इन 14 झरनों को देखने का मौका कभी भी मिस न करें, दूध जैसा समंदर देखने का नज़ारा, इंतज़ार कर रहा है आपका !
मानसून 2026 में भारत के झरने अपनी पूरी ताकत और खूबसूरती के साथ जीवंत हो उठते हैं। ऊंची चट्टानों से गिरता तेज पानी, चारों तरफ फैली हरियाली और बादलों से ढकी घाटियां मिलकर एक अद्भुत दृश्य बनाती हैं। हर झरने की अपनी अलग पहचान और प्राकृतिक आकर्षण होता है, जो यात्रियों को मंत्रमुग्ध कर देता है। इन जगहों पर पहुंचना रोमांचक होता है और फोटोग्राफी के लिए यह समय सबसे बेहतरीन माना जाता है। हालांकि मानसून में फिसलन और तेज बहाव के कारण सावधानी रखना बेहद जरूरी है, तभी जर्नी पूरी तरह सेफ और यादगार बनती है।
MoneyControl News
अपडेटेड Jul 02, 2026 पर 10:23 AM
मानसून का मौसम भारत की प्राकृतिक खूबसूरती को एक नया रूप देता है। जून से सितंबर के बीच होने वाली बारिश सूखी पहाड़ियों, घने जंगलों और शांत घाटियों को हरे-भरे स्वर्ग में बदल देती है। इसी दौरान देश के झरने भी अपने पूरे वेग और भव्यता के साथ बहने लगते हैं। तेज़ बहते पानी की गूंज, चारों ओर फैली हरियाली, ठंडी हवाएं और बादलों से ढकी पहाड़ियां ऐसा नज़ारा पेश करती हैं, जिसे देखकर हर प्रकृति प्रेमी मंत्रमुग्ध हो जाता है। यदि आप मानसून 2026 में किसी यादगार ट्रिप की प्लानिंग बना रहे हैं, तो भारत के ये 14 शानदार झरने आपकी ट्रैवल लिस्ट में जरूर होने चाहिए:
मेघालय के प्रमुख झरने
1. नोहकलिकाई फॉल्स -चेरापूंजी
नोहकलिकाई फॉल्स मेघालय के चेरापूंजी (सोहरा) में स्थित भारत का सबसे ऊंचा सिंगल-ड्रॉप झरना है, जो लगभग 340 मीटर (1,115 फीट) की ऊंचाई से गिरता है। मानसून के दौरान यह झरना अपने पूरे वेग में होता है और नीचे बना नीले-हरे रंग का प्राकृतिक पूल इसे और भी आकर्षक बनाता है। चारों तरफ बादलों से ढकी पहाड़ियां, घना कोहरा और हरियाली इसे एक जादुई दृश्य जैसा बना देती हैं। इस झरने के साथ एक दुखद लोककथा भी जुड़ी है, जिसमें ‘का लिकाई’ नाम की महिला की कहानी बताई जाती है, जिसके कारण इसका नाम “नोह-का-लिकाई” पड़ा। यहां घूमने का सबसे अच्छा समय जुलाई से सितंबर के बीच होता है, जबकि साफ दृश्य के लिए सितंबर अंत से नवंबर बेहतर है। गुवाहाटी और शिलांग से सड़क मार्ग द्वारा आसानी से चेरापूंजी पहुंचा जा सकता है। यहां व्यू पॉइंट से झरने का पूरा दृश्य देखा जा सकता है और पास में मावस्माई गुफाएं व सेवन सिस्टर्स फॉल्स भी घूमे जा सकते हैं। मानसून में यहां फिसलन काफी होती है, इसलिए अच्छे ग्रिप वाले जूते और सावधानी बेहद जरूरी है।
2. सेवन सिस्टर्स फॉल्स -मेघालय
सेवन सिस्टर्स फॉल्स जिसे नोहसंगिथियांग फॉल्स भी कहा जाता है, चेरापूंजी में स्थित एक बेहद सुंदर बहु-धारा वाला झरना है। यह लगभग 315 मीटर (1,033 फीट) ऊंचा है और इसकी सात अलग-अलग धाराएं चट्टानों से एक साथ गिरती हैं, जो उत्तर-पूर्व भारत के सात राज्यों का प्रतीक मानी जाती हैं। मानसून में जब बादल पहाड़ियों को ढक लेते हैं, तब यह झरना अपने पूरे स्वरूप में दिखाई देता है और दृश्य बेहद रोमांचक हो जाता है। यह झरना चेरापूंजी के पास सड़क से ही आसानी से देखा जा सकता है, इसलिए यहां पहुंचना बहुत आसान है। जुलाई से सितंबर का समय यहां घूमने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। आसपास नोहकलिकाई फॉल्स, इको पार्क और मावस्माई गुफाएं जैसे पर्यटन स्थल भी हैं। यहां तेज हवाएं और घना कोहरा रहता है, इसलिए वाहन सावधानी से चलाना और व्यू पॉइंट से बाहर न जाना जरूरी है।
