एक लाख रुपये से अधिक की सैलरी के बाद भी वीकेंड पर रैपिडो बाइक चलाता है ये MNC इंजीनियर! वजह भी जान लीजिए

बेंगलुरु में एक Rapido राइड के दौरान हुई बातचीत सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई। दावा किया गया कि बाइक चला रहा व्यक्ति एक मल्टीनेशनल कंपनी में सॉफ्टवेयर डेवलपर है, लेकिन फिर भी वीकेंड पर Rapido चलाता है। इस कहानी ने बढ़ते खर्चों और साइड इनकम को लेकर नई बहस छेड़ दी है

अपडेटेड Jun 09, 2026 पर 2:13 PM
पोस्ट वायरल होने के बाद लोगों ने अलग-अलग राय दी।

आज के दौर में अच्छी नौकरी और मोटी सैलरी को आर्थिक सुरक्षा की निशानी माना जाता है। लेकिन बेंगलुरु से सामने आई एक घटना ने इस सोच पर नई चर्चा छेड़ दी है। एक Rapido राइड के दौरान यात्री की मुलाकात ऐसे ड्राइवर से हुई, जिसने खुद को एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करने वाला सॉफ्टवेयर डेवलपर बताया। दावा किया गया कि अच्छी कमाई के बावजूद वह वीकेंड पर Rapido चलाकर अतिरिक्त आय अर्जित करता है।

यह कहानी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई और लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या बड़े शहरों में बढ़ते खर्चों के कारण अब अच्छी सैलरी भी पर्याप्त नहीं रह गई है। वहीं कुछ लोगों ने इसे अतिरिक्त कमाई नहीं, बल्कि नया अनुभव और लोगों से जुड़ने का तरीका भी बताया।

एक सामान्य राइड से शुरू हुई खास बातचीत


सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक यूजर ने अपना अनुभव साझा किया। उसने बताया कि बेंगलुरु के बैनरघट्टा इलाके की यात्रा के दौरान उसने Rapido बुक की थी। शुरुआत में ड्राइवर ने कन्नड़ में बातचीत की, लेकिन बाद में अंग्रेजी में बात करने लगा। इसी बातचीत के दौरान दोनों के पेशे की चर्चा शुरू हुई।

ड्राइवर की पहचान जानकर रह गया हैरान

यूजर के मुताबिक, जब उसने खुद को सॉफ्टवेयर इंजीनियर बताया तो ड्राइवर ने भी खुलासा किया कि वह एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में सॉफ्टवेयर डेवलपर के रूप में काम करता है। उसने बताया कि उसकी आय छह अंकों में है, लेकिन फिर भी वह सप्ताहांत में Rapido चलाकर अतिरिक्त कमाई करता है।

परिवार की जिम्मेदारियों के लिए अतिरिक्त मेहनत

बताया गया कि ड्राइवर शादीशुदा है और उसका एक छोटा बच्चा भी है। परिवार की जरूरतों और बढ़ते खर्चों को बेहतर तरीके से संभालने के लिए वह वीकेंड पर कुछ घंटे Rapido चलाना पसंद करता है। उसका मानना है कि अतिरिक्त आय भविष्य की आर्थिक सुरक्षा में मदद करती है।

क्या बड़े शहरों में बढ़ गया है खर्च का दबाव?

इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने सवाल उठाना शुरू कर दिया कि क्या अब अच्छी सैलरी पाने वाले प्रोफेशनल्स को भी अतिरिक्त कमाई के रास्ते तलाशने पड़ रहे हैं। कई लोगों का मानना है कि बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में मकान किराया, बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा के खर्च तेजी से बढ़ रहे हैं।

सोशल मीडिया पर मिली मिली-जुली प्रतिक्रियाएं

पोस्ट वायरल होने के बाद लोगों ने अलग-अलग राय दी। कुछ यूजर्स ने कहा कि उन्होंने भी ऐसे आईटी प्रोफेशनल्स को देखा है जो पार्ट-टाइम ड्राइविंग करते हैं। वहीं कुछ लोगों ने इसे लोगों से मिलने-जुलने और नए अनुभव हासिल करने का तरीका बताया।

दूसरी ओर, कुछ यूजर्स ने इस कहानी पर सवाल भी उठाए। उनका कहना था कि ड्राइवर की आय को बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया हो सकता है और पूरी कहानी की सत्यता की पुष्टि नहीं हुई है।

कमाई से ज्यादा चर्चा लाइफस्टाइल की

कई लोगों का मानना है कि आर्थिक दबाव केवल शहर की वजह से नहीं, बल्कि जीवनशैली की वजह से भी बढ़ता है। महंगे अपार्टमेंट, प्राइवेट स्कूल और लग्जरी खर्चों के कारण अच्छी आय भी कम पड़ सकती है। यही वजह है कि कुछ लोग अतिरिक्त कमाई के अवसर तलाशते हैं, जबकि कुछ इसे शौक या अनुभव के तौर पर अपनाते हैं।

एक राइड, कई सवाल

यह घटना सच हो या न हो, लेकिन इसने एक महत्वपूर्ण चर्चा जरूर शुरू कर दी है। क्या आज के समय में सिर्फ एक नौकरी पर्याप्त है? क्या बड़े शहरों में जीवन इतना महंगा हो गया है कि अच्छी सैलरी पाने वाले लोग भी साइड इनकम की तलाश कर रहे हैं? यही सवाल अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बने हुए हैं।

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