गंगा में मछुआरों को मिला 2 क्विंटल का शिवलिंग! काशी में डेढ़ दर्जन ने मिलकर निकाला, इसके बारे में अबतक क्या-क्या पता चला?

वाराणसी में गंगा नदी की तलहटी से एक विशाल शिवलिंग मिलने का दावा चर्चा का विषय बन गया है। बताया जा रहा है कि मछली पकड़ने के दौरान नाविकों को यह प्राचीन शिवलिंग मिला। करीब 200 किलो वजनी इस शिवलिंग का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है

अपडेटेड Jun 09, 2026 पर 12:41 PM
काशी को सदियों से भगवान शिव की नगरी कहा जाता है।

काशी की पवित्र धरती से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने आस्था और इतिहास दोनों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। गंगा नदी की तलहटी से एक विशाल शिवलिंग मिलने का दावा किया जा रहा है, जिसे स्थानीय नाविकों ने मछली पकड़ने के दौरान खोजा। बताया जा रहा है कि यह शिवलिंग करीब 200 किलोग्राम वजनी है और इसकी बनावट काफी प्राचीन दिखाई देती है। जैसे ही इसका वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया, लोगों के बीच इसे लेकर जिज्ञासा बढ़ गई। कोई इसे चमत्कार बता रहा है तो कोई इतिहास से जुड़ी अहम खोज मान रहा है।

विशेषज्ञों के शुरुआती अनुमान के अनुसार यह शिवलिंग हजारों साल पुराना हो सकता है। फिलहाल इसकी तस्वीरें पुरातत्व विभाग को सौंप दी गई हैं और लोग इसकी वास्तविक कहानी जानने का इंतजार कर रहे हैं।

मछली पकड़ते समय मिला अनोखा अवशेष


जानकारी के अनुसार, रामनगर थाना क्षेत्र के सुजाबाद इलाके में कुछ नाविक दो दिन पहले गंगा नदी में मछली पकड़ने गए थे। इसी दौरान उनके जाल में कोई भारी वस्तु फंस गई। शुरुआत में उन्हें लगा कि यह कोई बड़ा पत्थर होगा, लेकिन जब उन्होंने गहराई में जाकर देखा तो वहां एक विशाल शिवलिंग दिखाई दिया।

डेढ़ दर्जन नाविकों ने मिलकर निकाला बाहर

बताया जा रहा है कि शिवलिंग का वजन करीब दो कुंतल यानी लगभग 200 किलोग्राम है। इसे बाहर निकालना आसान नहीं था। करीब डेढ़ दर्जन नाविकों ने मिलकर काफी मेहनत की, तब जाकर इस भारी शिवलिंग को गंगा की तलहटी से निकालकर सुरक्षित किनारे तक पहुंचाया गया।

काले पत्थर से बना है विशाल शिवलिंग

गंगा से निकला यह शिवलिंग काले पत्थर का बना हुआ बताया जा रहा है। इसकी बनावट और आकार को देखकर लोग हैरान हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इतने बड़े आकार का शिवलिंग गंगा की तलहटी में मिलना अपने आप में बेहद अनोखी घटना है।

2500 साल पुराना हो सकता है शिवलिंग

विशेषज्ञों के शुरुआती अनुमान के अनुसार यह शिवलिंग करीब 2500 वर्ष पुराना हो सकता है। हालांकि इसकी वास्तविक आयु और ऐतिहासिक महत्व की पुष्टि विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगी। इसी कारण इसकी तस्वीरें और संबंधित जानकारी पुरातत्व विभाग को भी सौंप दी गई हैं, ताकि विशेषज्ञ इसकी गहन जांच कर सकें।

आस्था और इतिहास के बीच चर्चा

काशी को सदियों से भगवान शिव की नगरी कहा जाता है। ऐसे में गंगा नदी की तलहटी से विशाल शिवलिंग का मिलना लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। कुछ लोग इसे आस्था से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि इतिहास और पुरातत्व में रुचि रखने वाले लोग इसके अतीत को जानने के लिए उत्सुक हैं।

जांच के बाद सामने आएंगे कई राज

फिलहाल यह प्राचीन शिवलिंग लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। अब सभी की नजरें पुरातत्व विशेषज्ञों की जांच पर टिकी हैं, जिससे यह पता चल सके कि आखिर यह विशाल शिवलिंग गंगा की तलहटी तक कैसे पहुंचा और इसका इतिहास कितने वर्षों पुराना है।

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