घर में उगाए गए मसालों की शुद्धता को लेकर ज्यादा चिंता नहीं रहती। बाजार के मसालों की जगह अगर घर में ही कोई ऐसा पौधा हो, जिससे कई मसालों जैसा स्वाद और खुशबू मिले, तो बात ही अलग है। ऑलस्पाइस गमले में आसानी से उगाया जा सकता है। इसे लगाने, मिट्टी तैयार करने और देखभाल के आसान टिप्स है।
पौधा लगाने का सही समय
ऑलस्पाइस का पौधा लगाने के लिए जुलाई से अगस्त का समय अच्छा माना जाता है। इसे फरवरी से मार्च में भी लगाया जा सकता है। इस समय मौसम ठीक रहता है, जिससे पौधे की जड़ें आसानी से मिट्टी में जम जाती हैं। इसे कम से कम 10 इंच के गमले में लगाना बेहतर रहता है।
मिट्टी तैयार करें
ऑलस्पाइस के लिए काली मिट्टी अच्छी रहती है। अगर काली मिट्टी नहीं है तो 50 प्रतिशत बगीचे की मिट्टी लें। इसमें करीब आधा किलो कैल्शियम पाउडर और 250 ग्राम लीफ कंपोस्ट या वर्मी कंपोस्ट मिला सकते हैं। मिट्टी में फंगीसाइड भी मिलाएं। फंगीसाइड न हो तो थोड़ी हल्दी डाल सकते हैं। सभी चीजों को अच्छी तरह मिलाकर गमले में भरें और पौधा लगा दें।
पानी का रखें ध्यान
इस पौधे को बहुत ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती। जब गमले की ऊपर वाली मिट्टी सूखी लगे, तभी पानी दें। गमले में पानी रुकना नहीं चाहिए, इसलिए नीचे ड्रेनेज होल जरूर होने चाहिए। सर्दियों में करीब 7 से 10 दिन में एक बार पानी देना काफी हो सकता है।
खाद और सफाई करें
पौधे की अच्छी ग्रोथ के लिए हर दो महीने में सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मी कंपोस्ट डाल सकते हैं। गमले की मिट्टी को समय-समय पर हल्का ढीला करते रहें और आसपास उगी घास निकालते रहें। इससे पौधे को बढ़ने के लिए अच्छी जगह मिलेगी।
छंटाई और धूप
पौधे को घना और सुंदर बनाने के लिए साल में दो बार हल्की छंटाई करें। मार्च-अप्रैल और जुलाई-अगस्त में इसकी प्रूनिंग की जा सकती है। अगर पत्तियां पीली या झुलसी हुई दिखें, तो पानी और धूप दोनों पर ध्यान दें। बहुत ज्यादा पानी या तेज धूप इसकी वजह हो सकती है। करीब दो साल बाद पौधे को बड़े गमले में शिफ्ट कर सकते हैं।
पत्ते और फल काम के
ऑलस्पाइस की नीचे वाली पत्तियों में अच्छी खुशबू होती है। इन्हें तोड़कर सब्जी में डाल सकते हैं या सुखाकर तेज पत्ते की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं। पौधे में आमतौर पर 4 से 6 साल बाद फल आना शुरू हो सकते हैं। फल पाने के लिए नर और मादा पौधे पास-पास लगाना बेहतर रहता है।
मसाले में इस्तेमाल
ऑलस्पाइस के कच्चे फलों को धूप में सुखाने के बाद साबुत या पीसकर इस्तेमाल किया जा सकता है। इसका इस्तेमाल गरम मसाला, अचार, सब्जी, सूप और बेकरी की चीजों में किया जाता है। इसके फलों का इस्तेमाल परफ्यूम और साबुन में भी होता है। इसके बीजों से नए पौधे भी तैयार किए जा सकते हैं।