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Vijaya Ekadashi 2026: दशमी से द्वादशी तक बेहद सख्त होते हैं एकादशी व्रत के नियम, जानें विजया एकादशी व्रत की तारीख, मुहूर्त और महत्व

Vijaya Ekadashi 2026: फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को विजया एकादशी का व्रत किया जाएगा। हिंदू धर्म में दशमी तिथि से लेकर द्वादशी तिथि तक एकादशी व्रत के लिए बहुत सख्त नियम बताए गए हैं। आइए जानें क्या हैं ये नियम और विजया एकादशी व्रत की तारीख, मुहूर्त और महत्व

MoneyControl Newsअपडेटेड Feb 11, 2026 पर 9:28 PM
Vijaya Ekadashi 2026: दशमी से द्वादशी तक बेहद सख्त होते हैं एकादशी व्रत के नियम, जानें विजया एकादशी व्रत की तारीख, मुहूर्त और महत्व
विजया एकादशी का व्रत फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है।

Vijaya Ekadashi 2026: विजया एकादशी का व्रत फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। पुराणों के अनुसार, यह व्रत सभी मुश्किलों को दूर करने और मोक्ष पाने में मदद करता है। माना जाता है कि यह एकादशी व्रत करने से भक्तों को जीवन के कठिन हालात में विजय प्राप्त होती है। एकादशी व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है, लेकिन दशमी से लेकर द्वादशी तक इसके बहुत सख्त नियम होते हैं। हर हिंदू माह में एकादशी व्रत कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष में दो बार किया जाता है। एकादशी व्रत भगवान विष्णु की कृपा पाने का सबसे सरल मार्ग है, लेकिन इसमें शुद्धता और स्वच्छता का बहुत ध्यान रखना होता है। आइए जानें शास्त्रों में एकादशी व्रत के लिए क्या नियम बताए गए हैं और कब किया जाएगा विजया एकादशी का व्रत

दशमी से द्वादशी तक एकादशी व्रत के नियम

नारद पुराण के अनुसार, एकादशी व्रत भगवान विष्णु को बहुत प्रिय है। ऐसा कहा जाता है कि जो भी भक्तिपूर्वक इस व्रत को करते हैं, उनको पुण्यफल मिलता है और मोक्ष प्राप्त होता है। एकादशी का व्रत दशमी से शुरू होकर द्वादशी तक रहता है। इस व्रत में भक्त दशमी से ही सात्विक भोजन करते हैं और तामसिक चीजों से दूर रहते हैं।

  • दशमी के दिन, मिट्टी या तांबे के बर्तन में पानी भरें, उस पर पत्ते और भगवान विष्णु की मूर्ति रखें, और अपने मन को शांत और सकारात्मक रखें।
  • एकादशी के दिन, ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें। दशमी के दिन रखे गए कलश पर चंदन का लेप करें और सात अनाज या सप्त धान्य से पूजा करें। पूरी रात जागरण करें और घी का दीया जलाएं। भगवान विष्णु का पंचामृत से अभिषेक करें और भगवान को तुलसी के पत्ते अर्पित करें। एकादशी का व्रत करते समय अपनी क्षमता के अनुसार निर्जला या फलाहार व्रत करें।
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