आज अरबों लोगों पर एक साथ पड़ेगी सूरज की रोशनी, जानिए क्या है इसकी वजह

8 जुलाई को धरती पर एक अनोखा खगोलीय नजारा देखने को मिलेगा। पृथ्वी के झुकाव और मौसम की स्थिति के कारण दुनिया की करीब 99 फीसदी आबादी एक ही समय पर दिन की रोशनी या हल्की चमक का अनुभव करेगी। भारत समेत कई देशों में यह दुर्लभ संयोग चर्चा का विषय बना हुआ है

अपडेटेड Jul 08, 2026 पर 12:38 PM
सोशल मीडिया पर दावा किया गया था कि ये घटना सिर्फ 8 जुलाई को होती है

8 जुलाई को दुनिया एक अनोखी खगोलीय घटना की गवाह बनने जा रही है। पृथ्वी के झुकाव और गर्मियों के मौसम की वजह से एक ऐसा समय आएगा, जब दुनिया की करीब 99 फीसदी आबादी एक साथ दिन के उजाले या हल्की रोशनी का अनुभव करेगी। भारत समेत एशिया के ज्यादातर हिस्सों में इस दौरान सूरज की रोशनी मौजूद रहेगी। करीब 11:10 GMT पर होने वाली इस घटना में दुनिया के लगभग 8.2 अरब लोगों पर सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से दिन का असर दिखाई देगा।

भारत के समय के अनुसार ये समय शाम 4:40 के आसपास पड़ेगा, जब देश के कई हिस्सों में सूर्यास्त के करीब का समय होगा। हालांकि यह कोई असामान्य दिन नहीं, बल्कि पृथ्वी की स्थिति और सूर्य के चारों ओर उसकी गति से जुड़ा एक दुर्लभ खगोलीय संयोग है।

कौन-कौन से हिस्से रहेंगे रोशनी में?


इस दौरान उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका और एशिया के ज्यादातर हिस्सों में दिन का उजाला रहेगा। दुनिया की लगभग पूरी आबादी इन्हीं महाद्वीपों में रहती है वहीं, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ हिस्से, अंटार्कटिका और आसपास के समुद्री क्षेत्र रात के अंधेरे में होंगे।

क्या सिर्फ 8 जुलाई को ही होता है ऐसा?

सोशल मीडिया पर दावा किया गया था कि ये घटना सिर्फ 8 जुलाई को होती है, लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, उत्तरी गोलार्ध की गर्मियों के दौरान करीब 60 दिनों तक (लगभग 18 मई से 17 जुलाई तक) हर दिन एक ऐसा छोटा समय आता है, जब दुनिया की लगभग पूरी आबादी दिन या उजाले की स्थिति में होती है।

हालांकि, 8 जुलाई के आसपास यह प्रभाव सबसे ज्यादा दिखाई देता है, इसलिए यह तारीख ज्यादा चर्चा में आई।

उस समय कितने लोग होंगे दिन और रात में?

जब धरती पर सबसे ज्यादा लोग सूरज की रोशनी का अनुभव करेंगे:

  • करीब 9 अरब लोग (83%) पूरी तरह दिन के उजाले में होंगे।
  • लगभग 1 करोड़ लोग (7%) सिविल ट्वाइलाइट यानी हल्की रोशनी वाले समय में होंगे।
  • करीब 8 करोड़ लोग (6%) नौटिकल ट्वाइलाइट में होंगे।
  • लगभग 9 करोड़ लोग (3%) एस्ट्रोनॉमिकल ट्वाइलाइट में होंगे।
  • सिर्फ 3 करोड़ लोग (1%) पूरी तरह रात के अंधेरे में होंगे।

जून सॉल्स्टिस के दिन क्यों नहीं होता सबसे बड़ा असर?

आमतौर पर माना जाता है कि जून सॉल्स्टिस (जब उत्तरी गोलार्ध में सबसे लंबा दिन होता है) के समय यह घटना सबसे ज्यादा होगी। लेकिन इसके बाद सूरज की स्थिति धीरे-धीरे दक्षिण की ओर खिसकती है। इस बदलाव से उत्तरी ध्रुव के कुछ इलाकों में दिन की रोशनी थोड़ी कम होती है, लेकिन इंडोनेशिया और फिलीपींस जैसे ज्यादा आबादी वाले इलाकों में रोशनी का समय बढ़ जाता है। यही वजह है कि 8 जुलाई के आसपास दिन या उजाले का अनुभव करने वाले लोगों की संख्या सॉल्स्टिस के मुकाबले करीब 1 करोड़ ज्यादा हो जाती है।

धरती की स्थिति दिखाएगी इंसानों को एक साथ जोड़ने वाला नजारा

यह घटना याद दिलाती है कि पृथ्वी पर रहने वाले अरबों लोग एक ही समय में सूर्य की रोशनी से जुड़े हुए हैं। कुछ सेकंड या मिनटों का यह खगोलीय संयोग दुनिया की विशाल आबादी को एक साथ दिन के उजाले से जोड़ देगा।

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