असम की डिमा हसाओ पहाड़ियों में बसा जटिंगा गांव अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के साथ-साथ एक रहस्यमयी घटना के लिए भी दुनियाभर में जाना जाता है। हर साल मानसून के अंत में यहां पक्षियों से जुड़ी एक ऐसी घटना देखने को मिलती है, जिसने सालों से साइंटिस्ट, बर्ड स्पेशलिस्ट और टूरिस्ट का ध्यान अपनी ओर खींच रखा है। आइए जानते हैं आखिर क्या है जटिंगा का रहस्य और यहां कैसे पहुंचा जा सकता है:
शांत पहाड़ी गांव, लेकिन एक रहस्यमयी पहचान
सालभर जटिंगा हरे-भरे जंगलों, पहाड़ियों और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है। यहां का प्राकृतिक सौंदर्य टूरिस्ट को अट्रैक्ट करता है, लेकिन सितंबर और अक्टूबर के महीनों में यह गांव एक अनोखी घटना की वजह से चर्चा में आ जाता है।
हर साल देखने को मिलती है अनोखी घटना
मानसून के अंत में शाम के समय कुछ पक्षी अचानक नीचे आने लगते हैं और पेड़ों, घरों या जमीन से टकरा जाते हैं। यह घटना कुछ घंटों तक ही देखने को मिलती है और खास बात यह है कि यह केवल गांव के एक छोटे से इलाके तक सीमित रहती है।
किन पक्षियों पर पड़ता है असर?
इस घटना में शामिल पक्षियों की कई प्रजातियां दर्ज की गई हैं। इनमें किंगफिशर, ड्रोंगो, बगुले, बिटर्न, बी-ईटर और पिट्टा जैसे पक्षी शामिल हैं। एक्सपर्ट के अनुसार इनमें ज्यादातर यंग और दिन में एक्टिव रहने वाले पक्षी होते हैं।
लोककथाओं में छिपी रहस्य की कहानी
पहले यहां के लोग इस घटना को अलौकिक शक्तियों से जोड़कर देखते थे। गांव में कई पीढ़ियों से ऐसी कहानियां सुनाई जाती रही हैं कि आसमान से आने वाली रहस्यमयी शक्तियां पक्षियों को अपनी ओर खींच लेती हैं। हालांकि समय के साथ इन मान्यताओं की जगह साइंटिफिक रिसर्च ने ले ली।
वैज्ञानिक क्या मानते हैं?
पक्षी विशेषज्ञों का मानना है कि घना कोहरा, कम ऊंचाई वाले बादल, तेज हवाएं और अर्टिफिशियल लाइट मिलकर पक्षियों के दिशा-ज्ञान को एफेक्ट कर सकती हैं। कुछ शोध चुंबकीय बदलाव की संभावना भी बताते हैं, लेकिन अब तक कोई एक कारण पूरी तरह साबित नहीं हो पाया है।
क्या पक्षी सच में सुसाइड करते हैं?
साइंटिस्ट का कहना है कि इसे पक्षियों की ग्रुप सुसाइड कहना सही नहीं होगा। अवेलेबल रिसर्च के अनुसार पक्षी किसी कारण से डिस्ट्रैक्ट होकर अपनी दिशा खो बैठते हैं, जिसके चलते यह घटना होती है। इसकी असली कारण पर अब भी स्टडी जारी है।
जटिंगा, असम के डिमा हसाओ जिले में है और हाफलोंग से करीब 9 किलोमीटर दूर है। यहां पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी एयरपोर्ट गुवाहाटी का लोकप्रिया गोपीनाथ बोरदोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है। रेल से आने वाले ट्रैवलर हाफलोंग हिल स्टेशन तक पहुंच सकते हैं, जबकि हाफलोंग से टैक्सी आसानी से मिल जाती हैं। विजिट के दौरान फारेस्ट डिपार्टमेंट के रेगुलेशन और लोकल रेजिडेंट के इंस्ट्रक्शन को फॉलो करना जरूरी है।