वेटिंग टिकट लेकर ट्रेन में चढ़ने से पहले जान लें ये नियम, वरना लग सकता है जुर्माना!

वेटिंग-लिस्ट टिकट देखकर सीधे ट्रेन में चढ़ जाना सही नहीं होता। टिकट ऑनलाइन बुक किया गया है या काउंटर से लिया गया है, उसका स्टेटस क्या है और किस कोच में ट्रैवल करना चाहते हैं, इन बातों से नियम बदल सकते हैं। रिजर्व कोच में बिना कन्फर्म टिकट ट्रैवल करने पर टीटीई चेकिंग में फाइन या एक्शन हो सकता है। इसलिए वेटिंग टिकट वाले पैसेंजर के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि कब जनरल कोच में ट्रेवलिंग की जा सकती है और कब टिकट वैलिड नहीं माना जाएगा।

अपडेटेड Aug 17, 2026 पर 11:03 AM

कई बार ट्रेन की टिकट बुक करते समय कन्फर्म सीट नहीं मिलती और टिकट वेटिंग लिस्ट में चला जाता है। ऐसे में पैसेंजर के मन में सबसे पहला सवाल यही आता है कि क्या इस टिकट के साथ ट्रेन में ट्रैवल किया जा सकता है। सिर्फ टिकट हाथ में होने से यह तय नहीं होता कि पैसेंजर किसी भी कोच में जाकर बैठ सकता है। टिकट का स्टेटस, टिकट बुक करने का तरीका और जिस कोच में सफर करना है, इन सभी बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है।

वेटिंग टिकट के नियमों में सबसे ज्यादा कन्फ्यूजन रिजर्व्ड और जनरल कोच को लेकर होता है। रिजर्व्ड कोच में सफर करने के लिए कन्फर्म रिजर्वेशन जरूरी होता है, जबकि कुछ सिचुएशन में वेटिंग टिकट के साथ जनरल या अनरिजर्व्ड कोच में ट्रेवलिंग की जा सकती है। इसलिए ट्रेन में चढ़ने से पहले यह समझना जरूरी है कि आपका टिकट ट्रैवल के लिए वैलिड है या नहीं और आपको किस कोच में सफर करना चाहिए। इससे रास्ते में TTE की चेकिंग में होने वाली परेशानी और जुर्माने से भी बचा जा सकता है।

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वेटिंग-लिस्ट टिकट

वेटिंग-लिस्ट टिकट का मतलब है कि आपको अभी रिजर्व कोच में कोई कन्फर्म सीट या बर्थ नहीं मिली है। इसलिए सिर्फ वेटिंग टिकट के बेस पर AC या स्लीपर कोच की सीट पर नहीं बैठ सकते है। यदि टिकट कन्फर्म नहीं हुआ है, तो रिजर्व सीट पर ट्रैवल करने का अधिकार नहीं मिलता।

 

 

काउंटर टिकट रूल

रेलवे रिजर्वेशन काउंटर से लिया गया कुछ वेटिंग-लिस्ट टिकट अगर कन्फर्म नहीं होता, तो लागू नियमों के तहत उससे जनरल या अनरिजर्व्ड कोच में ट्रैवल किया जा सकता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि स्लीपर या AC कोच में सीट मिल जाएगी। जनरल कोच में भी ट्रैवल करते समय टिकट के बाकी नियमों का पालन करना जरूरी है।

 

 

ऑनलाइन टिकट 

ऑनलाइन बुक किए गए ई-टिकट में अगर चार्ट तैयार होने के बाद भी सभी पैसेंजर का टिकट पूरी तरह वेटिंग लिस्ट में रहता है, तो टिकट अपने-आप कैंसिल हो जाता है। ऐसे टिकट पर ट्रेन में ट्रैवल करने की परमिशन नहीं होती। इसलिए ट्रेन चलने से पहले ई-टिकट का फाइनल स्टेटस जरूर देख लेना चाहिए।

 

 

ट्रैवल से पहले स्टेटस चेक

ट्रेन पकड़ने से पहले टिकट का स्टेटस चेक करना सबसे जरूरी है। यदि टिकट कन्फर्म है, तो आपको टिकट पर दी गई सीट या बर्थ के हिसाब से ट्रैवल करने का अधिकार मिलता है। वहीं पूरी तरह वेटलिस्टेड ई-टिकट रिजर्वेशन चार्ट बनने के बाद ट्रैवल के लिए मान्य नहीं रहता। इसलिए सिर्फ टिकट बुक हो जाने से ट्रैवल की परमिशन मिल गई है, ऐसा मानना सही नहीं है।

 

 

TTE एक्शन

यदि कोई पैसेंजर बिना कन्फर्म रिजर्वेशन के रिजर्व कोच में ट्रैवल करता हुआ पकड़ा जाता है, तो TTE उससे टिकट के बारे में पूछताछ कर सकता है। मामले और लागू नियमों के अनुसार पैसेंजर से जुर्माना लिया जा सकता है या उसे रिजर्व कोच से उतरने के लिए कहा जा सकता है। इसलिए वेटिंग टिकट को कन्फर्म टिकट समझकर रिजर्व डिब्बे में चढ़ने से बचना चाहिए।

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