3. क्रांग सूरी फॉल्स -वेस्ट जयंतिया हिल्स में स्थित
क्रांग सूरी फॉल्स मेघालय के वेस्ट जयंतिया हिल्स में स्थित एक बेहद खूबसूरत झरना है, जो अपने नीले-फ़िरोज़ी पानी के लिए प्रसिद्ध है। यह झरना घने जंगलों और चट्टानों के बीच स्थित है, जहां तक पहुंचने के लिए सीढ़ियों और ट्रेकिंग रास्ते से नीचे उतरना पड़ता है। नीचे पहुंचते ही साफ नीला पानी और शांत वातावरण इसे किसी विदेशी लोकेशन जैसा बना देता है। मानसून में इसका जलप्रवाह तेज होता है, जबकि मानसून के बाद पानी का रंग सबसे अधिक स्पष्ट दिखाई देता है। जुलाई से सितंबर यहां का सबसे अच्छा समय है, लेकिन अक्टूबर-नवंबर में दृश्य और भी साफ हो जाता है। यह शिलांग से लगभग 90 किलोमीटर और चेरापूंजी से काफी दूरी पर स्थित है, इसलिए यहां टैक्सी या निजी वाहन से जाना बेहतर होता है। यहां पर्यटक प्राकृतिक पूल के पास समय बिता सकते हैं, फोटोग्राफी कर सकते हैं, लेकिन तेज बहाव के दौरान पानी में उतरना सेफ नहीं होता।
4. वेई सवडोंग फॉल्स -मेघालय
वेई सवडोंग फॉल्स मेघालय के सबसे सुंदर और एडवेंचर से भरे झरनों में से एक है। यह तीन-स्तरीय झरना है, जहां पानी अलग-अलग लेयर में गिरते हुए बेहद शानदार दृश्य बनाता है। इसका फ़िरोज़ी रंग और घने जंगलों के बीच छिपा हुआ स्थान इसे और भी खास बनाता है। यहां पहुंचने के लिए लगभग 20–30 मिनट की खड़ी ट्रेकिंग करनी पड़ती है, जिसमें सीढ़ियां और जंगल का रास्ता शामिल है, इसलिए यह स्थान एडवेंचर पसंद करने वालों के लिए आदर्श है। मानसून में यहां का दृश्य बेहद आकर्षक होता है, लेकिन बारिश के दौरान रास्ता काफी फिसलन भरा हो जाता है। जुलाई से सितंबर घूमने का अच्छा समय है, जबकि अक्टूबर-नवंबर में पानी का रंग और साफ दिखाई देता है। चेरापूंजी से टैक्सी द्वारा ट्रेकिंग पॉइंट तक पहुंचा जा सकता है। यहां फोटोग्राफी के लिए सुबह का समय सबसे अच्छा माना जाता है, जब रोशनी पानी के नीले रंग को और उभार देती है।
गोवा और कर्नाटक के प्रमुख झरने
5. दूधसागर फॉल्स -गोवा
दूधसागर फॉल्स पश्चिमी घाट में स्थित भारत के सबसे पॉपुलर और खूबसूरत झरनों में से एक है। लगभग 310 मीटर (1,017 फीट) ऊंचा यह चार-स्तरीय झरना मानसून के दौरान अपने पूरे वेग में होता है और दूर से देखने पर ऐसा लगता है जैसे पहाड़ से दूध की नदी बह रही हो, इसी कारण इसका नाम “दूधसागर” पड़ा। यह झरना भगवान महावीर वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी के अंदर स्थित है, जिससे इसका प्राकृतिक वातावरण और भी अधिक समृद्ध हो जाता है। मानसून में यहां का दृश्य बेहद शानदार होता है, लेकिन भारी बारिश के कारण कई बार ट्रेकिंग मार्ग बंद भी कर दिए जाते हैं। यहां पहुंचने के लिए गोवा के डाबोलिम या मनोहर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से कुलेम तक पहुंचा जाता है, और फिर जीप सफारी या ट्रेन रूट से झरने का नजारा देखा जाता है। आसपास घना जंगल, रेलवे ब्रिज और पहाड़ों की हरियाली इसे एक एडवेंचर डेस्टिनेशन बनाते हैं।
6. जोग फॉल्स -शरावती नदी पर स्थित
