ISRO आज लॉन्च करेगा PSLV-C62, DRDO का 'Anvesha' सैटेलाइट भी मिशन में शामिल
ISRO: श्रीहरिकोटा स्थित ऐतिहासिक सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में इस समय काफी हलचल है, क्योंकि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) साल 2026 के अपने पहले बड़े अंतरिक्ष मिशन की तैयारी कर रहा है। आज लॉन्च होने वाला PSLV-C62 मिशन एक बेहद खास और अहम मिशन माना जा रहा है।
ISRO आज लॉन्च करेगा PSLV-C62, DRDO का अन्वेषा सैटेलाइट भी मिशन में शामिल
ISRO: श्रीहरिकोटा स्थित ऐतिहासिक सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में इस समय काफी हलचल है, क्योंकि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) साल 2026 के अपने पहले बड़े अंतरिक्ष मिशन की तैयारी कर रहा है। आज लॉन्च होने वाला PSLV-C62 मिशन कोई सामान्य लॉन्च नहीं है, बल्कि एक बेहद खास और अहम मिशन माना जा रहा है।
16 उपग्रहों को सूर्य- समकालिक ध्रुवीय कक्षा (Sun-Synchronous Polar Orbit) में ले जाने वाला, ISRO का यह भरोसेमंद रॉकेट PSLV एक बार फिर भारत के बढ़ते प्रभुत्व को प्रदर्शित करने के लिए तैयार है।
यह लॉन्च सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के पहले लॉन्च पैड से भारतीय समयानुसार सुबह 10:17 बजे होने वाला है।
मुख्य पेलोड (Primary Passenger)
इस मिशन के केंद्र में EOA-N1 है, जो रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित एक एडवांड धरती का निरीक्षण करने वाला उपग्रह है। ‘अन्वेषा’ नाम का यह उपग्रह अत्याधुनिक हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग तकनीक से लैस है।
यह उपग्रह बहुत ही साफ और बारीक तस्वीरें खींचता है जिनमें न सिर्फ प्राथमिक रंग दिखते हैं, बल्कि हर पिक्सेल में सैकड़ों पतले, निरंतर प्रकाश बैंड भी दिखाई देते हैं, जिससे हर पदार्थ की एक अनूठी स्पेक्ट्रल पहचान बनती है। इससे वैज्ञानिकों को फसलों की सेहत और मिट्टी की नमी की निगरानी से लेकर खनिज भंडारों का पता लगाने और शहरी फैलाव पर नजर रखने तक, हाई-रिजॉल्यूशन डेटा के जरिए रासायनिक संकेतों को "देखने" की सुविधा मिलती है।
कक्षा में ईंधन भरना (ON-ORBIT REFUELLING)
इस मिशन का एक और खास हिस्सा है AayulSAT, जिसे बेंगलुरु की स्टार्टअप OrbitAID Aerospace ने बनाया है। यह उपग्रह भारत का पहला ऑन-ऑर्बिट रिफ्यूलिंग मॉडल दिखाने के लिए टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेटर की तरह काम करता है।
परंपरागत रूप से, उपग्रह का जीवनकाल उसके ईंधन द्वारा सीमित होता है; एक बार ईंधन समाप्त हो जाने पर, वह अंतरिक्ष मलबे (स्पेस डेब्री) में तब्दील हो जाता है। AayulSAT का लक्ष्य सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण में एक विशेष डॉकिंग इंटरफेस और ईंधन-ट्रांसफर सिस्टम का परीक्षण करके इस स्थिति को बदलना है, जिससे वैश्विक उपग्रह समूहों के जीवनकाल को बढ़ाने के लिए "ऑर्बिटल पेट्रोल पंप" की नींव रखी जा सके।
भारत की पहली AI-इमेज लैब के जरिए अंतरिक्ष साइबरकैफे
इस मिशन में एक और खास उपग्रह MOI-1 भी शामिल है, जिसे हैदराबाद की स्टार्टअप कंपनियों TakeMe2Space और Eon Space Labs ने मिलकर बनाया है। यह मिशन भारत की पहली ऑर्बिटल AI-इमेज लैब को अंतरिक्ष में ले जाने वाला है, जो अंतरिक्ष में उन्नत इमेजिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रयोगों के लिए काम आएगी।
MOI-1 उपग्रह एज कंप्यूटिंग का उपयोग करके सीधे उपग्रह पर डेटा संसाधित करता है, जिससे विश्लेषण बहुत तेज और बिना देरी के किया जा सकता है। अंतरिक्ष में विश्व का पहला साइबर कैफे स्थापित करके, यह मिशन उपयोगकर्ताओं को प्रोसेसर पर 2 डॉलर (180 रुपये) प्रति मिनट की दर से समय किराए पर लेने की सुविधा देता है, जिससे उपग्रह और अंतरिक्ष डेटा तक पहुंच सभी के लिए सुलभ हो जाती है।
MOI-1 उपग्रह के भीतर एक और अभूतपूर्व आविष्कार है: MIRA, जो विश्व का सबसे हल्का अंतरिक्ष दूरबीन (space telescope) है।
Eon Space Labs द्वारा विकसित, यह 502 ग्राम का ऑप्टिकल सिस्टम फ्यूज्ड सिलिका ग्लास के एक ठोस ब्लॉक से तराशा गया है। इस दूरबीन को सीधे MOI-1 AI लैब में जोड़ा गया है, जिससे अंतरिक्ष में एक ऐसा यंत्र तैयार हुआ है जो आंख और दिमाग का काम एक साथ करता है।
MIRA की एक ही टुकड़े में बनी संरचना इसे लगभग अटूट (अविनाशी) बनाती है, जिससे यह लॉन्च के समय होने वाली जबरदस्त कंपन के बावजूद पूरी तरह फोकस में बनी रहती है।
एक वैश्विक राइडशेयर: नेपाल से ब्राजील तक
इसरो की व्यावसायिक शाखा, न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड ने इस उड़ान को एक अंतरराष्ट्रीय "सैटेलाइट टैक्सी" में बदल दिया है।
इस लिस्ट में नेपाल के मुनल का नाम भी शामिल है, जिसे भारत के विदेश मंत्रालय का समर्थन प्राप्त है और जो देश की भौगोलिक बनावट (टोपोग्राफी) का मानचित्रण करेगा।
स्पेन से, 25 किलोग्राम का केस्ट्रेल इनिशियल डेमोंस्ट्रेटर (KID) कैप्सूल वायुमंडलीय पुनः प्रवेश (atmospheric re-entry) तकनीक का परीक्षण करेगा, जो दो घंटे बाद जानबूझकर दक्षिण प्रशांत महासागर में गिरेगा।
इस मिशन में भारत-मॉरीशस संयुक्त उपग्रह और ब्राजील का एक समूह भी शामिल है, जिसमें समुद्री बचाव के लिए Aldebaran-1 और "Orbital Temple" शामिल है, जो अंतरिक्ष में 14,000 नामों को स्थायी रूप से संग्रहीत करेगा।
देश के भीतर, Dhruva Space कई उपग्रह लॉन्च कर रहा है, जिनमें LACHIT और Thybolt-3 शामिल हैं, ताकि भारत की अपनी संचार प्रणाली (communication subsystems) का परीक्षण किया जा सके।
आज जब PSLV इंजनों की गर्जना बंगाल की खाड़ी में गूंज रही है, तो भारत अंतरिक्ष के लिए एक विश्वसनीय प्रवेश द्वार के रूप में अपनी स्थिति को और मजबूत कर रहा है। अंतरिक्ष प्रतीक्षा कर रहा है, और ISRO सेवा देने के लिए तैयार है।