क्या आप जानते हैं कि 2026 में भारत का पासपोर्ट दुनिया में किस स्थान पर है? हर साल ग्लोबल पासपोर्ट रैंकिंग यह बताती है कि किस देश के सिटिज़न को कितनी आसानी से ट्रैवल की सुविधा मिलती है। इस रैंकिंग में भारत की पोजीशन और बदलाव दोनों ही चर्चा में रहते हैं। आइए जानते हैं इस साल की लेटेस्ट रिपोर्ट क्या कहती है:
2026 के ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स में भारत को 197 देशों में 125वां रैंक मिला है। यह दिखाता है कि भारत की रैंकिंग अभी भी मिड-लो रेंज पर बनी हुई है। साथ ही यह भी संकेत देता है कि अभी सुधार की काफी गुंजाइश बाकी है।
रिपोर्ट के अनुसार भारत का कुल कंपोजिट स्कोर 45.1 रहा, जो पिछले पांच सालों में सबसे बेहतर स्कोर (5-year high) माना गया है। यानी सुधार भी देखने को मिला है और ट्रैवल की सुविधा धीरे-धीरे बेहतर हो रही है।
भारत की तुलना दूसरे देशों से
भारत से ठीक ऊपर नामीबिया (124वां) और नीचे अज़रबैजान (126वां) रहा। इससे पता चलता है कि भारत की पोजीशन अभी भी कई देशों के बीच मिड-टेबल में है और कॉम्पिटिशन काफी टाइट है।
यह इंडेक्स सिर्फ वीज़ा-फ्री ट्रैवल पर नहीं बल्कि तीन चीजों पर बेस्ड है:
मोबिलिटी (ट्रैवल की सुविधा), इन्वेस्टमेंट के मौके, लाइफ क्वालिटी, इन तीनों का बैलेंस ही फाइनल रैंक तयडिसाइड करता है।
इंडियन पासपोर्ट होल्डर कई देशों में वीज़ा-ऑन-अराइवल और ई-वीज़ा की सुविधा मिलती है, लेकिन अभी भी कई डेवलप्ड कंट्री के लिए लंबी वीज़ा प्रोसेस करनी पड़ती है। इससे ट्रैवल प्लान थोड़ा मुश्किल और समय लेने वाला हो जाता है।
2026 में दुनिया का सबसे मजबूत पासपोर्ट स्वीडन का रहा। इसके बाद स्विट्ज़रलैंड, फ़िनलैंड, जर्मनी, नीदरलैंड और डेनमार्क जैसे यूरोपीय देश टॉप पर रहे। सिंगापुर टॉप 10 में एकमात्र गैर-यूरोपीय देश रहा। यह दिखाता है कि यूरोप अभी भी ग्लोबल मोबिलिटी में आगे है।
भारत का पासपोर्ट अभी भी मिड-रैंक में है लेकिन धीरे-धीरे सुधार दिख रहा है। वीज़ा-ऑन-अराइवल और ई-वीज़ा की सुविधाएं इंडियन ट्रैवलर के लिए राहत देती हैं। हालांकि कई डेवलप्ड कंट्री तक पहुंच अभी भी आसान नहीं है। आने वाले समय में बेहतर एग्रीमेंट से भारत की रैंकिंग और मजबूत होने की उम्मीद है।