बेंगलुरु जैसे बड़े और महंगे शहर में रहकर नौकरी करना आजकल कई लोगों के लिए आसान नहीं रह गया है। बढ़ता हुआ किराया, रोज का ट्रैवल खर्च, बाहर का खाना और लाइफस्टाइल से जुड़े छोटे-छोटे खर्च मिलकर महीने के बजट पर भारी असर डालते हैं। अक्सर लोग समझ ही नहीं पाते कि पैसे कहां खर्च हो रहे हैं और महीने के अंत तक बचत लगभग खत्म हो जाती है। इसी बीच एक युवक ने अपने अनुभव से दिखाया है कि बिना किसी बड़ी कटौती के भी खर्चों को कंट्रोल किया जा सकता है।
