बॉलीवुड फिल्मों ने चमकाई इन भारतीय हेरिटेज साइट्स की किस्मत, बने सुपरहिट टूरिस्ट स्पॉट जो है देश-विदेश में मशहूर!
भारत में मौजूद कई अनदेखी और भूली-बिसरी हेरिटेज साइट्स फिल्मों की शूटिंग के कारण एक बार फिर चर्चा में आई हैं। ऐतिहासिक महल, किले और हवेलियां अपने यूनिक आर्किटेक्टर और पुराने दौर की झलक से फिल्मों को रियल और अट्रैक्टिव बनाती हैं। यही वजह है कि इन जगहों ने कई मशहूर फिल्मों की कहानी और दृश्यों को यादगार बनाने में अहम भूमिका निभाई है।
भारत में कई ऐसी पुरानी हेरिटेज साइट्स हैं, जिन्हें आज बहुत कम लोग जानते हैं। लेकिन फिल्मों में यही हिस्टोरिकल लोकेशन अपनी खूबसूरती और पुराने दौर की कहानी के साथ बड़े पर्दे पर फिर से जिंदा हो जाती हैं। आइए जानते हैं भारत की ऐसी ही कुछ अनोखी और भूली-बिसरी हेरिटेज साइट्स के बारे में, जिन्हें फिल्मों ने एक नई पहचान दिलाई।
लगान (2001) – विजय विलास पैलेस, गुजरात
आशुतोष गोवारिकर की 'लगान' में ऐतिहासिक लोकेशनों ने फिल्म को रियल और बड़ा लुक दिया। काल्पनिक गांव चंपानेर का सेट गुजरात के कच्छ जिले के कुनारिया गांव के पास बनाया गया, जहां का सूखा और प्रकृति से भरपूर माहौल कहानी के लिए परफेक्ट था।
ब्रिटिश ऑफिसर्स के सीन की शूटिंग मांडवी के विजय विलास पैलेस और भुज के प्राग महल में हुई। विजय विलास पैलेस अपनी राजपूत-यूरोपीय आर्किटेक्चर के लिए जाना जाता है, जबकि प्राग महल की इटालियन-गोथिक स्टाइल और विशाल दरबार हॉल ने फिल्म को रीगल और हिस्टोरिकल फील दिया।
लुटेरा (2013) – इटाचुना राजबाड़ी, पश्चिम बंगाल
विक्रमादित्य मोटवाने की 'लुटेरा' का खूबसूरत और दिल को छू लेने वाला माहौल पश्चिम बंगाल की ऐतिहासिक धरोहरों से तैयार हुआ। फिल्म की मुख्य शूटिंग इटाचुना राजबाड़ी में हुई, जो करीब 200 साल पुरानी जमींदारी हवेली है।
हुगली जिले की यह हवेली अपने विशाल आंगन, ऊंची छतों, लंबे बरामदों और औपनिवेशिक शैली की वास्तुकला के लिए जानी जाती है। फिल्म के कई सीन पुरुलिया के देउलघाटा जैन मंदिरों और बेलकुरी गांव में भी शूट किए गए, जिससे कहानी को पुराने बंगाल का हकीकत जैसा रूप मिला। वहीं, फिल्म के दूसरे हिस्से की शूटिंग हिमाचल प्रदेश के कालाटॉप में हुई, जहां बर्फ से ढके जंगल और शांत वातावरण ने कहानी के इमोशन को और गहरा बना दिया।
पहेली (2005) – हाड़ी रानी की बावड़ी, राजस्थान
शाहरुख खान और रानी मुखर्जी की फिल्म 'पहेली' में राजस्थान की अनदेखी ऐतिहासिक धरोहरों को बेहद खूबसूरती से दिखाया गया है।
फिल्म में टोडारायसिंह की हाड़ी रानी की बावड़ी और दौसा जिले की फेमस चांद बावड़ी को खास तौर पर दिखाया गया। हाड़ी रानी की बावड़ी अपनी दो मंजिला मेहराबों, सुंदर नक्काशी और देवी-देवताओं की मूर्तियों के लिए पॉपुलर है। वहीं, चांद बावड़ी भारत की सबसे गहरी और सबसे खूबसूरत बावड़ियों में गिनी जाती है। इसकी हजारों एक जैसी डिजाइन वाली सीढ़ियां और यूनिक ज्योमेट्रिक डिजाइन फिल्म के जादुई माहौल को और अट्रैक्टिव बनाती हैं।
तुम्बाड (2018) – पुरंदारे वाडा, महाराष्ट्र
हॉरर फिल्म 'तुम्बाड' का डरावना और सस्पेंस से भरा माहौल काफी हद तक पुरंदारे वाडा की वजह से यादगार बन गया।
पुणे के पास स्थित यह 18वीं सदी की मराठा हवेली अपनी पुरानी लकड़ी की स्ट्रक्चर, बड़े दरवाजों, नक्काशीदार खंभों और जर्जर दीवारों के लिए जानी जाती है। फिल्म में इसकी अंधेरी गलियां, टूटती छतें और सीलन भरे कमरे लालच और भय की कहानी को और इफेक्टिव बनाते हैं। यहां की पुरानी आर्किटेक्चर ने फिल्म को ऐसा डरावना माहौल दिया, जिसे फिल्मी सेट पर तैयार करना लगभग असंभव था।
हैदर (2014) – मार्तंड सूर्य मंदिर, कश्मीर
विशाल भारद्वाज की 'हैदर' में कश्मीर की हिस्टोरिकल हेरिटेज साइट्स कहानी का जरूरी हिस्सा बनती हैं।
फिल्म का पॉपुलर 'बिस्मिल' सॉन्ग 8वीं सदी के मार्तंड सूर्य मंदिर में फिल्माया गया था। विशाल पत्थर के खंभे और प्राचीन खंडहर इस सीन को बेहद भव्य बनाते हैं। इसके अलावा निशात बाग, हज़रतबल दरगाह, ज़ैना कदल पुल, मट्टन और सोनमर्ग जैसी जगहों ने फिल्म को कश्मीर की संस्कृति, इतिहास और नेचुरल ब्यूटी से गहराई से जोड़ दिया।
ब्रह्मास्त्र (2022) – रामनगर किला, उत्तर प्रदेश
अयान मुखर्जी की 'ब्रह्मास्त्र' में वाराणसी का ऐतिहासिक रामनगर किला मॉडर्न विजुअल इफेक्ट्स के साथ शानदार तरीके से दिखाई देता है।
18वीं सदी में बने इस किले का निर्माण महाराजा बलवंत सिंह ने कराया था। चुनार के बलुआ पत्थर से बने इस किले की नक्काशीदार बालकनियां, विशाल आंगन, दरबार हॉल और गंगा किनारे की खूबसूरत स्थिति फिल्म के कई सीन में नजर आती है। खासकर 'केसरिया' गाने की शूटिंग ने इस किले को नई पहचान दी। फिल्म में यह किला सिर्फ एक लोकेशन नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कृति और मॉडर्न सिनेमेटिक इमेजिनेशन के यूनिक ब्लेंड का प्रतीक बनकर सामने आता है।