अक्सर लोग अपनी नौकरी में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि यह सोचने का समय ही नहीं निकाल पाते कि क्या उनका काम अब भी उन्हें खुशी दे रहा है या नहीं। धीरे-धीरे नौकरी सिर्फ रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन जाती है, जहां डेडलाइन, मीटिंग और प्रमोशन ही सब कुछ तय करने लगते हैं। हाल ही में एक कॉर्पोरेट कर्मचारी ने सोशल मीडिया पर एक ऐसा वीडियो डाला है, जो देखते ही देखते वायरल हो गया। इस 35 वर्षीय कॉर्पोरेट कर्मचारी ने अपनी जिंदगी और भविष्य को लेकर गंभीरता से सोचने का फैसला किया। करीब 10 साल से ज्यादा समय तक कॉर्पोरेट दुनिया में काम करने के बाद उन्होंने नौकरी छोड़ने का बड़ा कदम उठाया।
35 साल के उम्र में रिटायर
बता दें कि, इस व्यक्ति ने अपना अनुभव इंस्टाग्राम पर एक वीडियो के जरिए साझा किया। उनका कहना है कि दो आसान लेकिन गहरे सवालों ने उनकी सोच पूरी तरह बदल दी। इन्हीं सवालों ने उन्हें यह समझने में मदद की कि वह अपने करियर में सही रास्ते पर हैं या नहीं, और आखिरकार उन्होंने कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ने का फैसला कर लिया।
बिस्वजीत मोहंती ने हाल ही में बताया कि 35 साल की उम्र में उन्होंने अपने कॉर्पोरेट करियर को अलविदा कह दिया है। उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर करते हुए कहा, “आज कॉर्पोरेट दुनिया में मेरा आखिरी दिन है। पीछे मुड़कर देखता हूं तो 12 साल की स्कूली पढ़ाई, 4 साल की ग्रेजुएशन और एजुकेशन लोन लेकर की गई 2 साल की पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई याद आती है। इसके बाद 11 साल नौकरी में काम किया और फिर 3 महीने का नोटिस पीरियड पूरा किया। अब आखिरकार मेरे कॉर्पोरेट करियर का अंत हो गया है।” उन्होंने आगे कहा कि करीब 3 साल पहले ही उन्हें एहसास हो गया था कि वह रिटायरमेंट तक इस तरह की नौकरी नहीं करना चाहते। इसके बाद उन्होंने अपनी जिंदगी और करियर को लेकर बड़ा फैसला लेने का मन बना लिया।
काम करते हुए सामने आए ये सवाल
उन्होंने बताया कि नौकरी छोड़ने का फैसला अचानक नहीं लिया गया था। काम करते-करते धीरे-धीरे उनके मन में यह सवाल उठने लगा कि क्या वह सच में वही काम करना चाहते हैं। उनकी जिंदगी में बड़ा बदलाव तब आया, जब उन्होंने खुद से दो अहम सवाल पूछे। पहला सवाल था—अगर पैसों की कोई चिंता न हो और आर्थिक सुरक्षा पहले से तय हो, तो क्या वह फिर भी यही नौकरी करना चाहेंगे? दूसरा सवाल यह था कि अगर उनकी नौकरी खत्म हो जाए, तो क्या दुनिया पर उसका कोई बड़ा असर पड़ेगा?
बिस्वजीत मोहंती ने कहा, “मुझे लगने लगा था कि इस बड़ी कांच की इमारत के अंदर मैं जो काम कर रहा हूं, उसका बाहर की असली दुनिया से कोई खास जुड़ाव नहीं है। इसी सोच ने मुझे पिछले तीन सालों में खुद को बदलने की राह पर ला दिया।” उन्होंने बताया कि इस दौरान उन्हें कई पुरानी आदतें और सोच छोड़नी पड़ीं। उन्होंने अपनी सबसे बड़ी ताकत यानी अपनी “असली पूंजी” को दोबारा पाने पर ध्यान दिया। उनके मुताबिक, इंसान की सबसे बड़ी पूंजी उसकी ऊर्जा और मानसिक संतुलन होता है।
पिछले कुछ वर्षों में बिस्वजीत मोहंती ने अपनी नौकरी और जीवन को नए नजरिए से देखना शुरू किया। उन्होंने सोचना शुरू किया कि आखिर वह अपना समय और ऊर्जा किस काम में लगाना चाहते हैं। उनका कहना है कि अब उन्हें अपने अगले कदम को लेकर काफी हद तक साफ समझ है, हालांकि भविष्य को लेकर थोड़ी अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है। उन्होंने बताया कि नौकरी छोड़ने के फैसले के बाद उन्हें मानसिक शांति महसूस हो रही है। उनके लिए सबसे कठिन बात यह स्वीकार करना था कि वह रिटायरमेंट तक इस कॉर्पोरेट नौकरी में खुद को नहीं देख पा रहे थे।
बिस्वजीत ने कहा, “मेरा आखिरी ईमेल, यानी विदाई संदेश, तैयार है। मैं इसे कुछ घंटों में भेज दूंगा और फिर इस कॉर्पोरेट दुनिया को अलविदा कह दूंगा।” उन्होंने आगे कहा कि इस सफर में उन्हें एक कड़वी लेकिन सच्ची बात समझ आई है—अगर इंसान के पास समय और ऊर्जा ही न हो, तो सिर्फ बैंक बैलेंस खुशी नहीं दे सकता। पैसा सुविधाएं जरूर दे सकता है, लेकिन वह सुकून और रात की अच्छी नींद नहीं दे सकता। बिस्वजीत मोहंती के इस फैसले को सोशल मीडिया पर काफी समर्थन मिला। कई लोगों ने कॉर्पोरेट जिंदगी छोड़ने के उनके फैसले की तारीफ की और कहा कि आज की भागदौड़ भरी नौकरी लोगों को मानसिक रूप से थका देती है।