जोग फॉल्स कर्नाटक के शरावती नदी पर स्थित भारत के सबसे ऊंचे झरनों में से एक है, जिसकी ऊंचाई लगभग 253 मीटर (830 फीट) है। यह एक “प्लंज वॉटरफॉल” है, जिसमें पानी चार अलग-अलग धाराओं—राजा, रानी, रोअरर और रॉकेट—के रूप में नीचे गिरता है। मानसून के दौरान यहां का नजारा बहुत ही शक्तिशाली और भव्य हो जाता है, क्योंकि भारी बारिश के कारण पूरा झरना एक विशाल जलप्रपात बन जाता है। यहां तक पहुंचने के लिए हुबली, मैंगलुरु और बेंगलुरु से सड़क मार्ग सबसे सुविधाजनक है, जबकि निकटतम रेलवे स्टेशन तलगुप्पा है। मानसून में यहां धुंध और तेज बहाव के कारण व्यू पॉइंट से ही दृश्य देखना सुरक्षित होता है। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय यहां की सुंदरता और भी बढ़ जाती है।
7. उंचल्ली फॉल्स -कन्नड़
उंचल्ली फॉल्स कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले में स्थित एक बेहद शांत और प्राकृतिक झरना है, जिसे “केपेला फॉल्स” भी कहा जाता है। यह लगभग 116 मीटर ऊंचा झरना है और अघनाशिनी नदी पर स्थित है। अन्य प्रसिद्ध झरनों की तुलना में यह कम भीड़भाड़ वाला है, इसलिए यहां प्रकृति का असली और शांत रूप देखने को मिलता है। मानसून के दौरान यह झरना पूरी ताकत से बहता है और आसपास की हरियाली इसे बेहद आकर्षक बनाती है। यहां पहुंचने के लिए सिरसी या हुबली से सड़क मार्ग सबसे अच्छा ऑप्शन है। झरने तक पहुंचने के लिए कुछ ट्रेकिंग करनी पड़ती है, जिससे यह एडवेंचर पसंद करने वालों के लिए भी खास बन जाता है। यहां का वातावरण शांत, प्राकृतिक और फोटोग्राफी के लिए बहुत परफेक्ट है।
8. मगोड फॉल्स -कर्नाटक
मगोड फॉल्स कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ क्षेत्र में स्थित एक सुंदर झरना है, जो पश्चिमी घाट की हरियाली के बीच स्थित है। यह लगभग 200 मीटर की ऊंचाई से गिरता है और बेडती नदी पर बना हुआ है। मानसून के दौरान यह झरना पूरी तरह सक्रिय हो जाता है और आसपास की घाटियां घने बादलों और हरियाली से ढक जाती हैं। यह झरना उतना प्रसिद्ध नहीं है जितना जोग फॉल्स, इसलिए यहां भीड़ कम रहती है और शांत वातावरण मिलता है। यहां पहुंचने के लिए सिरसी और येल्लापुर सबसे नजदीकी शहर हैं, जहां से सड़क मार्ग द्वारा आसानी से जाया जा सकता है। यहां व्यू पॉइंट से झरने का सुंदर दृश्य दिखाई देता है और मानसून में फोटोग्राफी के लिए यह एक बेहतरीन जगह है। मानसून में रास्ते फिसलन भरे हो सकते हैं, इसलिए सावधानी जरूरी है।
महाराष्ट्र के प्रमुख झरने
9. लिंगमाला वॉटरफॉल -महाबलेश्वर
लिंगमाला वॉटरफॉल महाराष्ट्र के महाबलेश्वर के पास स्थित एक बेहद सुंदर और लोकप्रिय झरना है, जो मानसून में अपने पूरे सौंदर्य पर होता है। यह झरना लगभग 500–600 फीट की ऊंचाई से गिरता है और चारों ओर घने जंगलों, घाटियों और हरियाली से घिरा हुआ है। बारिश के मौसम में यहां पानी की धाराएं बहुत तेज हो जाती हैं और नीचे का दृश्य बेहद आकर्षक लगता है। महाबलेश्वर के पर्यटन स्थलों में यह सबसे ज्यादा देखे जाने वाले वॉटरफॉल्स में से एक है, इसलिए मानसून में यहां अच्छी भीड़ रहती है। यहां पहुंचने के लिए पुणे एयरपोर्ट सबसे नजदीकी हवाई अड्डा है और सातारा रेलवे स्टेशन नजदीकी रेल कनेक्शन देता है। महाबलेश्वर से यह झरना लगभग 5–6 किलोमीटर दूर है और सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है। यहां व्यू पॉइंट से झरने का नजारा देखा जाता है और फोटोग्राफी के लिए मानसून का समय सबसे अच्छा माना जाता है। हालांकि बारिश के दौरान चट्टानें फिसलन भरी हो जाती हैं, इसलिए सावधानी जरूरी है।
10. थोसेघर फॉल्स -सातारा
