भारत में शाम होते ही मोहल्लों का माहौल बदल जाता है। बच्चे बाहर खेलते हैं, लोग टहलते हैं, पड़ोसी आपस में बातचीत करते हैं और गलियों में चहल-पहल बढ़ जाती है। लेकिन अमेरिका के एक रिहायशी इलाके का नजारा इससे बिल्कुल अलग दिखा। अमेरिका में रहने वाले एक भारतीय ने शाम करीब 6 बजे अपने आसपास का वीडियो बनाया, जिसमें बड़े-बड़े घर तो नजर आए,लेकिन सड़क पर लोग लगभग गायब दिखे।
अमेरिका में पिछले पांच साल से रह रहे नितिन मल्होत्रा ने इंस्टाग्राम पर यह वीडियो साझा किया है। वह अपने पड़ोस की गलियों में चलते हुए वहां बने आलीशान घरों को दिखाते हैं। उनके मुताबिक, इस इलाके में कई घरों की कीमत करीब 10 लाख डॉलर या उससे भी ज्यादा है। भारतीय मुद्रा में देखें तो यह रकम कई करोड़ रुपये बैठती है।
करोड़ों के घर, लेकिन बाहर कोई नजर नहीं आया
वीडियो में चौड़ी सड़कें, बड़े मकान और उनके सामने बने ड्राइववे दिखाई देते हैं। देखने में पूरा इलाका बेहद व्यवस्थित और शांत नजर आता है। हालांकि, नितिन का ध्यान जिस बात ने सबसे ज्यादा खींचा, वह थी सड़कों पर लोगों की गैरमौजूदगी। वीडियो बनाते हुए वह कहते हैं कि शाम के वक्त भी सड़क पर एक भी व्यक्ति दिखाई नहीं दे रहा। उनका कहना है कि भारत में इसी समय आमतौर पर मोहल्लों में काफी हलचल देखने को मिलती है।
नितिन के मुताबिक, इस इलाके में कुछ घरों की कीमत करीब 5 करोड़, कुछ की 10 करोड़ और कुछ की 15 करोड़ रुपये तक हो सकती है। इसके बावजूद शाम के समय आसपास का माहौल बेहद शांत रहता है।
‘अमेरिका आकर करोगे क्या?’
नितिन ने अपने अनुभव की तुलना भारत की रोजमर्रा की जिंदगी से भी की। उनका कहना है कि भारत में शाम के वक्त लोग अक्सर घरों से बाहर निकलते हैं। बच्चे खेलते हैं, लोग पड़ोसियों से मिलते हैं और आसपास की दुकानों पर भी भीड़ दिखाई देती है। इसके उलट अमेरिकी उपनगरों में लोगों का ज्यादातर समय घर के अंदर या अपनी निजी जिंदगी में गुजर सकता है। नितिन ने बताया कि उन्होंने टेक्सास, कैलिफोर्निया और न्यूयॉर्क के कुछ इलाकों में भी इसी तरह का माहौल देखा है। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि जहां भारतीय या दूसरे प्रवासी समुदाय बड़ी संख्या में रहते हैं, वहां माहौल कुछ अलग हो सकता है।
आखिर अमेरिकी उपनगर इतने शांत क्यों रहते हैं?
वीडियो में दिख रहा इलाका पूरे अमेरिका की तस्वीर नहीं है। यह मुख्य रूप से अमेरिकी उपनगरीय इलाकों की जीवनशैली की एक झलक है। ऐसे कई इलाकों में घर एक-दूसरे से काफी दूरी पर बने होते हैं और रोजमर्रा की जरूरतों की जगहें भी अक्सर पैदल दूरी पर नहीं होतीं। लोग काम,खरीदारी या दूसरी जगहों पर जाने के लिए कार का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में सड़कों पर पैदल चलते या बैठकर बातचीत करते लोग कम दिखाई दे सकते हैं।
किसी को सुकून, किसी को लगा अकेलापन
नितिन के वीडियो पर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी अलग-अलग रहीं। कुछ यूजर्स को खाली और शांत सड़कें बेहद सुकून देने वाली लगीं, जबकि कुछ लोगों को इतना शांत माहौल देखकर अकेलापन महसूस हुआ।
(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।)