ऑफिस में मेहनत करना जरूरी है, लेकिन क्या सिर्फ ज्यादा काम करने और हर किसी की मदद करने से करियर तेजी से आगे बढ़ता है? भारतीय रिक्रूटर जुही भाटिया का मानना है कि ऐसा हमेशा नहीं होता। उन्होंने सोशल मीडिया पर 9 ऐसे तरीके साझा किए हैं, जिन्हें उन्होंने ‘थोड़ा चालाक’ बताया। इनमें अपनी उपलब्धियां बताने से लेकर बेहतर मौके मांगने और वेतन वार्ता में चुप रहने तक की सलाह शामिल है।
अगर आपने कोई काम समय से पहले पूरा कर लिया है, तो तुरंत यह बताने की जरूरत नहीं कि अब आपके पास कोई काम नहीं है। हर बार अतिरिक्त जिम्मेदारी उठाने से बेहतर है कि अपने समय और प्राथमिकताओं को समझदारी से संभालें।
टीम में काम करना अच्छी बात है, लेकिन अपने योगदान को छिपाना समझदारी नहीं। अगर आपने किसी प्रोजेक्ट की अगुवाई की है या कोई महत्वपूर्ण काम खुद तैयार किया है, तो उसे स्पष्ट रूप से बताएं। अपनी उपलब्धियों को सामने रखना आत्मप्रचार नहीं, बल्कि अपनी मेहनत की पहचान बनाना है।
करियर में आगे बढ़ने के लिए सिर्फ अपने बॉस की नजर में होना काफी नहीं है। कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों को भी आपके काम और क्षमता के बारे में पता होना चाहिए। मीटिंग में अपनी राय रखें, अच्छे सवाल पूछें और महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स का हिस्सा बनने की कोशिश करें।
भाटिया की यह सलाह सबसे दिलचस्प है। उनका कहना है कि कभी-कभी दूसरी कंपनियों में इंटरव्यू देने से आपको अपनी बाजार कीमत का अंदाजा होता है। इससे पता चलता है कि आपके अनुभव और कौशल के लिए दूसरी कंपनियां कितना भुगतान करने को तैयार हैं।
मीटिंग के नोट्स बनाना, ऑफिस पार्टी की तैयारी करना या जन्मदिन के लिए पैसे इकट्ठा करना जैसे काम अक्सर कोई नहीं करना चाहता। हर बार ऐसे काम के लिए आगे आने से आपका काम बढ़ सकता है, लेकिन जरूरी नहीं कि इससे करियर को फायदा मिले।
अगर आपको लगता है कि आप बड़ी जिम्मेदारी संभाल सकते हैं, तो केवल इसलिए पीछे न हटें क्योंकि आप नौकरी की हर योग्यता पूरी नहीं करते। प्रमोशन, बड़ी भूमिका या बेहतर वेतन की मांग करने में झिझकने के बजाय खुद को चुनौती देने की कोशिश करें।
समस्या बताने के साथ उसका समाधान लेकर जाना, जरूरी जानकारी पहले साझा करना और समय पर मदद करना आपको भरोसेमंद कर्मचारी बना सकता है। भाटिया के मुताबिक, इसे ही अक्सर ऑफिस की राजनीति कहा जाता है, जबकि वास्तव में यह खुद को उपयोगी साबित करने का तरीका है।
8. अपने काम का अकेला विशेषज्ञ न बनें
अगर किसी खास काम को सिर्फ आप ही कर सकते हैं, तो यह आपकी ताकत लग सकती है। लेकिन इससे आप उसी जिम्मेदारी में फंस भी सकते हैं। इसलिए किसी दूसरे सहयोगी को अपना काम सिखाएं, ताकि आप आगे बढ़कर नई और बड़ी जिम्मेदारियां संभाल सकें।
सैलरी या प्रमोशन की बातचीत में अपनी मांग रखने के बाद तुरंत चुप्पी तोड़ने की जरूरत नहीं। सामने वाले को जवाब देने का समय दें। कई बार बातचीत में थोड़ी खामोशी आपके पक्ष में काम कर सकती है।
इन सलाहों का मकसद ऑफिस में चालाकी करना नहीं, बल्कि अपनी पेशेवर कीमत समझना है। मेहनत के साथ अपनी उपलब्धियों को सामने रखना, सही अवसर मांगना और जरूरत पड़ने पर सीमाएं तय करना भी करियर का अहम हिस्सा है।