थोसेघर फॉल्स महाराष्ट्र के सातारा जिले में स्थित एक बहुत ही शांत और प्राकृतिक झरना है, जो अपनी ऊंचाई और गहरे घाटियों के लिए प्रसिद्ध है। यह झरना लगभग 200 मीटर से अधिक की ऊंचाई से गिरता है और एक साथ कई छोटी-बड़ी धाराओं में बहता है, जो इसे बेहद सुंदर बनाता है। मानसून में जब सह्याद्रि पर्वत श्रृंखला में भारी बारिश होती है, तब यह झरना अपने पूरे रूप में दिखाई देता है और आसपास की हरियाली इसे और भी आकर्षक बना देती है। यह स्थान उन लोगों के लिए आदर्श है जो भीड़-भाड़ से दूर शांति में प्रकृति का आनंद लेना चाहते हैं। यहां पहुंचने के लिए पुणे और सातारा से सड़क मार्ग सबसे सुविधाजनक है। सातारा से यह लगभग 20–25 किलोमीटर दूर स्थित है। व्यू पॉइंट से झरने का दृश्य देखा जाता है, और यहां फोटोग्राफी के लिए मानसून का समय सबसे अच्छा होता है। सुरक्षा कारणों से नीचे उतरना या किनारों के पास जाना अनुमति नहीं होती।
11. देवकुंड वॉटरफॉल -रायगढ़
देवकुंड वॉटरफॉल महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में स्थित एक बेहद खूबसूरत और एडवेंचर ट्रेकिंग डेस्टिनेशन है। यह झरना अपनी खासियत के लिए प्रसिद्ध है क्योंकि यह एक प्राकृतिक वाटर पूल बनाता है, जहां पानी एक झरने से गिरकर नीले-हरे रंग के कुंड में इकट्ठा होता है। यहां तक पहुंचने के लिए लगभग 5–6 किलोमीटर का ट्रेक करना पड़ता है, जिसमें जंगल, नदी पार करना और पहाड़ी रास्ते शामिल होते हैं। मानसून के दौरान यहां का दृश्य बेहद मनमोहक होता है, लेकिन भारी बारिश के कारण ट्रेकिंग कभी-कभी बंद भी कर दी जाती है। यह झरना भिरा गांव के पास स्थित है और यहां पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी बड़ा शहर पुणे है, जहां से सड़क मार्ग द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है। यहां स्थानीय गाइड के साथ ही जाना सुरक्षित माना जाता है। झरने का पानी बेहद साफ और ठंडा होता है, इसलिए पर्यटक यहां फोटोग्राफी और प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेते हैं। मानसून में यहां सावधानी बहुत जरूरी है क्योंकि रास्ते फिसलन भरे और नदी का बहाव तेज हो सकता है।
केरल के प्रमुख झरने
12. अथिराप्पिल्ली वॉटरफॉल -त्रिशूर
अथिराप्पिल्ली फॉल्स केरल के त्रिशूर जिले में स्थित यह झरना पश्चिमी घाट का सबसे प्रसिद्ध और भव्य झरनों में से एक है। इसे अक्सर “भारत का नियाग्रा” भी कहा जाता है क्योंकि यह लगभग 80 फीट ऊंचा और काफी चौड़ा है, जिससे मानसून में इसका दृश्य बहुत शक्तिशाली और आकर्षक हो जाता है। यह चालाकुडी नदी पर स्थित है और घने जंगलों, शोलायर रिजर्व फॉरेस्ट और हरियाली से घिरा हुआ है। मानसून (जून से सितंबर) के दौरान यहां पानी का बहाव बहुत तेज हो जाता है और चारों तरफ कोहरा और बारिश इसे एक जादुई वातावरण में बदल देते हैं। यहां पहुंचने के लिए कोच्चि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा सबसे नजदीकी एयरपोर्ट है, जो लगभग 55–60 किमी दूर है, जबकि चालाकुडी रेलवे स्टेशन सबसे पास है। सड़क मार्ग से कोच्चि और त्रिशूर से यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है। यहां व्यू पॉइंट्स से झरने का पूरा दृश्य देखा जा सकता है और पास में वाझाचल फॉल्स भी घूमने योग्य है। मानसून में यहां सुरक्षा बहुत जरूरी है क्योंकि पानी का बहाव अचानक बढ़ सकता है, इसलिए नदी के किनारे जाने से बचना चाहिए।
