55 स्टेप्स में तैयार करता है आइसक्रीम और दिखाता है उल्टे कप की मैजिक ट्रिक! चीन का ये रोबोट हुआ वायरल

शंघाई के एक डेयरी क्वीन आउटलेट में अब ग्राहकों की आइसक्रीम इंसान नहीं, बल्कि एक रोबोट तैयार कर रहा है। चीनी रोबोटिक्स कंपनी शार्पा का ये रोबोट ऑर्डर लेने से लेकर ब्लिजर्ड बनाने और ग्राहक तक पहुंचाने का काम खुद करता है। ये प्रयोग दिखाता है कि भविष्य में रेस्तरां में रोबोट किस तरह रोजमर्रा के काम संभाल सकते हैं

अपडेटेड Sep 22, 2026 पर 12:17 PM
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ब्लिजर्ड बनाना देखने में भले ही आसान लगे, लेकिन रोबोट के लिए यह काफी मुश्किल है

सोचिए, आप आइसक्रीम खाने के लिए किसी दुकान पर जाएं, ऑर्डर दें और सामने कोई इंसान नहीं, बल्कि एक रोबोट आपकी पसंदीदा आइसक्रीम तैयार करके आपके हाथ में थमा दे। चीन के शंघाई में अब यह कल्पना हकीकत बन चुकी है। शंघाई की वुजियांग रोड स्थित डेयरी क्वीन के एक आउटलेट में एक रोबोट ग्राहकों के लिए मशहूर ब्लिजर्ड आइसक्रीम तैयार कर रहा है। इस रोबोट को चीनी रोबोटिक्स स्टार्टअप शार्पा ने विकसित किया है। खास बात यह है कि मशीन सिर्फ आइसक्रीम परोसती नहीं, बल्कि ऑर्डर लेने से लेकर तैयार डेजर्ट ग्राहक तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया संभाल सकती है।

एक आइसक्रीम बनाने के लिए 55 स्टेप

ब्लिजर्ड बनाना देखने में भले ही आसान लगे, लेकिन रोबोट के लिए यह काफी मुश्किल है। कंपनी के मुताबिक, मशीन को एक आइसक्रीम तैयार करने के लिए करीब 55 अलग-अलग स्टेप पूरे करने होते हैं। इसमें कप उठाना और सही जगह रखना, आइसक्रीम डालना, टॉपिंग मिलाना, सामग्री को मिक्स करना और आखिर में डेजर्ट को ग्राहक के लिए तैयार करना शामिल है। सबसे दिलचस्प हिस्सा वो है जिसे डेयरी क्वीन की खास पहचान माना जाता है ब्लिजर्ड के कप को उल्टा करना। रोबोट भी इस प्रक्रिया को दोहरा सकता है, बिना आइसक्रीम को कप से गिराए।


इंसान से अभी भी धीमा है रोबोट

तकनीक भले ही भविष्य जैसी नजर आती हो, लेकिन रफ्तार के मामले में रोबोट अभी इंसानों से पीछे है। यिकाई की रिपोर्ट के मुताबिक, शंघाई स्टोर में रोबोट को एक ब्लिजर्ड तैयार करने में करीब छह मिनट लगते हैं। वहीं, एक इंसानी कर्मचारी यही काम लगभग दो से तीन मिनट में कर सकता है। फिलहाल रोबोट को केवल ओरियो ब्लिजर्ड तैयार करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। कंपनी यह देख रही है कि वास्तविक रेस्तरां के माहौल में मशीन कितनी भरोसेमंद तरीके से काम कर सकती है।

असली मकसद सिर्फ कर्मचारियों की जगह लेना नहीं

शार्पा के लिए ये प्रयोग केवल इंसानों की जगह रोबोट लगाने की कोशिश नहीं है। कंपनी ये समझना चाहती है कि एक सामान्य उद्देश्य वाला रोबोट वास्तविक दुनिया में कितनी कठिन जिम्मेदारियां संभाल सकता है। एक पतले पेपर कप को उठाना भी मशीन के लिए चुनौती है। उसे इतना ही दबाव लगाना होता है कि कप उठ जाए, लेकिन वह खराब न हो या उसके साथ दूसरा कप न उठ जाए।

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