Video: ‘कभी भी कूल बॉस मत बनो’, उद्यमी की सलाह वायरल; बताया कर्मचारियों को ज्यादा छूट देने का नुकसान

ऑफिस में बॉस का दोस्ताना रवैया कर्मचारियों को पसंद आता है, लेकिन क्या जरूरत से ज्यादा ‘कूल’ बनना नुकसानदायक हो सकता है? उद्यमी हेमंत वाधवानी के वायरल वीडियो ने इसी सवाल पर चर्चा छेड़ दी है। अपने पुराने अनुभव का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि कर्मचारियों को ज्यादा छूट देने की कीमत उन्हें कैसे चुकानी पड़ी

अपडेटेड Sep 12, 2026 पर 4:04 PM
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उद्यमी ने बताया कैसे कर्मचारियों ने उठाया भरोसे का फायदा

ऑफिस में हर कर्मचारी चाहता है कि उसका बॉस समझदार, सहज और दोस्ताना हो। लेकिन क्या बहुत ज्यादा ‘कूल’ बनना कभी बॉस के लिए ही परेशानी खड़ी कर सकता है? उद्यमी हेमंत वाधवानी के एक वायरल वीडियो ने इसी सवाल पर बहस छेड़ दी है। उन्होंने अपनी पुरानी नौकरी का अनुभव साझा करते हुए बताया कि कर्मचारियों के साथ जरूरत से ज्यादा दोस्ताना व्यवहार करने का उन्हें नुकसान उठाना पड़ा।

मैं बॉस बनकर रौब नहीं दिखाना चाहता था

वाधवानी ने बताया कि वह अपने जूनियर कर्मचारियों को हमेशा अपने बराबर मानने की कोशिश करते थे। उन्हें यह पसंद नहीं था कि टीम के सदस्यों को बार-बार यह एहसास कराया जाए कि वह उनके सीनियर या बॉस हैं। उनका मानना था कि अगर ऑफिस का माहौल सहज रहेगा, तो कर्मचारी खुलकर बात करेंगे और काम भी बेहतर तरीके से होगा। इसलिए उन्होंने टीम के साथ दोस्ताना रिश्ता बनाए रखा और उन्हें काफी आजादी भी दी। लेकिन वक्त के साथ उन्हें लगा कि उनकी यही सोच उलटी पड़ने लगी।


जब भरोसा ही बनने लगा परेशानी की वजह

वाधवानी के मुताबिक, उन्होंने टीम के सदस्यों को जो भरोसा और आजादी दी, कुछ लोगों ने उसका फायदा उठाना शुरू कर दिया। उनका कहना है कि कई मौकों पर कर्मचारियों ने उनके साथ मिली छूट का गलत इस्तेमाल किया और आखिरकार कुछ लोगों ने उन्हें ‘बैकस्टैब’ भी किया। यहीं से उन्हें महसूस हुआ कि बॉस और कर्मचारी के बीच दोस्ताना व्यवहार के साथ प्रोफेशनल सीमाएं होना भी बेहद जरूरी है।

‘Never, ever be a cool boss’

अपने वीडियो में वाधवानी ने काफी सीधे शब्दों में कहा, “Never, ever be a cool boss.” उनका कहना है कि मैनेजर को टीम के साथ अच्छा व्यवहार जरूर करना चाहिए, लेकिन उसे यह भी स्पष्ट रखना चाहिए कि किस हद तक व्यक्तिगत और पेशेवर रिश्ता आगे बढ़ सकता है। उनके अनुसार, बहुत ज्यादा लचीलापन देने से कभी-कभी कर्मचारी उस छूट को अपनी सुविधा के लिए इस्तेमाल करने लगते हैं। इसलिए शुरुआत से ही सीमाएं तय करना जरूरी है।

क्या अच्छा बॉस दोस्ताना नहीं हो सकता?

वाधवानी की बात सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की राय बंट गई। कुछ यूजर्स ने उनकी बात से सहमति जताई, जबकि कुछ का मानना था कि अच्छा लीडर बनने के लिए सख्त दूरी बनाना जरूरी नहीं है। एक यूजर ने कहा कि सही तरीका यह हो सकता है कि बॉस कर्मचारियों के साथ अच्छा और सहज व्यवहार करे, लेकिन जरूरत पड़ने पर उन्हें यह भी पता हो कि मैनेजर अपना रुख सख्त कर सकता है।

असली सवाल- डर या सम्मान?

वायरल वीडियो ने आधुनिक ऑफिस कल्चर को लेकर एक दिलचस्प सवाल खड़ा कर दिया है। क्या कर्मचारियों से काम करवाने के लिए बॉस का सख्त होना जरूरी है, या फिर भरोसे और सम्मान पर आधारित माहौल ज्यादा बेहतर होता है?

(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।)

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