Apara Ekadashi 2025: हिन्दू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है और साल भर में आने वाली 24 एकादशियों में से अपरा एकादशी का अपना अलग ही धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। वर्ष 2025 में ये शुभ तिथि 23 मई यानी आज पड़ रही है। ये एकादशी ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष में आती है और इसका व्रत करने से व्यक्ति को समस्त पापों से मुक्ति मिलती है तथा मोक्ष की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करने से जीवन के समस्त कष्ट दूर हो जाते हैं और सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।
साथ ही इस दिन दान और पुण्य कार्य करने से सौगुना फल प्राप्त होता है। अपरा एकादशी न केवल आत्मिक शुद्धि का अवसर है, बल्कि ये पर्व दिवंगत आत्माओं की शांति और अपने जीवन में सकारात्मकता लाने का मार्ग भी प्रदान करता है।
व्रत कथा का पाठ क्यों है जरूरी?
अपरा एकादशी के दिन केवल उपवास करना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि व्रत कथा का पाठ भी जरूरी होता है। मान्यता है कि व्रत कथा सुनने या पढ़ने से व्रत पूर्ण होता है और आत्मा को पापों से मुक्ति मिलती है।
एक समय की बात है, महीध्वज नाम के एक राजा का छोटा भाई अत्यंत क्रूर और ईर्ष्यालु था। उसने अपने ही भाई की हत्या कर शव को एक पीपल के पेड़ के नीचे गाड़ दिया। अकाल मृत्यु के कारण राजा महीध्वज की आत्मा वहीं भटकने लगी और पेड़ पर उत्पात मचाने लगी।
ऋषि धौम्य ने दिखाया मोक्ष का मार्ग
एक दिन धौम्य ऋषि उस पीपल वृक्ष के पास से गुज़रे। उन्होंने आत्मा की पीड़ा को समझा और उसे परलोक से जुड़ा ज्ञान दिया। इसके बाद उन्होंने अपरा एकादशी का व्रत रखा। व्रत के प्रभाव से महीध्वज की आत्मा को प्रेत योनि से मुक्ति मिल गई और वो स्वर्ग चला गया। ये व्रत एक आत्मा को भी मोक्ष दिला सकता है, ये कथा इसका जीवंत उदाहरण है।
आज के दिन व्रत रखना अत्यंत फलदायी माना जाता है, विशेषकर तब जब ये तिथि एक ही दिन शुरू और समाप्त हो रही हो।