भारत की पहली हाई-एल्टीट्यूड स्नो लेपर्ड सफारी अब होगी आसान, लद्दाख बना एडवेंचर का ठिकाना!

लद्दाख में वाइल्डलाइफ और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए भारत की पहली हाई-एल्टीट्यूड वाइल्डलाइफ सफारी शुरू की जा रही है। इस प्लान में गाइड के साथ जीप सफारी, वहां के लोगो को नौकरी, इको-टूरिज्म को बढ़ावा और स्नो लेपर्ड जैसे दुर्लभ जानवरों की सुरक्षा पर खास ध्यान दिया जाएगा। इसका उद्देश्य टूरिस्ट और प्रकृति के बीच बैलेंस बनाए रखना है।

अपडेटेड Aug 07, 2026 पर 1:05 PM

लद्दाख अपनी बर्फीली पहाड़ियों, खूबसूरत नजारों और दुर्लभ वाइल्डलाइफ के लिए दुनियाभर में मशहूर है। लेकिन बढ़ती ऑफ-रोडिंग और लापरवाह टूरिस्ट से यहां के वाइल्डलाइफ को नुकसान पहुंच रहा था। अब इस प्रॉब्लम को रोकने और प्रकृति की सुरक्षा के लिए लद्दाख एडमिनिस्ट्रेशन ने भारत की पहली हाई-एल्टीट्यूड वाइल्डलाइफ सफारी शुरू करने का फैसला लिया है।

 

 


स्नो लेपर्ड सफारी

Story pin image

स्नो लेपर्ड यानी हिम तेंदुआ लद्दाख का राजकीय पशु है और दुनिया के सबसे दुर्लभ जानवरों में गिना जाता है। इसे "पहाड़ों का भूत" भी कहा जाता है क्योंकि यह बहुत कम दिखाई देता है। भारत में पाए जाने वाले ज्यादातर स्नो लेपर्ड लद्दाख में रहते हैं। नई सफारी और कंजर्वेशन प्लान का मुख्य उद्देश्य इस दुर्लभ जीव और इसके प्राकृतिक आवास की रक्षा करना है।

लद्दाख एडमिनिस्ट्रेशन ने भारत की पहली हाई-एल्टीट्यूड वाइल्डलाइफ सफारी शुरू करने की घोषणा की है। यह सफारी हेमिस नेशनल पार्क, चांगथांग, काराकोरम वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी, नुब्रा, द्रास और शाम जैसे इलाकों में चलाई जाएगी। टूरिस्ट अब तय रास्तों पर गाइड के साथ जीप सफारी कर सकेंगे। इससे लोग सेफ तरीके से वाइल्डलाइफ और प्राकृतिक सुंदरता का आनंद ले पाएंगे।

 

वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन

This may contain: two snow leopards sitting on top of a snowy mountain

इस सफारी का सबसे बड़ा उद्देश्य वाइल्डलाइफ की सुरक्षा करना है। पहले कई टूरिस्ट स्नो लेपर्ड और दूसरे जानवरों को देखने के लिए नियम तोड़कर ऑफ-रोडिंग करते थे, जिससे जानवरों का प्राकृतिक जीवन प्रभावित होता था। अब गाइडेड सफारी के जरिए टूरिस्ट का आना जाना तय रास्तों तक ही रहेगी। इससे वाइल्डलाइफ को कम परेशानी होगी और उनका प्राकृतिक आवास भी सेफ रहेगा।

 

 

लोकल एम्प्लॉयमेंट

इस नई योजना से वहां के लोगों को भी बड़ा फायदा मिलेगा। कई युवाओं को गाइड और ड्राइवर के रूप में ट्रेनिंग देकर नौकरी दी जाएगी। महिलाओं को वाइल्डलाइफ से जुड़े स्मृति-चिह्न (सुवेनियर) बनाना सिखाया जाएगा, जिन्हें टूरिस्ट को बेचा जाएगा। इससे वहां के लोगों की इनकम बढ़ेगी और वे भी वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन में साथ देंगे।

 

 

नेचर कंजर्वेशन

लद्दाख एडमिनिस्ट्रेशन ने सिर्फ सफारी ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के लिए कई और कदम भी उठाए हैं। टूरिस्ट को जागरूक करने के लिए जगह-जगह सूचना बोर्ड लगाए जाएंगे। कचरा फैलाने, नियम तोड़कर गाड़ी चलाने और जानवरों को परेशान करने पर रोक लगाने की कोशिश की जाएगी। साथ ही पक्षियों को देखने के लिए खास जगहें बनाई जाएंगी और युवाओं को बर्ड वॉचिंग की ट्रेनिंग भी दी जाएगी।

 

 

प्रमोटिंग टूरिस्म

इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य सिर्फ जानवरों की सुरक्षा करना नहीं, बल्कि जिम्मेदार टूरिस्म को बढ़ावा देना भी है। इससे टूरिस्ट लद्दाख की खूबसूरती और वाइल्डलाइफ को बिना नुकसान पहुंचाए करीब से देख सकेंगे। साथ ही वहां के लोगों को रोजगार मिलेगा, पर्यावरण सेफ रहेगा और लद्दाख में टूरिस्म का एक्सपीरियंस पहले से ज्यादा बेहतर बन सकेगा।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।