Instagram पर वायरल हुआ 1980s वाला फोटो ट्रेंड, जानें ChatGPT से इसे कैसे बनाएं?

Instagram 80s Trend: Instagram ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को पुरानी यादें ताजा करने वाली मशीन में बदलने का एक और तरीका ढूंढ लिया है। जी हां, दरअसल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Instagram पर एक नया फोटो ट्रेंड तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

अपडेटेड Sep 09, 2026 पर 9:52 AM
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Instagram पर वायरल हुआ 1980s वाला फोटो ट्रेंड

Instagram 80s Trend: Instagram ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को पुरानी यादें ताजा करने वाली मशीन में बदलने का एक और तरीका ढूंढ लिया है। जी हां, दरअसल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Instagram पर एक नया फोटो ट्रेंड तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इसमें लोग अपनी तस्वीरों को ऐसा बना रहे हैं, जैसे उन्हें 1980 के दशक में खींचा गया हो।

इसके लिए सिर्फ फोटो पर पुराना या विंटेज फिल्टर लगाने के बजाय, लोग अपनी तस्वीरें ChatGPT पर अपलोड कर रहे हैं और उससे पूरी तस्वीर को 1980 के दशक के हिसाब से बदलने के लिए कह रहे हैं। इसमें हेयरस्टाइल, कपड़े, एक्सेसरीज, बैकग्राउंड और फोटो की पुरानी दिखने वाली क्वालिटी तक बदली जा रही है।

इस ट्रेंड को Instagram पर तेजी से फैलाने में एक और चीज मदद कर रही है। लोग Stories में इस फोटो को बनाने वाला प्रॉम्प्ट शेयर कर रहे हैं और Instagram के “Add Yours” स्टिकर का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे उनके दोस्त और फॉलोअर्स भी अपनी 1980 के दशक वाली तस्वीरें बना सकते हैं।


इसका मकसद सिर्फ किसी फोटो को पुराना दिखाना नहीं है, बल्कि एक आसान सवाल का जवाब तलाशना है—अगर यह तस्वीर चार दशक पहले खींची गई होती, तो मैं कैसा दिखता?

इस ट्रेंड की खासियत सिर्फ फोटो का रंग बदलना नहीं, बल्कि पूरी तरह से 1980 के दशक का लुक तैयार करना है। ऑनलाइन सामने आ रही इन तस्वीरों में कई तरह के अलग-अलग स्टाइल और लुक देखने को मिल रहे हैं।

कुछ तस्वीरें ग्लैमरस बॉलीवुड पोर्ट्रेट जैसी लगती हैं। वहीं कुछ तस्वीरें फॉर्मल स्टूडियो फोटोग्राफ, दानेदार फिल्म स्टिल्स, पुराने जमाने की मैगजीन के कवर या परिवार के पुराने एल्बम की तस्वीरों जैसी दिखती हैं।

इस रेट्रो इफेक्ट को बनाने के लिए वॉर्म लाइटिंग, गहरे रंग, सॉफ्ट-फोकस फोटोग्राफी और फेड टेक्सचर जैसी चीजों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

भारतीय स्टाइल वाले पोर्ट्रेट में अक्सर उस दौर की जानी-पहचानी चीजों का इस्तेमाल किया जा रहा है। जिसमें महिलाओं को रंग-बिरंगी साड़ियों, कर्ल किए हुए या घने बालों और खास तरह की ज्वेलरी के साथ दिखाया जा रहा है, जबकि पुरुषों के पोर्ट्रेट में ढीली या फिटिंग वाली शर्ट, हाई-वेस्ट पैंट, मूंछें और अच्छी तरह से स्टाइल किए गए बाल शामिल हो सकते हैं।

इस ट्रेंड में यह फर्क काफी महत्वपूर्ण है। अच्छी तस्वीर वही मानी जा रही है, जो ऐसी लगे जैसे वह वास्तव में 1980 के दशक में खींची गई हो, न कि आज की सेल्फी पर सिर्फ पुराना इफेक्ट लगा दिया गया हो।

इसे बनाने के तरीकों में एनालॉग-स्टाइल फिल्म ग्रेन, हल्के फेड रंग, सॉफ्ट फोकस, त्वचा का नैचुरल टेक्सचर और उस दौर का असली जैसा माहौल बनाने पर जोर दिया जाता है, साथ ही इसमें स्मार्टफोन, आज के कपड़े, मॉडर्न कारें और आज की दूसरी साफ तौर पर दिखने वाली चीजों को जानबूझकर शामिल नहीं किया जाता है।

