1.5 लाख की सैलरी से डिलीवरी बॉय बनने की आ गई नौबत, कैसे? सोशल मीडिया पर वायरल हो रही ये इमोशनल कहानी

जब डिलीवरी एजेंट ने अपने जीवन की कहानी साझा की, तो वो स्तब्ध रह गए। कभी शापूरजी पल्लोनजी कंपनी में कंस्ट्रक्शन सुपरवाइजर के तौर पर काम करते हुए वह हर महीने करीब 1.25 लाख रुपये कमाया करते थे। करियर की सीढ़ियां चढ़ रहे थे, ज़िंदगी स्थिर थी। लेकिन एक कार दुर्घटना ने सब कुछ बदल दिया

अपडेटेड May 25, 2025 पर 4:28 PM
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पुणे से एक डिलीवरी बॉय की ऐसी कहानी सामने आई है, जो काफी भावुक करने वाली है

कहते हैं आदमी की किस्मत कब बदल जाए, ये कहा नहीं जा सकता। पुणे से एक  डिलीवरी बॉय की एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो किस्मत के भरोसे बैठने वाले लोगों के लिए एक बड़ा सबक है। पुणे में एक कंस्ट्रक्शन कंपनी के सुपरवाइजर को जिंदगी में ऐसे दिन देखने पड़े कि उन्हें 1.5 लाख की सैलरी के जॉब को छोड़कर अब  डिलीवरी बॉय का काम करना पड़ा रहा है। इस डिलीवरी बॉय की कहानी अभी सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही है। इस कहानी को श्रीपाल गांधी ने फेसबुक पर साझा किया, जिसने हजारों लोगों को भावुक कर दिया।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रही ये इमोशनल कहानी

श्रीपाल गांधी ने सोशल मीडिया पर बताया कि, उन्होंने सबवे से पनीर टिक्का सैंडविच, बिंगो चिप्स और ओट किशमिश कुकीज़ का ऑर्डर किया था। लेकिन जब पैकेट आया, तो उन्होंने देखा कि केवल सैंडविच ही मौजूद था, बाकी आइटम गायब थे। उन्होंने डिलीवरी करने आए युवक से इसकी जानकारी ली। जवाब में वह थोड़ा संकोच करता नजर आया और बोला, “सर, कृपया रेस्तरां या ज़ोमैटो से संपर्क करें।” शुरुआत में यह एक सामान्य शिकायत जैसी लग रही थी, लेकिन आगे जो हुआ उसने श्रीपाल गांधी को झकझोर कर रख दिया और यह छोटी-सी घटना उनके लिए जीवन भर की सीख बन गई।


इस घटना ने छुआ हजारों का दिल

श्रीपाल गांधी ने जब अपने ऑर्डर में आइटम कम पाए, तो उन्होंने सबवे रेस्टोरेंट से संपर्क किया। रेस्टोरेंट ने तुरंत खेद जताया और कहा, "क्या आप डिलीवरी पार्टनर को वापस भेज सकते हैं? हम उसे हुई असुविधा के लिए 20 रुपये देंगे।" लेकिन यहां एक तकनीकी दिक्कत थी — डिलीवरी एजेंट को तब तक रेस्टोरेंट लौटने की ज़रूरत नहीं होती जब तक कि ज़ोमैटो की ओर से उसे ऐसा निर्देश न मिले, क्योंकि पेमेंट ज़ोमैटो के माध्यम से होता है। इसके बावजूद, उस डिलीवरी पार्टनर ने एक पल भी झिझक नहीं दिखाई। उसने गांधी से कहा, "सर, यह मेरी ज़िम्मेदारी है। मैं चाहता हूँ कि ग्राहक संतुष्ट रहें।"

वह बिना किसी शिकायत के दोबारा रेस्टोरेंट गया, गायब आइटम लिए और मुस्कुराते हुए उन्हें लौटा दिया। सबसे खास बात यह रही कि उसने सबवे द्वारा दिए जा रहे 20 रुपये लेने से भी इनकार कर दिया। उसने जो बात कही, वह दिल को छू लेने वाली थी: "भगवान ने मुझे बहुत कुछ दिया है। मैं किसी और की गलती के लिए पैसा क्यों लूं?" इस घटना ने न सिर्फ श्रीपाल गांधी को, बल्कि सोशल मीडिया पर हजारों लोगों को इंसानियत, ईमानदारी और जिम्मेदारी की अहमियत का एहसास कराया।

पहले थी 1.5 लाख की सैलरी 

श्रीपाल गांधी के लिए यह मुलाक़ात यहीं खत्म नहीं हुई। जब डिलीवरी एजेंट ने अपने जीवन की कहानी साझा की, तो वो स्तब्ध रह गए। कभी शापूरजी पल्लोनजी कंपनी में कंस्ट्रक्शन सुपरवाइजर के तौर पर काम करते हुए वह हर महीने करीब 1.25 लाख रुपये कमाया करते थे। करियर की सीढ़ियां चढ़ रहे थे, ज़िंदगी स्थिर थी। लेकिन एक कार दुर्घटना ने सब कुछ बदल दिया। हादसे में उनके बाएं हाथ और पैर में लकवा हो गया। इसके साथ ही उनकी नौकरी और उम्मीद भी कुछ समय के लिए उनसे छिन गई। “ज़ोमैटो ने मेरी ज़िंदगी को एक नई दिशा दी। उन्होंने मुझे काम दिया, एक मौका दिया और सबसे बढ़कर एक मकसद दिया।”

उन्होंने आगे कहा, “सर, ज़ोमैटो ने मेरे परिवार को सहारा दिया। मैं शारीरिक रूप से अक्षम हो सकता हूं, लेकिन उन्होंने मुझे सम्मान के साथ जीने का अवसर दिया। मैं कभी नहीं चाहूंगा कि मेरे कारण ज़ोमैटो की छवि को कोई नुक़सान पहुंचे।” इस सच्ची कहानी ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि मुश्किलें चाहे जितनी भी हों, अगर इरादे मजबूत हों और किसी का थोड़ा-सा साथ मिल जाए तो ज़िंदगी फिर से मुस्कुरा सकती है।

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