यह कहानी भारत के आखिरी छोर कहे जाने वाले धनुषकोडी की है, जिसे आज भी "भूतों का गांव" कहा जाता है। 1964 के भयंकर साइक्लोन के बाद यह इलाका पूरी तरह उजड़ गया था। कभी यह एक चहल-पहल वाला शहर हुआ करता था, लेकिन एक रात आई नेचुरल डिजास्टर ने इसकी पहचान ही बदल दी। आज यहां मौजूद खंडहर उस भयावह त्रासदी की खामोश गवाही देते हैं। आइये जानते है इसके बारे में और भी कुछ अनकही बातें:
भारत का आखिरी छोर माना जाता है
धनुषकोडी, तमिलनाडु के दक्षिण-पूर्वी सिरे पर बसा है। यह भारत और श्रीलंका के बीच सबसे पास की जगहों में से एक माना जाता है। एक समय यह एक बस्टलिंग टाउन था, जहां रेलवे स्टेशन, पोस्ट ऑफिस, चर्च, स्कूल और मार्केट मौजूद थे।
रामायण से जुड़ा है धनुषकोडी का कनेक्शन
हिंदू मान्यताओं के अनुसार, यहीं से लार्ड राम ने श्रीलंका तक जाने के लिए वानर सेना के साथ राम सेतु बनाना शुरू कराया था। कहा जाता है कि युद्ध खत्म होने के बाद भगवान राम ने अपने धनुष (धनुष + कोडी) के सिरे से ब्रिज का एक हिस्सा तोड़ा था, जिसके कारण इस जगह का नाम धनुषकोडी पड़ा।
1964 के साइक्लोन ने सब कुछ खत्म कर दिया
22 दिसंबर 1964 को आए एक भयंकर साइक्लोन ने धनुषकोडी को तबाह कर दिया। समुद्र में उठी विशाल लहरों ने पूरे शहर को अपनी चपेट में ले लिया। कई इमारतें मिनटों में नष्ट हो गईं और हजारों लोगों की लाइफ एफेक्ट हुई , इस नेचुरल डिजास्टर के बाद कभी आबाद रहने वाला यह शहर देखते ही देखते खंडहर में बदल गया।
एक ट्रेन के साथ सैकड़ों लोग बह गए
इस डिजास्टर की सबसे दर्दनाक घटना पंबन-धनुषकोडी पैसेंजर ट्रेन से जुड़ी थी। तेज लहरों में ट्रेन पटरी से उतरकर समुद्र में समा गई। ट्रेन में सवार ज्यादातर पैसेंजर की मौत हो गई। इस ट्रैजेडी में कुल मिलाकर लगभग 1,800 लोगों के मारे जाने की बात बताई जाती है।
गवर्नमेंट ने शहर को रहने लायक नहीं माना
चक्रवात के बाद सरकार ने गवर्नमेंट को (इंसानों के रहने के लायक नहीं) डिक्लेयर कर दिया। इसके बाद ज्यादातर बचे हुए लोग दूसरी जगहों पर बस गए और यह इलाका लगभग पूरी तरह वीरान हो गया।
आज भी खंडहर बने हैं मेजर अट्रैक्शन
यहां आज भी पुराने चर्च, रेलवे स्टेशन, पानी की टंकियों और दूसरी बिल्डिंग के पार्ट दिखाई देते हैं। समुद्र के किनारे खड़े ये खंडहर उस भयंकर काली रात की याद दिलाते हैं। टूरिस्ट स्पेशली पुराने चर्च के पार्ट देखने आते हैं।
भूतों का गांव क्यों कहा जाता है?
सूरज ढलने के बाद यहां का सन्नाटा, वीरान इमारतें और उजड़े हुए ढांचे लोगों के मन में मिस्ट्री पैदा करते हैं। लोकल कहानियों और लोककथाओं के कारण इसे "भूतों का गांव" कहा जाने लगा। हालांकि भूत-प्रेत से जुड़े दावों का कोई साइंटिफिक एविडेंस नहीं है, लेकिन इसका सुनसान माहौल इसे भारत की सबसे रहस्यमयी जगहों में से एक बनाता है
धनुषकोडी कभी एक बस्टलिंग कोस्टल टाउन था, लेकिन 1964 के साइक्लोन ने इसे पूरी तरह उजाड़ दिया। आज यह अपने खंडहरों, हिस्ट्री और रहस्यमयी पहचान के कारण भारत के सबसे छिपे हुए टूरिस्ट डेस्टिनेशन में गिना जाता है।