चेहरे की पहचान बनाए रखना अब प्रॉम्प्ट का एक हिस्सा बन गया है

इस बदलाव का मतलब जरूरी नहीं कि इंसान का चेहरा पूरी तरह बदल दिया जाए।

इस ट्रेंड के उदाहरणों में बार-बार यह निर्देश दिया जाता है कि व्यक्ति के आस-पास के विजुअल माहौल को बदलते समय भी उसके चेहरे की पहचान, स्किन टोन और कुल मिलाकर उसकी पहचान को बनाए रखा जाए। इसलिए, यूजर्स अलग-अलग तरह के कपड़े, हेयरस्टाइल और बैकग्राउंड के साथ एक्सपेरिमेंट करते हुए भी अपने चेहरे और हाव-भाव को ओरिजिनल फोटो के काफी हद तक वैसा ही रख सकते हैं।

यह रिक्वेस्ट इसलिए भी खास है क्योंकि AI से बनी तस्वीर, अपलोड की गई फोटो वाले व्यक्ति से अलग दिख सकती है।

कुछ प्रॉम्प्ट्स में सिस्टम से यह भी कहा जाता है कि वह चेहरे की बनावट या आकार में बेवजह बदलाव न करे और व्यक्ति की पहचान बनी रहे।

इसी असर की वजह से कई तस्वीरें लोगों का ध्यान खींचती हैं। व्यक्ति तो वही रहता है, लेकिन उनके आस-पास की फोटो किसी और जमाने की लगती है।

यूजर्स 1980 के दशक के लुक को लेकर ज्यादा खास जानकारी दे रहे हैं

यह ट्रेंड यह भी दिखाता है कि प्रॉम्प्ट के आधार पर फाइनल इमेज कितनी बदल सकती है।

सिर्फ ChatGPT से यह कहने के बजाय कि "इसे 1980 के दशक जैसा बनाओ," यूजर्स यह बता सकते हैं कि उन्हें क्या चाहिए - जैसे इंडियन स्टूडियो पोर्ट्रेट, बॉलीवुड स्टाइलिंग, फैमिली-एल्बम फोटोग्राफ, पुरानी शादी की तस्वीर, डिस्को सेटिंग, मैगजीन-कवर शूट या फिल्म पर खींची गई तस्वीर जैसा लुक।

इसके अलावा, लोग मूंछ, अलग हेयरस्टाइल, पुराने जमाने की एक्सेसरीज और बैकग्राउंड जैसी चीजों को भी अपनी पसंद के हिसाब से बदल रहे हैं। तस्वीर में डिस्को, आर्केड, 1980 के दशक का जिम, बीच या बर्थडे पार्टी जैसी जगहें भी जोड़ी जा सकती हैं।

इस तरह एक ही फोटो ट्रेंड से 1980 के दशक की दर्जनों अलग-अलग तरह की तस्वीरें बनाई जा रही हैं।

एक तस्वीर को एक बार में ग्लैमरस फिल्म पोर्ट्रेट जैसा और अगली बार में आम फैमिली स्नैपशॉट जैसा स्टाइल किया जा सकता है। मूल आइडिया वही रहता है, लेकिन जो नॉस्टैल्जिया पैदा होता है, वह सिनेमैटिक, फैशनेबल या जानबूझकर आम जिंदगी जैसा हो सकता है।

लोग ChatGPT से 1980 के दशक वाली तस्वीरें कैसे बना रहे हैं

इसका तरीका काफी आसान है। लोग एक साफ फोटो चुनते हैं, उसे ChatGPT पर अपलोड करते हैं और बताते हैं कि वे फोटो में किस तरह का 1980 के दशक वाला लुक चाहते हैं।

ऐसी फोटो बेहतर रहती है जिसमें चेहरा सामने या थोड़ा साइड से साफ दिखाई दे। इसके लिए प्रोफेशनल फोटो होना जरूरी नहीं है। साधारण सेल्फी से भी ऐसी तस्वीर बनाई जा सकती है।

