'छोटी गंगा बोलकर नाले में...', इंग्लैंड की सपाट पिचों पर आकाश दीप कैसे किया कमाल, खुद खोला ये राज

कप्तान शुभमन गिल और यशस्वी जायसवाल ने जहां बल्ले से कमाल दिखाया तो वहीं मोहम्मद सिराज और बुमराह ने गेंदबाजी में जलवा बिखेरा। वहीं टीम इंडिया के नये नवेले पेसर आकाश दीप ने बल्ले और गेंद दोनों से कमाल का प्रदर्शन किया

अपडेटेड Aug 26, 2025 पर 3:58 PM
Akash Deep: टीम इंडिया और उसके यंग ब्रिगेड के लिए हालिया इंग्लैंड दौरा काफी यादगार रहा।

Akash Deep : टीम इंडिया और उसके यंग ब्रिगेड के लिए हालिया इंग्लैंड दौरा काफी यादगार रहा। इंग्लैंड से खेले गए पांच मैचों की टेस्ट सीरीज भले ही 2-2 की बराबरी पर खत्म हुआ हो पर टीम इंडिया के यंग ब्रिगेड ने यहां कमाल का प्रदर्शन किया। कप्तान शुभमन गिल और यशस्वी जायसवाल ने जहां बल्ले से कमाल दिखाया तो वहीं मोहम्मद सिराज और बुमराह ने गेंदबाजी में जलवा बिखेरा। वहीं टीम इंडिया के नये नवेले पेसर आकाश दीप ने बल्ले और गेंद दोनों से कमाल का प्रदर्शन किया। वहीं इंग्लैंड दौरे और अपने प्रदर्शन को लेकर आकाश दीप ने CNN-News18 क्रिकेटनेक्स्ट से खास बातचीत की है।

  • सवाल - इंग्लैंड दौरे के बाद आप पिछले एक महीने से घर पर हैं, यह समय आपके लिए कैसा रहा?
  • जवाब - "यह अनुभव शानदार रहा। आईपीएल के कारण, इंग्लैंड दौरे से पहले मुझे लगातार छह महीने तक घर का समय नहीं मिला था। अब मुझे अपने परिवार के साथ क्वालिटी समय बिताने का मौका मिला।"
  • सवाल - आपने इंग्लैंड दौरे की शुरुआत थोड़ी धीमी रही, लेकिन फिर 10 विकेट लेकर शानदार प्रदर्शन किया। एजबेस्टन में खेलना कैसा रहा?
  • जवाब - दरअसल, जब मैं भारत में था तो इंग्लैंड जाकर खेलने का सोचकर ही बहुत उत्साहित था। मैंने वहाँ की परिस्थितियों के बारे में बहुत कुछ सुना था। लेकिन जब मैं वहां पहुंचा और खुद विकेट और परिस्थितियां देखीं, तो यह मेरी कल्पना से पूरी तरह अलग था। मुझे उस हिंदी फिल्म 'रन' का वह सीन याद आ गया—'छोटी गंगा बताकर नाले में कुदा दिया'। बिल्कुल वैसा ही अनुभव हुआ।

क्योंकि वहाँ कोई स्विंग या सीम मूवमेंट नहीं था और रन आसानी से बन रहे थेटीमें आसानी से 400 से ऊपर स्कोर कर रही थीं। फिर भी मुझे मैच खेलना था, इसलिए मैंने खुद से कहा कि बस गेंद को सही जगह पर डालना है। परिस्थितियों के बारे में ज्यादा सोचने से केवल दबाव बढ़ेगा। इसलिए मैंने केवल अपने जरूरी क्षेत्रों में गेंदबाज़ी करने और अपनी ताकत पर ध्यान केंद्रित करने पर ध्यान रखा।


  • सवाल - बुमराह ने तीन मैच खेले और दो मैच नहीं खेले। और संयोग से, जिन दो मैचों में वह नहीं खेले, वे भारत जीत गया। आपकी क्या राय है?
  • जवाब - बुमराह ने तीन मैच खेले और दो मैच नहीं खेले और जिन दो मैचों में वह नहीं खेले, उनमें भारत जीत गया। लेकिन मैं इसे सिर्फ बुमराह की मौजूदगी या गैरमौजूदगी से जोड़ने के विचार से सहमत नहीं हूँ। बुमराह ने हमेशा अपनी गेंदबाजी से टीम को महत्वपूर्ण जीत दिलाई है। इस दौरे में भी पहले मैच में उन्होंने पांच विकेट लिए और लॉर्ड्स में फिर से शानदार प्रदर्शन किया। इसलिए किसी एक खिलाड़ी की मौजूदगी को जीत-हार के पैमाने के रूप में देखना सही नहीं है।
  • सवाल - यह इंग्लैंड दौरा पिछले दौरे से काफ़ी अलग था। गेंदबाज़ी कोच मोर्ने मोर्कल ने तेज गेंदबाज़ों के यंग ब्रिगेड को कैसे संभाला?
  • जवाब - इंग्लैंड दौरा पिछले अनुभवों से बिल्कुल अलग था क्योंकि टीम की औसत उम्र केवल 28 साल थी और गेंदबाजी में कई नए खिलाड़ी शामिल थे। इस युवा गेंदबाज़ों के समूह को मोर्ने मोर्कल ने बहुत सहज तरीके से संभाला। उनका सबसे बड़ा गुण यह है कि वे चीज़ों को सरल रखते हैं और कोई भी तकनीकी बात ज़रूरत से ज़्यादा जटिल नहीं बनाते। वे हर गेंदबाज की ताकत और कमजोरी अच्छी तरह समझते हैं और जरूरत पड़ने पर छोटे-छोटे सुधार सुझाते हैं। उनकी यह सरलता और स्पष्टता खिलाड़ियों के लिए सीखना और उसे मैच में लागू करना आसान बनाती है। यही वजह है कि मोर्ने एक प्रभावशाली और भरोसेमंद कोच माने जाते हैं।
  • सवाल - भारतीय फैंस अभी भी ऑस्ट्रेलिया में आपके द्वारा लगाए गए छक्कों को नहीं भूले हैं और इंग्लैंड जाने से पहले, ओवल में आपने जो धमाकेदार पारी खेली थी, उसे भी नहीं भूले हैं। उस पारी के बारे में आप कुछ बता पाएं

  • जवाब - उस मैच के दौरान मुझे थोड़ी चोट लग गई थी, मेरी जांघ में हल्का दर्द था, जिससे मैं पूरी तरह गेंदबाज़ी नहीं कर पा रहा था। फिर भी, टीम में सिर्फ दो-तीन तेज गेंदबाज़ होने के कारण मुझे हर हाल में गेंदबाज़ी करनी पड़ी।

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