पंजाब किंग्स के खिलाड़ी शशांक सिंह ने अपने और परिवार के खिलाफ दर्ज पुलिस मामले पर पहली बार रिएक्शन दिया है। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर पूरी तरह झूठी है और एक मशहूर खिलाड़ी होने की वजह से उनकी छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है। शशांक के मुताबिक इस मामले का इस्तेमाल उन पर दबाव बनाने और कथित तौर पर उगाही करने के लिए किया गया। बता दें पिछले महीने भोपाल के रातीबाद थाने में शशांक सिंह और उनके पिता शैलेश सिंह के खिलाफ उनके घर में काम करने वाले कुक की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई थी।
कुक ने आरोप लगाया था कि दोनों ने उसके साथ मारपीट की, गाली-गलौज की और उसका मोबाइल फोन छीन लिया। वहीं शशांक ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर इन सभी आरोपों को पूरी तरह गलत बताया।
शशांक सिंह ने लिखा, “इस घटना ने मुझे पूरी तरह बदल दिया और मुझे ऐसे सबक सिखाए, जिन्हें मैं जिंदगी भर नहीं भूलूंगा। मैं यह बात किसी की सहानुभूति पाने के लिए नहीं लिख रहा, बल्कि इसलिए साझा कर रहा हूं क्योंकि मेरे परिवार और मैंने पहली बार ऐसी स्थिति का सामना किया है। मुझे उम्मीद है कि दूसरे लोग भी इससे कुछ सीखेंगे। एक खिलाड़ी होने के नाते मैंने वर्षों तक आलोचना, ट्रोलिंग और अपशब्दों का सामना किया है और उसके साथ जीना भी सीख लिया है। लेकिन इस बार मामला अलग था। देखते ही देखते मुझे ऐसे पेश किया गया, मानो मैंने अपने से कमजोर और कम साधन वाले व्यक्ति के साथ मारपीट की हो। बिना पूरी सच्चाई जाने हजारों लोगों ने मुझे सोशल मीडिया पर गलत बातें कहीं।”
उन्होंने आगे लिखा, “मैं आज भी इस बात को लेकर सवाल उठाता हूं कि शिकायत में जो बातें कही गईं, वे कैसे सामने आईं। जिस दिन वह हमारे घर से गया, उस समय उसे किसी तरह की चोट नहीं थी। बाद में जब हमने उसका वीडियो देखा तो हम हैरान रह गए। हमें समझ नहीं आया कि इतनी गंभीर चोटें आखिर आईं कैसे। वह अपनी इच्छा से हमारे घर काम करने आया था, लेकिन तीसरे ही दिन हमने उसे वापस भेज दिया। इसकी वजह ये थी कि हमने उसे घर में इधर-उधर घूमते, घर के अंदर की तस्वीरें खींचते और उन्हें अपने दोस्तों या साथियों को भेजते हुए देखा था। बाद में इस पूरे घटनाक्रम को देखकर हमें कई बातें समझ में आने लगीं।”
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि पूरी घटना एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा थी और इसका मकसद उन पर दबाव बनाकर पैसे ऐंठना था। उन्होंने आगे लिखा, “जैसे-जैसे इस मामले से जुड़ी और जानकारी सामने आती गई, मुझे पूरा भरोसा हो गया कि वह हमारे घर किसी अच्छे इरादे से नहीं आया था। मेरे अनुसार, पूरी योजना झूठी एफआईआर दर्ज कराकर मुझ पर दबाव बनाने की थी। शायद उन्हें लगा कि एक सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्ति होने के कारण मैं अपनी छवि बचाने के लिए पैसे देने को मजबूर हो जाऊंगा। मेरा मानना है कि इस मामले में एफआईआर का इस्तेमाल किसी वास्तविक शिकायत के लिए नहीं, बल्कि कथित तौर पर दबाव बनाकर उगाही करने के साधन के रूप में किया गया।”
उन्होंने एफआईआर दर्ज किए जाने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। 33 वर्षीय क्रिकेटर ने कहा कि, पुलिस ने उनके और उनके परिवार के खिलाफ मामला दर्ज करने से पहले उनका पक्ष जानने या उनसे पूछताछ करने की जरूरत नहीं समझी। उन्होंने लिखा, “मुझे सबसे ज्यादा तकलीफ इस बात की हुई कि जहां कई वास्तविक पीड़ितों को गंभीर मामलों में भी एफआईआर दर्ज कराने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है, वहीं मेरे और मेरे परिवार के खिलाफ बिना हमारी बात सुने और बिना किसी पूछताछ के तुरंत एफआईआर दर्ज कर दी गई।”
शशांक सिंह ने उन मीडिया रिपोर्टों को भी गलत बताया, जिनमें उन्हें 30 अप्रैल 2026 की एक दूसरी कथित घटना से जोड़ा गया था। उन्होंने कहा कि इन खबरों में बुनियादी तथ्यों की भी जांच नहीं की गई। शशांक के मुताबिक, जिस दिन की घटना का जिक्र किया जा रहा है, उस दिन वह आईपीएल मैच खेल रहे थे, इसलिए उन पर लगाए गए आरोप तथ्यों से मेल नहीं खाते।
शशांक सिंह ने कहा कि उन्हें इस बात की खुशी है कि घटना के समय वह अपने माता-पिता के साथ घर पर मौजूद थे। उन्होंने लिखा, “इस पूरे अनुभव ने मुझे कई कठिन सबक सिखाए हैं। किसी पर सिर्फ दया या हमदर्दी के आधार पर भरोसा नहीं करना चाहिए। घर में काम करने के लिए हमेशा किसी रजिस्टर्ड एजेंसी के जरिए ही कर्मचारी रखें और उसका पुलिस वेरिफिकेशन जरूर कराएं।"