पहली बार हुआ ऐसा ट्रांसप्लांट, सूअर के अंगों ने इंसान में शुरू किया काम, जानिए पूरी खबर

चीन के वैज्ञानिकों ने चिकित्सा जगत में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए ब्रेन-डेड मरीज में सूअर के लिवर और दोनों किडनी का सफल ट्रांसप्लांट किया है। इसे पहला मल्टी-ऑर्गन पिग-टू-ह्यूमन ट्रांसप्लांट माना जा रहा है। यह प्रयोग अंगों की कमी की समस्या के समाधान की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है

अपडेटेड Jun 09, 2026 पर 4:08 PM
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वैज्ञानिकों के अनुसार सूअर को इस तरह के प्रयोगों के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है

चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में चीन से आई एक नई उपलब्धि ने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। वैज्ञानिकों ने पहली बार एक ब्रेन-डेड मरीज के शरीर में सूअर के लिवर और दोनों किडनी सफलतापूर्वक ट्रांसप्लांट किए हैं। इस अनोखे प्रयोग को अब तक का पहला “मल्टी-ऑर्गन पिग-टू-ह्यूमन ट्रांसप्लांट” माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह नियंत्रित परिस्थितियों में की गई, जिसमें जेनेटिकली मॉडिफाइड सूअर के अंगों का उपयोग किया गया। यह प्रयोग इसलिए भी खास है क्योंकि दुनिया भर में अंग दान की भारी कमी एक बड़ी समस्या बनी हुई है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर यह तकनीक आगे सफल होती है तो भविष्य में हजारों मरीजों की जान बचाई जा सकती है। हालांकि, अभी इसकी सुरक्षा, स्थायित्व और मानव शरीर पर लंबे समय के प्रभाव को लेकर और भी रिसर्च की जरूरत है।

ब्रेन-डेड मरीज पर किया गया अनोखा प्रयोग


रिपोर्ट के मुताबिक, यह प्रयोग 53 वर्षीय व्यक्ति पर किया गया, जिसे पहले ही ब्रेन-डेड घोषित किया जा चुका था। सर्जरी के दौरान डॉक्टरों ने मरीज के लिवर और किडनी निकालकर उनकी जगह जेनेटिकली मॉडिफाइड सूअर के अंग लगाए। खास बात यह रही कि अंगों को उनके प्राकृतिक स्थान पर ही फिट किया गया, जिसे ऑर्थोटोपिक ट्रांसप्लांट कहा जाता है।

कुछ घंटों में ही काम करने लगे अंग

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि ट्रांसप्लांट के कुछ ही घंटों बाद सूअर के अंग शरीर में काम करने लगे। लिवर और किडनी लगभग पांच दिनों तक सक्रिय रहे, जिसके बाद यह रिसर्च परिवार की सहमति से समाप्त कर दी गई।

जेनेटिक बदलाव से बढ़ाई गई सफलता की संभावना

वैज्ञानिकों ने बताया कि सूअर के अंगों को मानव शरीर के अनुकूल बनाने के लिए उनमें जेनेटिक बदलाव किए गए थे। तीन ऐसे जीन हटाए गए जो शरीर में रेजेक्शन पैदा कर सकते थे, जबकि तीन मानव जीन जोड़े गए ताकि खून के थक्के और अस्वीकृति की संभावना कम हो सके।

अंगों की भारी कमी का संभावित समाधान

यह रिसर्च चीन की Guangxi Medical University की टीम ने किया, जिसका मकसद दुनिया में बढ़ती अंगों की कमी की समस्या का समाधान तलाशना है। अध्ययन को मेडिकल जर्नल Med में भी प्रकाशित किया गया है। आज भी हजारों मरीज हर साल अंगों की कमी के कारण अपनी जान गंवा देते हैं।

क्यों चुना गया सूअर?

वैज्ञानिकों के अनुसार सूअर को इस तरह के प्रयोगों के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है क्योंकि उनके अंग आकार और कार्य में इंसानी अंगों से काफी मिलते-जुलते हैं। साथ ही उनमें कुछ अन्य जानवरों की तुलना में बीमारियों के फैलने का खतरा भी कम होता है।

एक साथ कई अंग ट्रांसप्लांट की बड़ी चुनौती

अब तक ज्यादातर रिसर्च एक ही अंग के ट्रांसप्लांट तक सीमित थी, लेकिन एक साथ कई अंगों का ट्रांसप्लांट करना कहीं ज्यादा जटिल माना जाता है। इसमें शरीर के रिएक्शन, इम्यून सिस्टम और अंगों के आपसी तालमेल जैसी कई चुनौतियां शामिल होती हैं।

भविष्य की ओर एक बड़ा कदम

वैज्ञानिकों का कहना है कि यह प्रयोग भविष्य में उन मरीजों के लिए उम्मीद की नई किरण बन सकता है, जिन्हें एक साथ कई अंगों की जरूरत होती है। हालांकि, अभी भी लंबे समय तक सुरक्षा, इम्यून सिस्टम की प्रतिक्रिया और सफलता दर जैसी कई चुनौतियों पर काम करना बाकी है।

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