महाराष्ट्र में गणेश चतुर्थी का रंग देखते ही बनता है। यहां गणपति उत्सव सिर्फ पूजा-पाठ ही नहीं होती, बल्कि पूरे शहर की रौनक बदल देता है। कई जगहों पर 10 दिनों तक सड़कें, बाजार और मोहल्ले रोशनी, पंडाल और भक्ति से जगमगा उठते हैं। ढोल-नगाड़ों की आवाज, गणपति दर्शन और विसर्जन जुलूस इस उत्सव को यूनिक एक्सपीरियंस बना देते हैं।
यदि आप गणेश चतुर्थी में महाराष्ट्र घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो हर शहर में आपको उत्सव का अलग अंदाज देखने को मिलेगा। इन शहरों में हर जगह गणपति उत्सव की अपनी अलग पहचान है। यही वजह है कि इन जगहों पर गणेश चतुर्थी सिर्फ त्योहार नहीं, बल्कि संस्कृति और परंपरा को करीब से देखने का मौका भी बन जाती है।
1. गणपतिपुले: गणपति के साथ समुद्र का नजारा
गणपतिपुले में गणेश चतुर्थी मनाने का एक्सपीरियंस बाकी जगहों से थोड़ा अलग है। यहां भक्ति के साथ कोंकण के समुद्र और प्राकृतिक खूबसूरती का आनंद भी लिया जा सकता है। यहां का सदियों पुराना श्री गणपति मंदिर अरब सागर के किनारे बना है। मंदिर में भगवान गणेश की प्रतिमा का मुख समुद्र की ओर है, जो इस जगह को और खास बनाता है।
2. कोल्हापुर: गणेशोत्सव में दिखता है लोकल रंग
कोल्हापुर में गणेशोत्सव शहर की संस्कृति और परंपराओं से गहराई से जुड़ा हुआ है। यहां त्योहार में आपको महाराष्ट्रीयन रीति-रिवाजों और उत्सव का अलग रंग देखने को मिलता है। गौरी आगमन का आयोजन यहां काफी धूमधाम से किया जाता है।
3. नासिक: गणपति के साथ गौरी
नासिक में गणेशोत्सव का माहौल अपनी अलग पहचान रखता है। यहां कई प्रसिद्ध गणपति मंदिर हैं, जिनमें नवश्या गणपति भी शामिल है। गणेश चतुर्थी के साथ यहां गौरी आगमन की परंपरा भी बड़े उत्साह से निभाई जाती है। घरों और इलाकों में डेकोरेशन और धार्मिक कार्यक्रमों का माहौल देखने को मिलता है। इसलिए मुंबई और पुणे के अलावा नासिक भी गणेशोत्सव के दौरान घूमने के लिए एक अच्छा ऑप्शन है।
4. मुंबई: हर तरफ गणपति बप्पा
गणेश चतुर्थी के दौरान मुंबई का माहौल पूरी तरह बदल जाता है। करीब 10 दिनों तक शहर के अलग-अलग इलाकों में बड़े-बड़े पंडाल सजाए जाते हैं और हर जगह गणपति बप्पा के जयकारे सुनाई देते हैं। लालबागचा राजा, मुंबईचा राजा और अंधेरीचा राजा जैसे प्रसिद्ध गणपति मंडलों में बड़ी संख्या में लोग दर्शन के लिए पहुंचते हैं। त्योहार का आखिरी दिन विसर्जन जुलूसों के साथ बेहद खास हो जाता है।
5. पुणे: परंपरा और इतिहास
गणेशोत्सव के इतिहास में पुणे की खास जगह है। यहां गणपति उत्सव सिर्फ पूजा में ही नहीं, बल्कि शहर की पुरानी परंपराओं का हिस्सा है। कसबा गणपति को पुणे का ग्राम देवता माना जाता है और इसे मानाचे गणपति में पहला स्थान मिलता है। इसके अलावा दगडूशेठ हलवाई गणपति भी यहां का बड़ा अट्रैक्शन है।