13. सूचिपाड़ा (सेंटिनल रॉक) वॉटरफॉल -वायनाड
सूचिपाड़ा फॉल्स जिसे सेंटिनल रॉक वॉटरफॉल भी कहा जाता है, केरल के वायनाड जिले में स्थित एक बेहद खूबसूरत तीन-स्तरीय झरना है। यह घने जंगलों और चाय बागानों के बीच स्थित है, जिससे यहां का प्राकृतिक वातावरण बेहद शांत और आकर्षक बन जाता है। मानसून के दौरान यह झरना पूरी ताकत से बहता है और लगभग 200 फीट की ऊंचाई से गिरता हुआ सफेद झरने जैसा दृश्य बनाता है। यहां तक पहुंचने के लिए जंगल के भीतर लगभग 1–2 किलोमीटर का ट्रेक करना पड़ता है, जिसमें सीढ़ियां और पथरीला रास्ता शामिल है, इसलिए यह स्थान एडवेंचर प्रेमियों के लिए खास माना जाता है। यहां पहुंचने के लिए कोझिकोड (कालीकट) एयरपोर्ट सबसे नजदीकी है, जो लगभग 90–100 किमी दूर है। सुल्तान बाथेरी और वायनाड से सड़क मार्ग द्वारा यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है। मानसून 2026 में जुलाई से सितंबर का समय सबसे अच्छा रहेगा, लेकिन भारी बारिश में ट्रेकिंग कभी-कभी बंद भी हो जाती है। यहां का प्राकृतिक पूल, हरियाली और जंगल का वातावरण फोटोग्राफी के लिए बेहद शानदार है, लेकिन पानी के पास उतरते समय सावधानी रखना जरूरी है क्योंकि चट्टानें काफी फिसलन भरी होती हैं।
मध्य भारत के झरने
14. चित्रकोट वॉटरफॉल -छत्तीसगढ़
चित्रकोट फॉल्स छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में इंद्रावती नदी पर स्थित भारत के सबसे चौड़े और सबसे भव्य झरनों में से एक है। इसे अक्सर “भारत का नियाग्रा” भी कहा जाता है क्योंकि मानसून के दौरान इसका फैलाव लगभग 300 मीटर से अधिक तक हो जाता है और पूरा झरना एक विशाल अर्धचंद्राकार रूप में गिरता है, जो देखने में बेहद शक्तिशाली और मनमोहक लगता है। मानसून 2026 में यहां घूमने का सबसे अच्छा समय जुलाई से अक्टूबर के बीच रहेगा, जब जलप्रवाह सबसे अधिक होता है और झरने का पूरा विस्तार देखा जा सकता है। यहां पहुंचने के लिए जगदलपुर सबसे नजदीकी बड़ा शहर है, जहां एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन दोनों सुविधाएं उपलब्ध हैं। जगदलपुर से चित्रकोट फॉल्स लगभग 38–40 किलोमीटर दूर है और सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है। यहां व्यू पॉइंट से झरने का पूरा दृश्य देखा जाता है और सूर्यास्त के समय इसका नजारा सबसे अधिक सुंदर लगता है। मानसून में यहां पानी का बहाव बहुत तेज होता है, इसलिए नदी के किनारे जाने या अनधिकृत जगहों पर उतरने से बचना चाहिए।
मानसून में झरनों की ट्रेवलिंग करते समय इन बातों का रखें ध्यान
मानसून के दौरान झरनों की खूबसूरती जितनी आकर्षक होती है, उतनी ही सावधानी भी जरूरी होती है। हमेशा फिसलन-रोधी जूते पहनें, मौसम का पूर्वानुमान देखकर ही यात्रा करें और स्थानीय प्रशासन की सुरक्षा सलाह का पालन करें। तेज़ बहाव वाले पानी में उतरने या बैरिकेड पार करके सेल्फी लेने से बचें। अपने साथ रेनकोट, वाटरप्रूफ बैग, अतिरिक्त कपड़े और जरूरी दवाइयां अवश्य रखें। यदि किसी झरने तक ट्रेकिंग करनी हो, तो स्थानीय गाइड के साथ जाना ज्यादा सुरक्षित रहता है।
मानसून 2026 में यदि आप प्रकृति, एडवेंचर और फोटोग्राफी का बेहतरीन अनुभव लेना चाहते हैं, तो ये 14 झरने आपके सफर को यादगार बना सकते हैं। हर झरने की अपनी अलग पहचान, प्राकृतिक सुंदरता और रोमांच है, जो बारिश के मौसम में अपने सबसे खूबसूरत रूप में नजर आते हैं।