एक पहाड़ी पर इतने मंदिर कि गिनते-गिनते थक जाएंगे, फिर भी शाम होते ही खाली हो जाती है ये पहाड़ी!

भारत में एक ऐसा अनोखा पर्वत भी है, जहां एक-दो नहीं बल्कि 900 से ज्यादा मंदिर मौजूद हैं। दिन के उजाले में यह जगह श्रद्धालुओं और टूरिस्ट को अपनी ओर खींचती है, लेकिन सूर्यास्त के बाद यहां का माहौल बिल्कुल बदल जाता है। आखिर ऐसा क्या है इस रहस्यमयी पर्वत में, जहां रात होते ही इंसानों की आवाजाही पर रोक लग जाती है। इस अनोखी जगह की कहानी बहुत ही दिलचस्प है।

अपडेटेड Aug 17, 2026 पर 10:11 AM

पहाड़ों की हरी-भरी वादियां, ठंडी हवा, ऊंचे पेड़ और खूबसूरत नजारे मन को बहुत लुभाते हैं। भारत में ऐसी कई जगहें हैं, जहां नेचर के बीच घूमने का अलग ही मजा मिलता है। लेकिन कुछ पहाड़ ऐसे भी हैं, जो अनोखी खासियतों के साथ लोगों का ध्यान खींचते हैं।

ऐसे ही एक खास पर्वत पर आपको एक-दो नहीं, बल्कि करीब 900 मंदिर देखने को मिलते हैं। यहां दिन के समय श्रद्धालुओं और टूरिस्ट का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन जैसे ही सूरज ढलता है, माहौल बिल्कुल बदल जाता है। रात में यहां इंसानों के जाने पर रोक रहती है। इसके पीछे की वजह और मान्यता बहुत ही अनोखी है।


pahad2

मंदिरों का विशाल संसार

गुजरात के भावनगर से करीब 51 किलोमीटर दूर पालीताना शहर शत्रुंजय पहाड़ी की तलहटी में बसा है। यह जगह जैन धर्म के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में गिनी जाती है। पहाड़ी पर 900 से ज्यादा छोटे-बड़े मंदिर बने हुए हैं। मंदिरों की खूबसूरत नक्काशी और धार्मिक माहौल इस जगह को बेहद खास बनाते हैं। एक ही पहाड़ी पर इतने सारे मंदिर होना इसे भारत की अनोखी जगहों में शामिल करता है।

कठिन चढ़ाई का सफर

शत्रुंजय पहाड़ी पर बने मंदिरों तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को करीब 3750 से ज्यादा पत्थर की सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। चढ़ाई काफी कठिन है, लेकिन भक्त आस्था के साथ यह सफर पूरा करते हैं। रास्ते में बने मंदिर और पहाड़ी से दिखाई देने वाले खूबसूरत नजारे इस यात्रा को खास बना देते हैं।

आदिनाथ से जुड़ी आस्था

शत्रुंजय पहाड़ी का जैन धर्म में बहुत गहरा धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि भगवान आदिनाथ यानी ऋषभदेव ने इसी पहाड़ी पर रायन पेड़ के नीचे ध्यान और तपस्या की थी। यहां भगवान आदिनाथ का मंदिर भी मौजूद है। कार्तिक पूर्णिमा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

मंदिर के साथ मजार भी

शत्रुंजय पहाड़ी पर जैन मंदिरों के अलावा मुस्लिम संत अंगार पीर की मजार भी मौजूद है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, शत्रुंजय पर्वत की रक्षा से जुड़ी आस्था के कारण मुस्लिम समुदाय के लोग भी यहां आकर मजार पर मत्था टेकते हैं। यह जगह अलग-अलग आस्थाओं के मेल की खास मिसाल भी मानी जाती है।

रात में सन्नाटा

शत्रुंजय पहाड़ी की सबसे खास बात यहां की पुरानी परंपरा है। सूर्यास्त के बाद पहाड़ी पर किसी को भी रुकने की अनुमति नहीं होती। शाम होते ही पुजारी, श्रद्धालु और टूरिस्ट सभी नीचे आ जाते हैं और पूरी पहाड़ी सन्नाटे में डूब जाती है। मान्यता है कि सूर्यास्त के बाद देवता यहां विश्राम करने आते हैं, इसलिए रात में इंसानों के रुकने की मनाही है। सुबह होते ही पहाड़ी फिर से श्रद्धालुओं की आवाजाही से गुलजार हो जाती है।

यदि आपको कभी मौका मिले, तो इस अनोखी मंदिरों वाली पहाड़ी की यात्रा जरूर करें। यहां 900 से ज्यादा मंदिरों को करीब से देखने के साथ-साथ शत्रुंजय पहाड़ी की धार्मिक मान्यताओं और शांत माहौल को महसूस करने का एक्सपीरियंस भी बेहद खास रहेगा।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।