इन वाइल्ड लाइफ सैंक्चुअरी के बंद होने से पहले जरूर घूम आए ये 6 खूबसूरत डेस्टिनेशन!

भारत के मेजर वाइल्ड लाइफ डेस्टिनेशन भारत की बायो-डाइवर्सिटी का जरूरी भाग हैं। ये जगह बाघ, शेर, गैंडा और कई दुर्लभ जीवों के लिए सुरक्षित घर हैं। इन जंगलों से जुड़ी कई रहस्यमयी लोककथाएं और मान्यताएं भी प्रचलित हैं, जो इन्हें और दिलचस्प बनाती हैं। यहां की नेचुरल ब्यूटी और डेंस फारेस्ट टूरिस्ट को अट्रैक्ट करते हैं। इसलिए इन वन्यजीव अभयारण्यों का कंज़र्वेशन हमारी नेचुरल और कल्चरल हेरिटेज के लिए बहुत जरूरी है। लेकिन ध्यान दे कि जुलाई में मानसून होने की वजह से ज्यादातर बड़े वन्यजीव अभयारण्य या तो बंद रहते हैं या सीमित रूप से ही खुले रहते हैं।

अपडेटेड Jun 05, 2026 पर 8:00 AM

भारत में बायो-डाइवर्सिटी की नजर से दुनिया के सबसे अमीर देशों में से एक माना जाता है। यहां घने रेन फारेस्ट, ड्राई फारेस्ट, मोंटेन फारेस्ट, मैंग्रोव वन और घास के मैदान जैसे ग्रास लैंड पाए जाते हैं। इन वनों में हजारों प्रकार के जीव-जंतु, पक्षी, सरीसृप और वनस्पतियां रहते करती हैं। साथ ही, भारत के कई जंगल अपनी प्राचीनता, रहस्यमयी कथाओं और ऐतिहासिक महत्व के कारण भी पॉपुलर हैं। ऐसे ही कुछ वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी के बारे में यहां बता रहे है:

भीमाशंकर वन्यजीव अभयारण्य, महाराष्ट्र

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सह्याद्री की पहाड़ियों में यह सैंक्चुअरी विशाल पेड़ों और घने जंगलों से घिरा हुआ है। यहां का मैन अट्रैक्शन दुर्लभ 'शेकरू' (विशालकाय गिलहरी) है। यह सह्याद्री की पहाड़ियों में एक घना जंगल है। मॉनसून के दौरान यहां के कुछ हिस्से रात में हरे रंग की रोशनी से चमकने लगते हैं, जिसका कारण 'बायोलुमिनसेंट' (चमकने वाले) फंगस होते हैं। यह नजारा किसी जादुई दुनिया जैसा लगता है, ऐसा माना जाता है कि इसी जंगल में असुर त्रिपुरासुर का वध करने के लिए शिव जी ने रुद्र रूप लिया था, जिसके बाद उनके पसीने से भीमा नदी का निर्माण हुआ था


जाटिंगा वन्यजीव अभयारण्य, असम

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यह स्थान "पक्षियों की आत्महत्या" के रहस्य के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। हर साल सितंबर और अक्टूबर के महीनों में, विशेष रूप से अमावस्या की रात को, यहां लोकल्स और बर्ड्स पेड़ों से गिरकर रहस्यमय तरीके से मर जाते हैं। साइंटिस्ट आज तक यह नहीं सुलझा पाए हैं कि ऐसा क्यों होता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस घाटी में अदृश्य आत्माओं का वास है, जो रात के समय पक्षियों को भ्रमित कर देती हैं और उन्हें जमीन पर खींच लेती हैं

डाउ हिल (कर्सियोंग), पश्चिम बंगाल

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दार्जिलिंग के पास स्थित यह घना जंगल अपनी डरावनी और रहस्यमयी घटनाओं के लिए जाना जाता है। यहां का टेम्परेचर हमेशा अबनॉर्मली कम रहता है। लोकल्स और टूरिस्ट का मानना है कि यहां एक 'हेडलेस बॉय' (बिना सिर का लड़का) की आत्मा भटकती है। इसके अलावा, यहां के जंगलों में एक 'डेथ रोड' (मौत की सड़क) है, जहां कई लकड़हारों और राहगीरों ने अजीबो-गरीब और डरावनी परछाइयों को देखने का दावा किया है

मावफलांग पवित्र वन, मेघालय

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खासी पहाड़ियों में यह जंगल सदियों पुराना है और यहां का लोकल इको-सिस्टम बहुत मजबूत है। यहां का रूल है कि आप जंगल से एक पत्ता या लकड़ी भी अपने घर नहीं ले जा सकते। लोकल ट्रिबल्स का मानना है कि इस जंगल में 'लाब्सा सुहम' (भगवान) रहते हैं। ऐसी मान्यता है कि जिन लोगों ने जंगल से लकड़ी काटने या नुकसान पहुंचाने की कोशिश की, उन्हें देवताओं के प्रकोप का सामना करना पड़ा और वे रहस्यमय तरीके से गायब हो गए या गंभीर रूप से बीमार पड़ गए

पेंच टाइगर रिजर्व, मध्य प्रदेश

यह रहस्यमयी और घना जंगल अपने वाइल्डलाइफ (बाघ, तेंदुए, भेड़ियों) के लिए जाना जाता है। यह वही जंगल है, जिसने पॉपुलर राइटर रूडयार्ड किपलिंग को उनकी कालजयी रचना 'द जंगल बुक' लिखने की इंस्पिरेशन दी थी। इसी फारेस्ट के मोगली की सच्ची कहानी (भेड़ियों द्वारा पाला गया बच्चा) और बघीरा-शेरखान के किरदार असलियत में इसी मिस्त्री पर बेस्ड हैं

सुंदरबन वन्यजीव अभयारण्य, पश्चिम बंगाल

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दुनिया के सबसे बड़े मैंग्रोव वन और डेल्टा में पॉपुलर सुंदरबन अपने आदमखोर बाघों और खारे पानी के खतरनाक मगरमच्छों के लिए जाना जाता है। यहां का पानी दिन में दो बार बढ़ता और घटता है। यहां के मछुआरे जंगल में एंट्री करने से पहले 'बोन बीबी' (जंगल की देवी) की पूजा करते हैं। उनका मानना है कि बोन बीबी ही उन्हें खूंखार बाघों और जंगल के खतरों से बचाती हैं। यहां के बाघों को 'मैन-ईटर' कहा जाता है, जो चुपके से शिकार करने के लिए जाने जाते हैं

भारत की वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी बहुत खास हैं क्योंकि ये सिर्फ जानवरों का घर नहीं हैं, बल्कि रहस्यों और कहानियों से भी जुड़े हुए हैं। इसलिए यह कहा जा सकता है कि भारत के जंगल और सैंक्चुअरी नेचर की प्राइसलेस हेरिटेज हैं। ये जानवरों को घर देते हैं और साथ ही हमें नेचर के रहस्यों और ब्यूटी से भी जोड़ते हैं। इसलिए इनका कंज़र्वेशन बहुत जरूरी है।

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