भारत में टॉय ट्रेन की जर्नी एक यादगार एक्सपीरियंस होती है। दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे से लेकर माथेरान हिल रेलवे तक, ये ऐतिहासिक रेल मार्ग खूबसूरत पहाड़ों, हरियाली और मनमोहक नजारों के बीच से गुजरते हैं। इनमें से कई टॉय ट्रेनें UNESCO की विश्व धरोहर लिस्ट में भी शामिल हैं। प्रकृति के शानदार नजारे देखने के लिए ये ट्रेन जर्नी ट्रैवल लिस्ट में जरूर होनी चाहिए।
हिमाचल प्रदेश की कालका-शिमला रेलवे भारत की सबसे खूबसूरत टॉय ट्रेन जर्नी में से एक है। यह रेल मार्ग UNESCO की विश्व धरोहर लिस्ट में भी है। इस पूरे सफर में ट्रेन 800 से ज्यादा पुलों और 100 से ज्यादा सुरंगों से होकर गुजरती है। नैरो गेज पर चलने वाली यह ट्रेन ओक और चीड़ के घने जंगलों, पहाड़ियों और घुमावदार रास्तों के बीच से आगे बढ़ती है। रास्ते में हिमालय की ऊंची-ऊंची चोटियों और प्राकृतिक सुंदरता के शानदार नजारे देखने को मिलते हैं, जो इस जर्नी को हमेशा के लिए यादगार बना देते हैं।
पश्चिम बंगाल की दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे 1881 से चल रही है और यह भी यूनेस्को की UNESCO धरोहर लिस्ट में है। इस टॉय ट्रेन का सफर धुंध से ढके चाय के बागानों, हरियाली और पहाड़ी जंगलों के बीच से गुजरता है। रास्ते में कई पॉपुलर लूप, तीखे मोड़ और छोटे-छोटे खूबसूरत गांव देखने को मिलते हैं। साफ मौसम में इस जर्नी में दुनिया की तीसरी सबसे ऊंची चोटी कंचनजंगा का शानदार नजारा भी दिखाई देता है। यही वजह है कि यह भारत की सबसे पॉपुलर टॉय ट्रेन जर्नी है।
हिमाचल प्रदेश की कांगड़ा वैली रेलवे पठानकोट को जोगिंदर नगर से जोड़ती है। यह नैरो गेज ट्रेन अपनी शांत और खूबसूरत जर्नी के लिए मशहूर है। सफर के दौरान हरे-भरे खेत, चाय के बागान, छोटे-छोटे गांव, पहाड़ी नदियां और झरने देखने को मिलते हैं। पूरे रास्ते धौलाधार पर्वतमाला की बर्फ से ढकी चोटियां ट्रैवलर को बहुत अट्रैक्ट करती हैं। प्रकृति के बीच आरामदायक सफर का आनंद लेने वालों के लिए यह रेल जर्नी एक बेस्ट ऑप्शन है।
महाराष्ट्र की माथेरान हिल रेलवे पश्चिमी घाट की खूबसूरत वादियों से होकर गुजरती है। यह हेरिटेज टॉय ट्रेन नेरल से माथेरान तक का सफर तय करती है। रास्ते में कई घुमावदार मोड़, घने जंगल, लाल मिट्टी के रास्ते और हरियाली से भरे नजारे देखने को मिलते हैं। ट्रेन की धीमी रफ्तार ट्रैवलर को हर दृश्य का आराम से आनंद लेने का मौका देती है। शहर की भागदौड़ से दूर शांति और प्राकृतिक सुंदरता का एक्सपीरियंस करने के लिए यह जर्नी स्पेशल है।
तमिलनाडु की नीलगिरि माउंटेन रेलवे अपनी खास 'रैक एंड पिनियन' तकनीक के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। यह रेल मार्ग भी यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है। ट्रेन मेट्टुपालयम से ऊटी तक का सफर घने जंगलों, ऊंचे पुलों, गहरी घाटियों और खूबसूरत पहाड़ियों के बीच से गुजरती करती है। रास्ते में दूर-दूर तक फैले चाय के बागान और ठंडी वादियां ट्रैवलर का मन मोह लेती हैं। यह सफर प्रकृति और पुराने रेल इतिहास का शानदार ब्लेंड दिखाता है।
प्रकृति, पहाड़ों और शांत माहौल के बीच धीमी रफ्तार से चलने वाली ये ट्रेनें सफर को ज्यादा खूबसूरत बना देती हैं। हर रास्ता अपनी अलग प्राकृतिक सुंदरता, इतिहास और संस्कृति की झलक दिखाता है, इसलिए जीवन में एक बार इन टॉय ट्रेन में जरूर बैठे।