मस्क के Starlink का भारत में रास्ता साफ: सरकार से मिली अंतिम मंजूरी, पहले किन ग्राहकों को मिलेगी सर्विस?

Starlink India launch: भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा के लिए एलॉन मस्क की Starlink को अंतिम मंजूरी मिल गई है। जानिए स्टारलिंक अपनी सर्विस कब लॉन्च करेगी और सबसे पहले किन ग्राहकों को इसका इस्तेमाल करने का मौका मिलेगा।

अपडेटेड Jul 09, 2025 पर 6:48 PM
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मंजूरी मिलने के बाद स्टारलिंक को अब सरकार से स्पेक्ट्रम हासिल करना होगा।

Starlink India launch: अमेरिकी अरबपति एलॉन मस्क (Elon Musk) की कंपनी स्टारलिंक (Starlink) अब भारत में अपनी सेवा पेश करने के लिए पूरी तरह तैयार है। स्टारलिंक को भारत की स्पेस रेगुलेटर IN-SPACe (Indian National Space Promotion and Authorisation Centre) से मंजूरी मिल गई है। यह मंजूरी स्टारलिंक के लिए भारत में कमर्शियल सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवाएं शुरू करने की दिशा में आखिरी रेगुलेटरी अड़चन थी। Moneycontrol को सूत्रों ने यह जानकारी दी है।

मस्क की स्टारलिंक अब Eutelsat-OneWeb और रिलायंस जियो के बाद भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं के लिए पूरी मंजूरी हासिल करने वाली तीसरी कंपनी बन गई है।

अब आगे क्या होगा Starlink का प्लान?


मंजूरी मिलने के बाद स्टारलिंक को अब सरकार से स्पेक्ट्रम हासिल करना होगा। उसे देशभर में ग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना होगा और राष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के हिसाब से टेस्टिंग करनी होगी। कंपनी की योजना भारत में कम से कम तीन गेटवे स्टेशन स्थापित करने की है।

डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस (DoT) जल्द ही Starlink को सुरक्षा परीक्षण के लिए ट्रायल स्पेक्ट्रम भी आवंटित करने जा रहा है। इसके अलावा, TRAI की हालिया सिफारिशों के आधार पर सैटेलाइट स्पेक्ट्रम के प्रशासनिक आवंटन के नियम और कीमतें तय करने की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में है।

Starlink की सेवाओं की कीमत कितनी होगी?

Moneycontrol की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के अनुसार, Starlink ने भारत में पहले ही कुछ VSAT प्रोवाइडर्स के साथ कमर्शियल समझौते साइन कर लिए हैं। इससे संकेत मिलता है कि कंपनी स्पेक्ट्रम आवंटन से पहले ही एंटरप्राइज और सरकारी सेक्टर में ब्रॉडबैंड सेवाएं शुरू करने की तैयारी में है।

Starlink की रणनीति भारत में पहले एंटरप्राइज और सरकारी ग्राहकों (B2B और B2G) वाले सेगमेंट में मौजूदगी बनाना है। इसके बाद कंज्यूमर-फेसिंग सर्विसेज शुरू की जाएंगी। सूत्रों के मुताबिक, कंपनी जल्द ही अपनी वेबसाइट के जरिए डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर सैटेलाइट कनेक्शन देना शुरू कर सकती है। हालांकि, इसके रिटेल प्राइसिंग मॉडल को अभी अंतिम रूप दिया जा रहा है।

Amazon का Kuiper प्रोजेक्ट अभी लाइन में

Starlink की सबसे बड़ी प्रतिस्पर्धी कंपनी एमेजॉन (Amazon) के Project Kuiper को अभी DoT और IN-SPACe दोनों से मंजूरी मिलनी बाकी है। हालांकि, कंपनी सभी सुरक्षा और परिचालन जांच पूरी कर चुकी है। इसकी एप्लिकेशन इंटर-मिनिस्ट्रीयल स्टैंडिंग कमेटी की अगली बैठक में विचार के लिए रखी जाएगी।

Kuiper भारत में बड़े पैमाने पर सैटकॉम सेवा शुरू करने की योजना बना रही है। इसमें 10 गेटवे स्टेशन और मुंबई और चेन्नई में दो पॉइंट्स ऑफ प्रेजेंस शामिल हैं। यह संख्या Starlink के तीन गेटवे की तुलना में काफी अधिक है। वहीं, Eutelsat-OneWeb और Jio-SES के पास फिलहाल दो-दो गेटवे हैं।

Kuiper अब तक 27 लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट लॉन्च कर चुका है। लेकिन, भारत के लिए कवरेज अभी सुनिश्चित नहीं हो पाया है। Kuiper और Starlink दोनों ही एंटरप्राइज, सरकारी और कंज्यूमर सेगमेंट में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। इससे भारत का उभरता हुआ सैटकॉम मार्केट एक बड़ी प्रतिस्पर्धा की ओर बढ़ रहा है।

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