इसके बाद प्रॉम्प्ट में कपड़े, हेयरस्टाइल, एक्सेसरीज, जगह, रोशनी और फोटो के टेक्सचर जैसी चीजों के बारे में जानकारी दी जा सकती है।

अगर पहली बार में तस्वीर सही नहीं बनती, तो यूजर्स को दोबारा शुरुआत करने की जरूरत नहीं होती। वे उसी तस्वीर में बदलाव करते हुए उसे बेहतर बना सकते हैं। किसी एक चीज को बदला जा सकता है। उदाहरण के लिए, अगर फोटो बहुत ज्यादा आधुनिक या परफेक्ट लग रही है, तो उसे कम आधुनिक और 1980 के दशक की असली फोटो जैसा बनाया जा सकता है।

यही बार-बार बदलाव करने की सुविधा इन तस्वीरों को साधारण फोटो फिल्टर से अलग बनाती है। तस्वीर में एक-एक चीज को बदलकर उसे अपनी पसंद के मुताबिक तैयार किया जा सकता है।

छोटी-छोटी गलतियां AI की पहचान बता सकती हैं

रेट्रो स्टाइल वाली तस्वीर पहली नजर में भले ही बिल्कुल असली लगे, लेकिन पोस्ट करने से पहले उसे ध्यान से जांचना जरूरी है।

AI से बनाई गई तस्वीरों में चेहरे की छोटी-बड़ी चीजें, ज्वेलरी, उंगलियां, कपड़ों के डिजाइन या बैकग्राउंड में लिखे शब्द बदल सकते हैं या गलत दिखाई दे सकते हैं।

इसलिए यूजर्स को सलाह दी जाती है कि अंतिम तस्वीर को ध्यान से देखें और AI से बनाई गई फोटो को असली पुरानी या ऐतिहासिक तस्वीर बताकर शेयर न करें।

इसमें प्राइवेसी का भी ध्यान रखना जरूरी है। ऐसी तस्वीरें अपलोड करने से बचना चाहिए जिनमें जरूरी दस्तावेज, निजी जगह या संवेदनशील जानकारी दिखाई दे रही हो। इसके अलावा, किसी दूसरे व्यक्ति की तस्वीर को उनकी अनुमति के बिना बदलने से भी बचना चाहिए।

AI से बनाई गई तस्वीरों को 1980 के दशक की सटीक ऐतिहासिक तस्वीर नहीं माना जाना चाहिए। ये सिर्फ रचनात्मक तरीके से तैयार की गई तस्वीरें हैं। AI कपड़ों, हेयरस्टाइल, जगहों और चेहरे की बारीकियों में गलतियां कर सकता है। इसलिए तस्वीर 1980 के दशक का अंदाज तो दिखा सकती है, लेकिन उस दौर की बिल्कुल सही तस्वीर नहीं हो सकती।

आज की सेल्फी से ऐसी तस्वीर तक, जो कभी ली ही नहीं गई

इस ट्रेंड के पीछे लोगों की दिलचस्पी को समझना आसान है।

आज की कोई भी फोटो हमें दिखाती है कि हम इस समय कैसे दिखते हैं। लेकिन 1980 के दशक का यह ट्रेंड इससे कुछ अलग है। इसमें लोग अपने अतीत की एक ऐसी तस्वीर बनवा सकते हैं, जो असल में कभी थी ही नहीं।

यह तस्वीर किसी ऐसे स्टूडियो पोर्ट्रेट जैसी हो सकती है, जो कभी खिंचा ही नहीं गया। यह किसी ऐसे फैमिली एल्बम की तस्वीर भी लग सकती है, जो कभी बना ही नहीं था। या फिर यह 1980 के दशक का फिल्मी अंदाज हो सकता है, जिसे व्यक्ति ने सिर्फ फिल्मों, फैशन और पुरानी पारिवारिक तस्वीरों के जरिए जाना है।

फिलहाल, Instagram का यह नया AI नॉस्टेल्जिया ट्रेंड लोगों के लिए ऐसे काल्पनिक अतीत को बनाना बेहद आसान कर रहा है।

सिर्फ एक फोटो, सही तरीके से लिखा गया प्रॉम्प्ट और कुछ बार बदलाव करके कोई भी व्यक्ति अपने चेहरे को बिल्कुल अलग दौर की तस्वीर में दिखा सकता है।

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