सैलरी डे आमतौर पर नौकरीपेशा लोगों के लिए राहत और नई शुरुआत का दिन होता है। लेकिन एक 25 वर्षीय कर्मचारी के लिए हर महीने की सैलरी आते ही खर्चों की लंबी लिस्ट उसका इंतजार करती है। Reddit पर शेयर की गई पोस्ट के मुताबिक, इस शख्स की मासिक आय 1 लाख रुपये है, लेकिन महीने की शुरुआत में ही बड़ी रकम तय खर्चों में चली जाती है।
Reddit के r/Frugal_Ind पर यूजर ने बताया कि उसे हर महीने 25,000 रुपये कार EMI, 25,000 रुपये किराया और 6,000 रुपये इंश्योरेंस प्रीमियम देना पड़ता है। यानी सैलरी का 56 फीसदी हिस्सा महीने के शुरुआती दिनों में ही निकल जाता है।
खाने-पीने और पेट्रोल का खर्च जोड़ें तो बचता है कितना?
बड़ी EMI और किराए के बाद रोजमर्रा के खर्च भी कम नहीं हैं। पोस्ट के अनुसार, खाने पर करीब 10,000 रुपये, पेट्रोल पर 5,000 रुपये और यूटिलिटी बिल पर कम से कम 3,000 रुपये खर्च होते हैं।इन सभी खर्चों के बाद कर्मचारी के पास महीने के अंत तक करीब 20,000 रुपये बचते हैं। छह महीने में उसने लगभग 1.20 लाख रुपये बचाए हैं। लेकिन इतनी बचत के बावजूद उसे लगता है कि दिनभर काम करने के मुकाबले आर्थिक फायदा काफी कम नजर आ रहा है।
10 घंटे की नौकरी और वीकेंड पर भी काम, फिर भी तनाव
Reddit पोस्ट में कर्मचारी ने बताया कि वह रोज करीब 10 घंटे काम करता है और कई बार वीकेंड पर भी काम करना पड़ता है। छुट्टी लेने की कोशिश करने पर कंपनी की ओर से मंजूरी नहीं मिलती। उसकी चिंता सिर्फ अपनी आर्थिक स्थिति तक सीमित नहीं है। पिता पर करीब 8 लाख रुपये का कर्ज है, जिसे चुकाने में वह मदद करना चाहता है। हालांकि, खुद की सीमित बचत के कारण फिलहाल वह परिवार के इस कर्ज में ज्यादा योगदान नहीं कर पा रहा।
कार EMI पर सबसे ज्यादा सवाल क्यों उठे?
पोस्ट वायरल होने के बाद Reddit यूजर्स ने अलग-अलग नजरिए से प्रतिक्रिया दी। सबसे ज्यादा चर्चा 25,000 रुपये की कार EMI को लेकर हुई। कुछ लोगों ने सवाल किया कि 1 लाख रुपये की आय में एक चौथाई रकम सिर्फ कार की EMI पर खर्च करना कितना व्यावहारिक है।
कुछ यूजर्स ने यह भी कहा कि अगर कार का मासिक खर्च कम होता तो कर्मचारी के पास बचत और परिवार के कर्ज में मदद के लिए ज्यादा रकम बच सकती थी।
हर प्रतिक्रिया आलोचनात्मक नहीं थी। कुछ यूजर्स ने कर्मचारी को उसकी कम उम्र और 1 लाख रुपये मासिक आय को देखते हुए सकारात्मक नजरिया रखने की सलाह दी। उनका कहना था कि समय के साथ सैलरी बढ़ सकती है और बेहतर नौकरी मिलने पर बचत भी बढ़ेगी। कर्मचारी ने अपने हिसाब से आगे का लक्ष्य भी बताया है। अगर वह हर साल करीब 2 लाख रुपये बचाता रहा तो अगले पांच साल में पिता के कर्ज को चुकाने में मदद कर सकता है। यही सोच उसके लिए उम्मीद भी है और मौजूदा आर्थिक दबाव की याद भी।
(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।)