूरी रह सकती है पूजा, जानें पूरी सामग्री लिस्ट और विधि
Vat Savitri Vrat 2025: वट सावित्री व्रत हिंदू धर्म में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु की कामना से व्रत रखती हैं। ज्येष्ठ मास की अमावस्या को यह व्रत होता है। सावित्री देवी और वट वृक्ष की पूजा विधिपूर्वक की जाती है, जिसके लिए ये पूरी पूजा सामग्री आवश्यक होती है
Vat Savitri Vrat 2025: वट सावित्री व्रत की कथा में सावित्री के साहस और निष्ठा की गाथा है
हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत को सौभाग्यवती महिलाओं के लिए अत्यंत पवित्र और फलदायी माना गया है। ये व्रत ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को रखा जाता है, और इस बार ये पर्व 26 मई 2025 को मनाया जाएगा। इस दिन विवाहित महिलाएं संपूर्ण सोलह श्रृंगार करके व्रत का संकल्प लेती हैं और वट वृक्ष की विधिवत पूजा करती हैं। साथ ही, वे सावित्री और सत्यवान की कथा का श्रवण कर अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन की सुख-शांति की कामना करती हैं।
मान्यता है कि इस दिन वट वृक्ष की पूजा और परिक्रमा करने से सौभाग्य स्थिर होता है और जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। यदि आप भी इस शुभ व्रत को करने जा रही हैं, तो समय से पहले संपूर्ण पूजन सामग्री तैयार कर लें, जिससे पूजा में कोई कमी न रह जाए।
पूजा की तैयारी
व्रत की पूजा विधिपूर्वक तभी सफल होती है, जब उसमें समस्त सामग्री शामिल हो। अधूरी सामग्री से की गई पूजा को अधूरा माना जाता है। वट सावित्री व्रत के लिए आपको इन सामग्रियों की आवश्यकता होगी
तांबे का लोटा – जल चढ़ाने के लिए
गंगाजल – शुद्धिकरण के लिए
सिंदूर, रोली और मौली (कलावा) – श्रृंगार और पूजन हेतु
कच्चा सूत – वट वृक्ष की परिक्रमा के लिए
अगरबत्ती, दीपक, घी और बाती – आरती और पूजा के लिए
लाल और पीले फूल – देवी को अर्पण के लिए
अक्षत (चावल), तिल और केले के पत्ते – पारंपरिक सामग्री
भीगे हुए काले चने, मौसमी फल, मिठाई और लीची – भोग के रूप में
बांस का पंखा और मिट्टी का घड़ा – सौभाग्य के प्रतीक
नए वस्त्र – विशेषकर लाल या पीले रंग के
वर-वधू के वस्त्र से बने जोड़े – यदि आप पहली बार व्रत रख रही हैं
नोट: यदि वट वृक्ष आपके आस-पास उपलब्ध नहीं है, तो उसकी एक डाली लाकर उसी की पूजा की जा सकती है।
व्रत की पूजा विधि
स्नान और श्रृंगार: व्रत वाले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और पीले या लाल वस्त्र पहनें। संपूर्ण सोलह श्रृंगार करें।
आशीर्वाद और संकल्प: सबसे पहले सास-ससुर के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लें और व्रत का संकल्प करें।
वट वृक्ष की पूजा: वट वृक्ष के पास जाकर जल, सिंदूर, अक्षत, तिल, फूल और कच्चा सूत अर्पित करें।
परिक्रमा विधि: कच्चे सूत को वट वृक्ष के चारों ओर लपेटते हुए 7, 21 या 108 बार परिक्रमा करें।
व्रत कथा का पाठ: वट सावित्री व्रत कथा का श्रवण या पाठ अवश्य करें। इससे पति की रक्षा होती है और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
भोजन: पूजा के बाद फलाहार करें और व्रत के अनुसार दिन व्यतीत करें।
क्यों रखा जाता है ये व्रत?
वट सावित्री व्रत की कथा में सावित्री के साहस और निष्ठा की गाथा है, जिन्होंने यमराज से अपने पति सत्यवान का जीवन वापस ले लिया था। इस व्रत को रखने से पति की आयु लंबी होती है और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। यह दिन नारी शक्ति और श्रद्धा का प्रतीक है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई सामग्री जानकारी मात्र है। हम इसकी सटीकता, पूर्णता या विश्वसनीयता का दावा नहीं करते। कृपया किसी भी कार्रवाई से पहले विशेषज्ञ से संपर्क करें।