जानिए इतिहास के सबसे तेज धमाके के बारे में, जिसने दो दिन तक रोक दी सूरज की रोशनी!

इंडोनेशिया के अनाक क्राकाटाउ ज्वालामुखी विस्फोट हुआ, जिससे राख 250 मीटर तक आसमान में पहुंची। एक्सपर्ट का कहना है कि इससे आसपास के लोगों के लिए कोई बड़ा खतरा नहीं है। यह ज्वालामुखी दुनिया के सबसे एक्टिव ज्वालामुखियों में से एक है। आइए जानते हैं इससे जुड़ी रोचक और हैरान कर देने वाली बातें।

अपडेटेड Jul 17, 2026 पर 12:46 PM

इंडोनेशिया का एक्टिव ज्वालामुखीय द्वीप अनाक क्राकाटाउ एक बार फिर विस्फोटों के कारण चर्चा में है। इस हफ्ते हुए कई विस्फोटों के दौरान ज्वालामुखी से राख का गुबार करीब 250 मीटर तक आसमान में उठता देखा गया। हालांकि, एक्सपर्ट का कहना है कि फिलहाल आसपास के लोगों के लिए कोई खतरा नहीं है। आइये जानते है इसके बारे में और भी खास बातें:

1883 का विनाशकारी क्राकाटोआ विस्फोट

Anak Krakatau at highest alert | WIRED

इंडोनेशिया के क्राकाटोआ ज्वालामुखी में अगस्त 1883 में इतिहास के सबसे भीषण विस्फोटों में से एक हुआ। इस विस्फोट ने महज 48 घंटों में 36,000 से ज्यादा लोगों की जान ले ली और करीब 165 गांव पूरी तरह तबाह हो गए। इसी विस्फोट के बाद विशाल काल्डेरा बना, जिससे बाद में अनाक क्राकाटाउ का जन्म हुआ। इसे दुनिया की सबसे घातक प्राकृतिक आपदाओं में गिना जाता है।


दो दिन तक नहीं दिखा सूरज

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26 अगस्त 1883 को शुरू हुए विस्फोट के बाद राख और धूल का विशाल गुबार करीब 48 किलोमीटर ऊंचाई तक पहुंच गया। राख का बादल लगभग 3 लाख वर्ग मील क्षेत्र में फैल गया, जिससे पूरे इलाके में दो दिनों से ज्यादा समय तक घना अंधेरा छाया रहा। लोगों को दिन में भी कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। यह घटना इतिहास की सबसे भयावह ज्वालामुखी आपदाओं में रिकॉर्ड है।

धमाका जिसकी आवाज़ 4,600 किलोमीटर दूर तक सुनाई दी

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27 अगस्त को हुए सबसे बड़े विस्फोट की आवाज़ इतनी तेज थी कि इसे ऑस्ट्रेलिया और मॉरीशस तक सुना गया, जो लगभग 4,600 किलोमीटर दूर हैं। इसे अब तक दर्ज मानव इतिहास की सबसे तेज आवाज़ों में से एक माना जाता है। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि पूरे द्वीप का बड़ा हिस्सा उड़ गया। इसकी गूंज ने दुनिया को हैरान कर दिया।

सुनामी ने मचाई सबसे ज्यादा तबाही

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ज्वालामुखी विस्फोट के बाद समुद्र में गिरे लावा और चट्टानों से कई विशाल सुनामी लहरें उठीं। इन लहरों ने तटीय इलाकों को तबाह कर दिया और करीब 34,000 लोगों की मौत केवल सुनामी से हुई। कई शहर और गांव समुद्र में समा गए। जो लोग सुनामी से बच निकले, उनमें से कई पायरोक्लास्टिक फ्लो की चपेट में आ गए।

पूरी दुनिया के मौसम पर पड़ा असर

This is the crater created by Mount Tambora's eruption in 1815 was the largest in recorded history. It caused a 'year without a summer,' leading to global crop failures and food shortages. :

विस्फोट से निकली भारी मात्रा में राख वातावरण की ऊपरी परतों तक पहुंच गई और पूरी दुनिया में फैल गई। इसकी वजह से वैश्विक औसत टेम्परेचर लगभग 0.5 डिग्री सेल्सियस तक घट गया। कई वर्षों तक सूर्योदय और सूर्यास्त का रंग गहरा लाल दिखाई देता रहा। वैज्ञानिकों के अनुसार, वातावरण सामान्य होने में करीब पांच साल लगे।

'द स्क्रीम' पेंटिंग से भी जोड़ा जाता है संबंध

How two men stole Edvard Munch's The Scream in just 50 seconds — and how authorities managed to get the painting back - ABC News

क्राकाटोआ विस्फोट के बाद दुनिया भर में आसमान लंबे समय तक लाल दिखाई देता था। कुछ एक्सपर्ट मानते हैं कि फेमस पेंटर एडवर्ड मंक की मशहूर पेंटिंग द स्क्रीम में दिखाया गया लाल आसमान इसी घटना से इंस्पायर्ड हो सकता है। यह सिर्फ साइंटिफिक अनुमान है, न कि पूरी तरह से सच। यह विस्फोट आर्ट और साइंस दोनों पर अपनी छाप छोड़ गया।

साइंटिस्ट को मिली जेट स्ट्रीम की अहम जानकारी

जेट स्ट्रीम - विकिपीडिया

इस आपदा ने वैज्ञानिकों को वायुमंडल की ऊपर की लेयर में बहने वाली जेट स्ट्रीम के बारे में समझ विकसित करने में मदद की। जब राख के महीन कण हजारों किलोमीटर दूर तक पहुंचे, तब पता चला कि तेज ऊंचाई वाली हवाएं इन्हें पूरी दुनिया में फैला सकती हैं। इस घटना ने यह भी दिखाया कि पृथ्वी का मौसम और पर्यावरण आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं। बाद में इसी सोच ने ग्लोबल क्लाइमेट और एनवायरनमेंट पर होने वाले इम्पैक्ट को समझने के लिए बस तैयार किया।

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