Basant Panchami 2026: बसंत पंचमी का पर्व हमारे देश में बहुत उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस दिन मां सरस्वती की पूजा विशेष पूजा की जाती है। पौराणिक मान्यता है कि विद्या, स्वर और कला की देवी मां सरस्वती इसी दिन प्रकट हुई हैं। इसलिए माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मां सरस्वती के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस साल ये पर्व 23 जनवरी को पूरे देश में मनाया जाएगा। इस दिन देश के 5 स्थानों पर स्थित सरस्वती मां के मंदिरों में अलग ही रौनक देखने को मिलेगी। मां सरस्वती के भक्त दुनिया के कोने-कोने से इस दिन यहां पहुंच कर उनका आशीर्वाद लेते हैं। आइए जानें ये मंदिर देश में कहां-कहां स्थित हैं?
माता सरस्वती मंदिर, माणा, उत्तराखंड
बद्रीनाथ से 3 किलोमीटर दूर माणा गांव के पास स्थित है मां सरस्वती का यह प्राचीन मंदिर। इसका उल्लेख वेदों और शास्त्रों में भी मिलता है। मान्यता है कि यह स्थान देवी सरस्वती का जन्मस्थान है। यहां सरस्वती नदी एक धारा के रूप में प्रकट होती है, जिसे 'कलकल' धारा कहा जाता है। कहा जाता है कि इसी स्थान पर महर्षि वेद व्यास ने महाभारत की रचना की थी और पांडवों ने अपनी स्वर्ग यात्रा के दौरान यहां का दौरा किया था। यहां पास में ही भीम शिला नामक एक अनोखी चट्टान भी मौजूद है।
सावित्री देवी मंदिर, पुष्कर (राजस्थान)
राजस्थान के पुष्कर में रत्नागिरी पहाड़ी की चोटी पर स्थित सावित्री देवी मंदिर देश के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है। लगभग 750 फीट की ऊंचाई पर बना यह मंदिर भगवान ब्रह्मा की पत्नियों- सावित्री और गायत्री को समर्पित है। इस मंदिर के अंदर तीन मूर्तियां विराजमान हैं- बीच में देवी सावित्री, दाईं ओर देवी शारदा और बाईं ओर देवी सरस्वती।
कर्नाटक के शृंगेरी में स्थित इस प्राचीन मंदिर की स्थापना 8वीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य जी ने की थी। शुरुआत में यहां चंदन की लकड़ी से बनी शारदाम्बा (सरस्वती) की एक खड़ी प्रतिमा थी। बाद में, 14वीं शताब्दी के दौरान विजयनगर के शासकों और 12वें जगद्गुरु श्री विद्यारण्य ने लकड़ी की मूर्ति की जगह सोने की बैठी हुई प्रतिमा स्थापित की। यह मंदिर दक्षिण भारत में विद्या की देवी का एक प्रमुख केंद्र माना जाता है।
सरस्वती मंदिर, राजस्थान (शारदा पीठ)
यह मंदिर 1959 में बनाया गया था। सफेद संगमरमर से बना यह मंदिर 20वीं सदी की वास्तुकला और इंडो-आर्यन नागर शैली का एक बेहतरीन उदाहरण है। यह मंदिर 70 खंभों पर टिका है और इसका क्षेत्रफल लगभग 25,000 वर्ग फीट है। इस मंदिर का शिखर 110 फीट ऊंचा है, जिस पर सोने की परत चढ़े तांबे के कलश लगे हैं।
कूथनूर महा सरस्वती मंदिर, तमिलनाडु
तमिलनाडु का कूथनूर मंदिर, मां सरस्वती को समर्पित एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल है। लोक कथाओं के अनुसार, भगवान ब्रह्मा और सरस्वती के बीच एक विवाद के कारण उन्हें पृथ्वी पर भाई-बहन के रूप में जन्म लेना पड़ा था। बाद में भगवान शिव ने सरस्वती को गंगा नदी में मिला दिया, जो अब यहां अरसलार नदी के रूप में बहती है। राजा राज चोल ने यह भूमि कवि ओट्टक्कूथन को दान में दी थी, जिसके बाद इस गांव का नाम कूथनूर पड़ा। यहां देवी दुर्गा को गांव की रक्षक देवी के रूप में पूजा जाता है।