भारत में कई ऐसे जादुई हिल स्टेशन हैं, जहां बादल आसमान में रहने के बजाय सीधे सड़कों, घरों और घाटियों के बीच तैरते हैं। आप बादलों के बीच चलने का यूनिक एक्सपीरियंस इन सिटीज में कर सकते हैं। आइये जानते है बादलों के तैरने और जमीन पर उतरने वाले भारत के कुछ शहरों और टूरिस्ट स्पॉट्स के बारे में कुछ खास बातें:
दक्षिण भारत का यह पॉपुलर हिल स्टेशन 'प्रिंसेस ऑफ हिल स्टेशंस' कहलाता है। यहां के 'कोकर्स वॉक' पर आप बादलों के बीच चल सकते हैं। यहां के जंगलों और झीलों के रास्तों पर सफेद धुंध का अहसास होता है, घुमावदार पहाड़ी रास्तों से गुजरते हुए कोडाइकनाल पहुंचने का सफर भी उतना ही मनमोहक होता है, जितना वहां बादलों और धुंध से घिरे नेचुरल सीन का एक्सपीरियंस। दक्षिण भारत के पॉपुलर हिल स्टेशन कोडाइकनाल के लिए दिल्ली से मदुरै या कोयंबटूर तक फ्लाइट लेकर रोड से पहुंचा जाता है
बेंगलुरु से लगभग 60 किमी दूर स्थित, नंदी हिल्स अपने 'क्लाउड इनवर्जन' के लिए बेहद पॉपुलर है। यहां सुबह के समय आसमान साफ होता है लेकिन आप बादलों की एक सफेद चादर को अपने पैरों के नीचे घाटी में तैरते हुए देख सकते हैं, नंदी हिल्स पहुंचने के लिए दिल्ली से बेंगलुरु की फ्लाइट लेकर वहां से लगभग 60 किलोमीटर की टैक्सी से राइड करनी होती है
'स्कॉटलैंड ऑफ द ईस्ट' के नाम से मशहूर शिलांग का अर्थ ही 'बादलों का घर' है। ऊंचे पठार पर स्थित होने के कारण यहां के रास्ते और देवदार के जंगल बादलों और धुंध से अक्सर ढके रहते हैं, शिलांग जाने के लिए दिल्ली से शिलांग या गुवाहाटी तक फ्लाइट लेना है, जिसके बाद बस या टैक्सी से आगे की जर्नी की जा सकती है। शिलांग मानसून के दौरान बादलों और धुंध के अद्भुत नजारों के लिए विशेष रूप से पॉपुलर हैं।
दार्जिलिंग (पश्चिम बंगाल)
पूर्वी हिमालय की गोद में बसा यह शहर अपने बदलते हुए मौसम के लिए जाना जाता है। यहां कंचनजंगा के नजारों के बीच, सड़क पर बादलों को तैरते हुए और हवा में घुलते हुए देखने का अनुभव बेहद खूबसूरत होता है, रास्ते में दिखाई देने वाले चाय बागान, घुमावदार पहाड़ी सड़कें और बादलों से ढकी वादियां इस जर्नी को और भी यादगार बना देती हैं। दार्जिलिंग पहुंचने के लिए दिल्ली से बागडोगरा तक हवाई यात्रा या न्यू जलपाईगुड़ी तक ट्रेन लेकर आगे टैक्सी से जाया जा सकता है।
अपनी चाय की हरी-भरी बागानों और रोलिंग घास के मैदानों के लिए मशहूर मुन्नार में बादलों के तैरने का नज़ारा बारिश के दिनों में बहुत ही अद्भुत होता है। चाय के बागानों के बीच कम ऊंचाई पर तैरते बादल इसे किसी पारी की कहानी जैसा एक्सपीरियंस देते हैं, मुन्नार जाने के लिए दिल्ली से कोच्चि की फ्लाइट सबसे अच्छा ऑप्शन है, जहां से लगभग 4–5 घंटे की रोड जर्नी करनी पड़ती है।
'क्वीन ऑफ द हिल्स' के नाम से मशहूर मसूरी में दून घाटी से उठते हुए बादल सीधे सड़कों और मॉल रोड पर तैरने लगते हैं। मॉनसून के मौसम में यहां का 'क्लाउड एंड' पॉइंट बादलों से घिरा रहता है, मसूरी दिल्ली के सबसे नजदीक स्थित है और यहां बस, कार, ट्रेन या देहरादून तक फ्लाइट लेकर आसानी से पहुंचा जा सकता है। यदि कम समय और बजट में बादलों के बीच घूमने का अनुभव लेना हो तो मसूरी सबसे कनविनिएंट ऑप्शन है
अगर आप भी बादलों को सिर्फ आसमान में नहीं, बल्कि अपने आसपास सड़कों, पहाड़ियों और घाटियों में तैरते हुए देखना चाहते हैं, तो भारत के ये शहर एक अनोखा एक्सपीरियंस देते हैं। ये सभी जगहें नेचर के ऐसे अद्भुत नजारों से भरपूर हैं, जहां बादल धरती के बेहद करीब महसूस होते हैं। खासकर मानसून में इन जगहों की खूबसूरती अपने चरम पर होती है, जो ट्रैवलर को किसी सपनों की दुनिया जैसा एहसास कराती है