भारत का होकर भी ये अनोखा शहर, जो 16 अगस्त को मनाता है स्वतंत्रता दिवस!

बिहार अपनी एक अनोखी परंपरा की वजह से पूरे देश में अलग पहचान रखता है। यहां एक शहर ऐसा भी है, जहां आजादी का जश्न 15 नहीं बल्कि 16 अगस्त को मनाया जाता है। इसके पीछे जुड़ी कहानी देशभक्ति, साहस और बलिदान से भरी हुई है, जिसे जानकर हर भारतीय गर्व महसूस करेगा।

अपडेटेड Aug 07, 2026 पर 3:56 PM

भारत में हर साल 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस पूरे उत्साह के साथ मनाया जाता है। लेकिन एक ऐसा शहर भी है, जहां आज़ादी का जश्न 16 अगस्त को मनाने की परंपरा है। इसके पीछे चार वीर स्वतंत्रता सेनानियों का बलिदान जुड़ा है, जिन्होंने 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान देश के लिए अपनी जान न्योछावर कर दी थी।

 

अनोखी परंपरा


जहां पूरा देश 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाता है, वहीं बिहार के बक्सर जिले का डुमरांव 16 अगस्त को भी उतने ही उत्साह के साथ यह दिन मनाता है। यहां लोग झंडा फहराते हैं, शहीदों को श्रद्धांजलि देते हैं और उनके बलिदान को याद करते हैं। यह परंपरा कई दशकों से लगातार निभाई जा रही है और आज भी पूरे सम्मान के साथ जारी है। उन वीर स्वतंत्रता सेनानियों को याद करते हैं जिनके साहस और बलिदान ने आजादी की लड़ाई को नई ताकत दी।

 

ब्रिटिश शासन के कब्जा

साल 1942 में महात्मा गांधी ने 'करो या मरो' का नारा दिया था, जिसके बाद पूरे देश में भारत छोड़ो आंदोलन तेज हो गया। इसी आंदोलन के दौरान डुमरांव के हजारों लोग तिरंगा लेकर पुलिस थाने की ओर बढ़े। उनका उद्देश्य ब्रिटिश शासन के कब्जे वाली इमारत पर तिरंगा फहराकर आजादी की लड़ाई में अपना योगदान देना था। इस आंदोलन में महिलाओं, युवाओं और बच्चों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

 

वीरों का बलिदान

जब प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हुए, तो अंग्रेज पुलिस ने उन पर गोलियां चला दीं। इस गोलीबारी में कपिल मुनि, गोपाल कहार, रामदास सोनार और रामदास लोहार शहीद हो गए। कई अन्य लोग भी घायल हुए, लेकिन लोगों का हौसला नहीं टूटा। अपने साथियों के बलिदान के बावजूद आंदोलन जारी रहा और आखिरकार प्रदर्शनकारियों ने तिरंगा फहराकर अपने संकल्प को पूरा किया।

 

शहीद स्मारक

देश आजाद होने के बाद जिस पुलिस थाने में यह घटना हुई थी, उसे चारों शहीदों की याद में स्मारक में बदल दिया गया। यह स्मारक आज भी लोगों को आजादी की लड़ाई और उन वीरों के बलिदान की याद दिलाता है। हर साल 16 अगस्त को यहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचकर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं और उनके योगदान को नमन करते हैं। यह परंपरा हमें याद दिलाती है कि भारत की आजादी लाखों लोगों के संघर्ष और बलिदान का परिणाम है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।

 

सरकारी सम्मान

डुमरांव की इस ऐतिहासिक परंपरा को समय के साथ सरकारी मान्यता भी मिली। बिहार सरकार ने वर्ष 2015 में 16 अगस्त को होने वाले इस आयोजन को आधिकारिक पहचान दी। इसके बाद इस दिन होने वाले कार्यक्रमों को और अधिक महत्व मिला। वर्ष 2017 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शहीद स्मारक पर चारों वीरों की प्रतिमाओं का अनावरण किया, जिससे आने वाली पीढ़ियां भी उनके बलिदान को याद रख सकें।

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