Ahmedabad Bank Theft News: गुजरात के अहमदाबाद में एक पब्लिक सेक्टर बैंक के कर्मचारी को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के करेंसी चेस्ट (खजाने) से 8.7 करोड़ रुपये चोरी कर उन्हें संपत्तियों और क्रिप्टो करंसी में निवेश कर मनी लॉन्ड्रिंग करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (D-डिवीजन) हितेंद्र चौधरी ने बताया कि पुलिस ने एक खुफिया सूचना मिलने पर आरोपी हर्षिद्ध कडियार को शुक्रवार को सोला क्षेत्र से गिरफ्तार किया।
उन्होंने कहा कि आरोपी बैंक ऑफ बड़ौदा में जूनियर कस्टोडियन के पद पर कार्यरत था। उसने 13 जनवरी को करोड़ों रुपये की चोरी को अंजाम दिया था। अब ₹8.70 करोड़ चोरी का करीब 4 महीने बाद खुलासा हुआ है।
उन्होंने बताया कि कडियार को 27 मई तक पुलिस हिरासत में भेजा गया है। अधिकारी ने कहा कि आरोपी कालूपुर क्षेत्र स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा की गांधी रोड ब्रांच में जूनियर जॉइंट कस्टोडियन था, जहां आरबीआई का करेंसी चेस्ट मौजूद है। पुलिस के मुताबिक, कडियार ने दो संविदा श्रमिकों के साथ मिलकर इस्तेमाल किए गए लोहे के बक्सों को बाहर ले जाने के बहाने कैश की तस्करी की। हालांकि, उन बक्सों में कथित तौर पर 8.7 करोड़ रुपये थे।
चौधरी ने बताया कि आरोपी ने संदेह से बचने के लिए 20 अप्रैल तक नियमित रूप से बैंक में काम करना जारी रखा क्योंकि उसे लगा कि चोरी की घटना से संबंधित CCTV फुटेज 90 दिन बाद स्वतः डिलीट हो जाएगी। बाद में वह अचानक गायब हो गया और लंबी छुट्टी पर चला गया। उन्होंने कहा कि आरबीआई के इंस्पेक्शन से पहले नियमित सत्यापन के दौरान करेंसी चेस्ट के नए प्रभारी को नोटों की कमी का पता चला, जिसके बाद चोरी का मामला सामने आया।
चौधरी ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताया कि 15 मई को कालूपुर थाने में FIR दर्ज की गई। पुलिस ने जिस जगह से आरोपी को गिरफ्तार किया, वहां खड़ी एक कार की डिक्की से 2.2 करोड़ रुपये नकद बरामद किए। अधिकारी के अनुसार, पूछताछ के दौरान कडियार ने स्वीकार किया कि उसने चोरी की रकम का एक हिस्सा चांदखेड़ा में मकान, एक कमर्शियल गाड़ी और अहमदाबाद में एक दुकान खरीदने में लगाया।
उसने अपनी एक महिला सहकर्मी को मकान खरीदने के लिए 23 लाख रुपये और अतिरिक्त पांच लाख रुपये कैश भी दिए। पुलिस ने बताया कि आरोपी ने चोरी की रकम का एक हिस्सा क्रिप्टोकरंसी बाजार में भी निवेश किया था।
'इंडिया टुडे' की रिपोर्ट के अनुसार, CCTV फुटेज की जांच से पता चला कि 13 जनवरी को कडियार बैंक से कई बक्से ले जाते हुए दिखा था। उसने अपने सहकर्मियों से कहा था कि उन बक्सों में कचरा भरा है जिसे वह फेंकने जा रहा है। एक सोची-समझी चाल के तहत उसने चोरी के बाद भी 90 दिनों तक बैंक में काम करना जारी रखा। उसे लगा था कि तीन महीने बाद CCTV फुटेज अपने आप ओवरराइट होकर डिलीट हो जाएगा।
जब वह डेडलाइन बीत गई तो कडियार ने बीमारी का बहाना बनाकर काम पर आना बंद कर दिया। उसने 13 अप्रैल को पांच दिन की मेडिकल छुट्टी के लिए अर्जी दी। लेकिन 20 अप्रैल के बाद वह कभी वापस नहीं आया। इसके बाद ब्रांच मैनेजर ने स्थानीय पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके चलते कडियार को तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया।