कार की सीट पर लगा लेदर आखिर किस जानवर की खाल से बनता है? नाम जानकर यकीन नहीं होगा
कार की चमड़े वाली सीटें और प्रीमियम इंटीरियर हर किसी का ध्यान खींचते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि कार में इस्तेमाल होने वाला यह लेदर आखिर कहां से आता है? अलग-अलग कारों में प्राकृतिक और सिंथेटिक दोनों तरह के मटेरियल इस्तेमाल होते हैं। जानिए कार के लेदर से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें
ऑटोमोबाइल में इस्तेमाल होने वाले लेदर को खास तरीके से तैयार किया जाता है।
कार खरीदते समय ज्यादातर लोग इंजन, माइलेज, कीमत और फीचर्स को सबसे पहले देखते हैं। वहीं कार का इंटीरियर भी गाड़ी के अनुभव को काफी बदल देता है। सीटों से लेकर स्टीयरिंग, डैशबोर्ड और गियर एरिया तक इस्तेमाल होने वाला मटेरियल कार को प्रीमियम लुक देता है। खासतौर पर लेदर सीटों को आराम और लग्जरी से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि कार के अंदर नजर आने वाला यह चमड़ा आखिर तैयार कैसे होता है और इसका स्रोत क्या है? कई लोगों को लगता है कि हर कार में एक जैसा लेदर इस्तेमाल होता है, जबकि ऐसा नहीं है।
कार की कीमत, कंपनी और मॉडल के आधार पर इंटीरियर में अलग-अलग तरह के प्राकृतिक या सिंथेटिक मटेरियल लगाए जा सकते हैं। कुछ लेदर जानवरों की खाल से तैयार किए जाते हैं, तो कुछ आधुनिक विकल्प बिना प्राकृतिक चमड़े के बनाए जाते हैं। ऐसे में कार की चमड़े वाली सीटों के पीछे की कहानी काफी दिलचस्प है।
गाय-बैल की खाल से तैयार होता है कारों का लेदर
कारों में इस्तेमाल होने वाला प्राकृतिक लेदर आमतौर पर गाय और बैल की खाल से बनाया जाता है। यह खाल अक्सर मीट इंडस्ट्री से मिलने वाला बाय-प्रोडक्ट होती है। मांस अलग करने के बाद खाल को टैनिंग की प्रक्रिया से गुजारा जाता है, जिससे वह मजबूत और टिकाऊ लेदर में बदल जाती है। इसके बाद जरूरत के मुताबिक इसे काटकर सीट, डैशबोर्ड, स्टीयरिंग और गियर एरिया में इस्तेमाल किया जाता है।
कार वाला लेदर आम चमड़े से क्यों अलग होता है?
ऑटोमोबाइल में इस्तेमाल होने वाले लेदर को खास तरीके से तैयार किया जाता है। इसे लगातार इस्तेमाल, सफाई, धूप और गर्मी को झेलने लायक बनाया जाता है। इसमें ऐसी ट्रीटमेंट प्रक्रिया अपनाई जाती है, जिससे दाग कम लगें और लंबे समय तक धूप व अल्ट्रावायलेट किरणों के कारण इसकी चमक और गुणवत्ता खराब न हो।
गाय की खाल ही क्यों पसंद की जाती है?
कई कार निर्माता कैटल हाइड को उसकी मजबूती और मोटाई के कारण पसंद करते हैं। ठंडे और उत्तरी इलाकों में पाले गए मवेशियों की खाल कुछ मामलों में ज्यादा मोटी हो सकती है। दिलचस्प बात यह है कि खाल की बाहरी सतह पर छोटे-मोटे निशान होने के बावजूद उसका अंदरूनी हिस्सा अच्छी क्वालिटी के लेदर के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
सिर्फ गाय-बैल ही नहीं, इन जानवरों की खाल भी होती है इस्तेमाल
कार इंटीरियर में लेदर के लिए सिर्फ कैटल हाइड पर निर्भरता नहीं होती। कुछ मामलों में भेड़ और बकरी की खाल भी इस्तेमाल की जाती है। भेड़ का लेदर नरम और लचीला माना जाता है, इसलिए इसे कुछ प्रीमियम हिस्सों में जगह मिल सकती है। वहीं, भैंस का लेदर अपेक्षाकृत किफायती विकल्प हो सकता है और कम कीमत वाली कारों में इस्तेमाल किया जा सकता है।
अब तेजी से बढ़ रहा सिंथेटिक लेदर का चलन
आजकल कारों में जानवरों से मिलने वाले लेदर के विकल्प के तौर पर सिंथेटिक लेदर का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है। PU और PVC जैसे पदार्थों से बनाए गए इन मटेरियल को असली चमड़े जैसा लुक और टेक्सचर दिया जा सकता है। कम कीमत और आसान रखरखाव के कारण यह विकल्प कई कारों में लोकप्रिय हो रहा है।
लग्जरी कारों में मिलता है खास किस्म का लेदर
महंगी और लग्जरी कारों में लेदर की क्वालिटी पर खास ध्यान दिया जाता है। Full-grain और Nubuck जैसे लेदर कुछ प्रीमियम इंटीरियर में इस्तेमाल किए जाते हैं।
इनकी प्राकृतिक बनावट, टेक्सचर और फिनिश के कारण इनकी कीमत सामान्य लेदर से काफी ज्यादा हो सकती है। सीट, स्टीयरिंग और डैशबोर्ड जैसे बार-बार छुए जाने वाले हिस्सों में प्रीमियम लेदर का इस्तेमाल देखने को मिलता है।
Bovine Nappa भी है लग्जरी इंटीरियर का हिस्सा
Bovine Nappa leather भी कैटल हाइड से तैयार होने वाला उच्च गुणवत्ता का लेदर है। इसकी सॉफ्ट फिनिश और प्रीमियम एहसास के कारण इसे लग्जरी कारों के इंटीरियर में इस्तेमाल किया जाता है।
हर कार में लेदर एक जैसा नहीं होता
इसलिए अगली बार कार की चमड़े वाली सीट देखकर यह मान लेना सही नहीं होगा कि हर कार में एक ही तरह का लेदर इस्तेमाल किया गया है। कार के मॉडल, निर्माता और कीमत के हिसाब से इंटीरियर में अलग-अलग जानवरों की खाल से बना लेदर या फिर सिंथेटिक मटेरियल इस्तेमाल किया जा सकता है।