मुंबई को सपनों का शहर कहा जाता है, जहां हर कोई बेहतर नौकरी, लाइफस्टाइल और अवसरों की तलाश में आता है। लेकिन इस शहर की असली तस्वीर थोड़ी अलग है, क्योंकि यहां रहना आसान नहीं बल्कि काफी महंगा साबित होता है। किराया, खाना, ट्रैवल, कैब, बिजली-पानी और रोजमर्रा के छोटे-छोटे खर्च मिलकर महीने के बजट को पूरी तरह प्रभावित कर देते हैं। कई बार अच्छी सैलरी होने के बावजूद भी लोग बचत नहीं कर पाते, क्योंकि खर्च इतनी तेजी से बढ़ जाते हैं कि वो सैलरी को लगभग खत्म कर देते हैं।
