ऑस्ट्रेलिया के पूर्व तेज गेंदबाज ब्रेट ली ने भारत के दिग्गज खिलाड़ी विराट कोहली की जमकर तारीफ की है। ली के मुताबिक, कुछ खिलाड़ी शुरुआत में सबसे बेहतरीन नजर नहीं आते, लेकिन उनका मजबूत सोचने का तरीका उन्हें आगे चलकर सफल बनाता है। विराट कोहली भी ऐसे ही खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं। ली ने बताया कि कोहली के शुरुआती दौर में उनकी बल्लेबाजी से ज्यादा उनकी आंखों में दिखने वाला आत्मविश्वास और जोश उन्हें प्रभावित करता था। वहीं कोहली का आक्रामक और मुकाबला करने वाला अंदाज इंटरनेशनल क्रिकेट में शुरुआती दिनों से ही दिखाई देता था।
विराट के अंदर जीतने की जबरदस्त इच्छा
ब्रेट ली के मुताबिक, विराट कोहली के अंदर शुरू से ही जीतने की जबरदस्त इच्छा थी, जिसने उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग पहचान दिलाई। ब्रेट ली ने बीयर बाइसेप्स के पॉडकास्ट पर बात करते हुए कहा, “आप इसे उनकी आंखों में देख सकते हैं। कुछ खिलाड़ियों में यह खास बात होती है। हो सकता है कि शुरुआत में उनमें ज्यादा टैलेंट न दिखे, लेकिन उनका मानसिक रवैया मजबूत होता है। उनमें यह सोच होती है कि क्या वे बाकी खिलाड़ियों से ज्यादा फोकस कर सकते हैं।”
ली ने कहा, “आपने उनकी आंखें देखी हैं। वह सीधे आपकी तरफ देखते हैं और ऐसा लगता है जैसे कह रहे हों, ‘गेम शुरू हो गया है और तुम मुझे आउट नहीं कर पाओगे।’ जब मैंने उनके खिलाफ खेला था, तब मैंने यह चीज उनमें देखी थी।” पूर्व ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर ने आगे कहा, “आज आप देख सकते हैं कि उनका करियर कितना शानदार रहा है।” ब्रेट ली की बातों से विराट कोहली के करियर के पीछे की सोच और मेहनत की झलक मिलती है।
बड़े क्रिकेटरों में शामिल है
ली के मुताबिक, कोहली की सफलता को सिर्फ उनके रनों और रिकॉर्ड के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए। भारत जैसे क्रिकेट प्रेमी देश में बड़ा स्टार बनना अपने साथ काफी दबाव भी लेकर आता है। कोहली ने इस दबाव के बीच लगातार अच्छा प्रदर्शन किया और खुद को देश के सबसे बड़े क्रिकेट सितारों में शामिल किया। उन्होंने कहा, “दूसरी बात ये है कि आप अलग-अलग दौर के खिलाड़ियों की तुलना नहीं कर सकते। जरा सोचिए कि सनी भाई ने क्या किया था। सनी गावस्कर बहुत बड़े खिलाड़ी थे। इसके बाद सचिन तेंदुलकर आए, जिन्होंने उनकी जगह लेने और उस मुकाम तक पहुंचने की कोशिश की।”
ली ने आगे कहा, “उस समय सचिन के साथ करीब 1.5 अरब लोगों की उम्मीदें जुड़ी थीं। पूरा देश उन्हें सपोर्ट करता था और उन्हें इन उम्मीदों का दबाव अपने कंधों पर उठाना पड़ता था। इसके बाद विराट कोहली आए, जिन्होंने सचिन की जगह लेने की जिम्मेदारी संभाली।”