पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए चुना ऐसा काम, जिसे सुनकर किसी की भी रूह कांप जाए

आज जहां युवा कैफे और मॉल में पार्ट-टाइम जॉब करते हैं, वहीं 17 साल की सुलांद्री कोत्ज़े ने एक अनोखा रास्ता चुना। पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए उसने कब्रिस्तान की पुरानी कब्रों की सफाई और देखभाल का काम शुरू किया। ये फैसला उसकी मेहनत और हिम्मत की मिसाल बन गया

अपडेटेड May 19, 2026 पर 9:56 AM
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करीब दो साल पहले सुलांद्री ने देखा कि आसपास के कब्रिस्तान बहुत खराब हालत में हैं।

आज के समय में जब ज्यादातर युवा अपनी पढ़ाई और खर्च चलाने के लिए पार्ट-टाइम जॉब जैसे कैफे, मॉल या रेस्टोरेंट का सहारा लेते हैं, वहीं साउथ अफ्रीका की 17 साल की सुलांद्री कोत्जे ने एक बिल्कुल अलग और हैरान करने वाला रास्ता चुना। उसने अपनी नर्सिंग की पढ़ाई का सपना पूरा करने के लिए ऐसा काम शुरू किया, जिसके बारे में सुनकर कोई भी सोच में पड़ जाए। पढ़ाई का खर्च उठाने और माता-पिता पर बोझ कम करने के लिए उसने कब्रिस्तान में पुरानी और लावारिस कब्रों की सफाई और देखभाल का काम शुरू किया।

ये शुरुआत भले ही छोटे स्तर पर हुई थी, लेकिन धीरे-धीरे ये उसका फुल-टाइम काम बन गया। जहां लोग ऐसे स्थानों से दूरी बनाते हैं, वहीं उसने इसे जिम्मेदारी और सेवा का काम मानकर अपनाया। उसकी ये कहानी मेहनत, सोच और हिम्मत का एक अनोखा उदाहरण बन गई है।

कब्रिस्तान में मिला कमाई का अनोखा रास्ता


सुलांद्री ने यूनिवर्सिटी की फीस जुटाने के लिए कब्रिस्तान में पुरानी और लावारिस कब्रों की सफाई और मरम्मत का काम शुरू किया। यह काम धीरे-धीरे उसका फुल-टाइम बिजनेस बन गया। वह चाहती थी कि अपनी पढ़ाई का खर्च खुद उठाए और माता-पिता पर बोझ न बने।

लावारिस कब्रों की हालत देखकर आया आइडिया

करीब दो साल पहले सुलांद्री ने देखा कि आसपास के कब्रिस्तान बहुत खराब हालत में हैं। घास-फूस, गंदगी और टूट-फूट के कारण कब्रों पर लिखे नाम तक पढ़ना मुश्किल हो जाता था। इसी दृश्य ने उसके मन में ये सोच पैदा की कि जिन लोगों का निधन हो चुका है, उनकी अंतिम जगह को सम्मान और साफ-सुथरा रखा जाना चाहिए।

फेसबुक से मिला पहला बड़ा मौका

सुलांद्री के माता-पिता ने उसके इस विचार को आगे बढ़ाते हुए फेसबुक पर इस सेवा का विज्ञापन दिया। किस्मत ने साथ दिया और सिर्फ एक महीने के अंदर ही उन्हें पांच बड़े ऑर्डर मिल गए। इसके बाद ये छोटा सा आइडिया एक सफल बिजनेस में बदलने लगा।

अब 75 कब्रों की नियमित देखभाल

आज सुलांद्री करीब 75 कब्रों की देखरेख करती है, जिनकी महीने में दो बार सफाई की जाती है। इसके अलावा कई ग्राहक कब्रों पर नया सीमेंट, कंकड़ और सजावट भी करवाते हैं। फीस कब्र के आकार और उसकी स्थिति के अनुसार तय होती है।

पूरा परिवार बन गया बिजनेस का हिस्सा

यह काम अब सिर्फ सुलांद्री का नहीं बल्कि पूरे परिवार का बन चुका है। उसके पिता डिर्क इस बिजनेस को मैनेज करते हैं और जरूरी सामान लाते हैं, जबकि मां एंड्री हिसाब-किताब संभालती हैं। दादी और उसका बॉयफ्रेंड भी वीकेंड पर मदद करते हैं।

सम्मान और सेवा की मिसाल बनी कहानी

सुलांद्री का ये अनोखा काम न सिर्फ उसकी पढ़ाई का सहारा बना, बल्कि उन परिवारों के लिए भी राहत है जो अपने प्रियजनों की कब्रों से दूर रहते हैं। उसका यह बिजनेस अब सेवा, सम्मान और मेहनत की एक प्रेरणादायक मिसाल बन चुका है।

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